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Maharashtra New CM: सरकार गठन,मुख्यमंत्री के शपथग्रहण में देरी से क्या होगा, क्यों राष्ट्रपति शासन जरूरी नहीं?

Maharashtra New CM: महाराष्ट्र में एनडीए या महायुति बहुत बड़ी बहुमत के साथ सत्ता में वापस लौटा है। पिछले ढाई साल से शिवसेना के एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने हुए हैं। लेकिन, बदले राजनीतक समीकरणों और सत्ताधारी गठबंधन में बीजेपी की शानदार जीत की वजह से नए सीएम के नाम की चर्चा चल रही है। इस वजह से अटकलें हैं कि अगर 26 नवंबर तक नए मुख्यमंत्री ने शपथ नहीं ली या नई सरकार का गठन नहीं हुआ तो मजबूरन राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत आ सकती है।

महाराष्ट्र में 288 सीटों वाली विधानसभा में महायुति को 234 सीटें मिली हैं। इसलिए राज्यपाल के सामने बहुमत के आंकड़े को लेकर कोई दुविधा नहीं है। महायुति चुनाव से पूर्व वाला गठबंधन है, इसलिए वह उसी के नेता या सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री के पद पर शपथ लेने के लिए आमंत्रित करेंगे। इस केस में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन अभी तक उसने विधायक दल का नेता नहीं चुना है।

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महायुति की बड़ी बहुमत के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा
महायुति के अन्य घटक दलों जैसे शिवसेना और एनसीपी में विधायक दलों के नेताओं का चुनाव हो चुका है। एकनाथ शिंदे शिवसेना के और अजित पवार एनसीपी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। इस बार विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 132, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिली हैं।

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26 नवंबर को खत्म हो रहा है मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल

दरअसल, मौजूदा महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसलिए, इससे पहले नव-निर्वाचित विधानसभा का गठन होना आवश्यक बताया जा रहा है। इसलिए दलीलें दी जा रही हैं कि अगर मंगलवार यानी 26 नवंबर तक नए मुख्यमंत्री का शपथग्रहण नहीं हुआ और नई सरकार ने कार्यभार नहीं संभाला तो राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेजने के अलावा विकल्प नहीं होगा।

नई सरकार बनने में देरी से राष्ट्रपति शासन लगाना जरूरी नहीं- राजनीति के जानकार
लेकिन, राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस तरह की अटकलों को खारिज कर दिया है कि मुख्यमंत्री के शपथग्रहण में देरी का परिणाम राष्ट्रपति शासन हो सकता है। टीओआई ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि यह आवश्यक नहीं है कि 26 नवंबर से पहले सरकार का गठन हो जाए और तबतक नया मुख्यमंत्री शपथ ले ले।

कई बार कार्यकाल खत्म होने के बाद हुआ सरकार का गठन
क्योंकि,महाराष्ट्र में पहले के ऐसे कई उदाहरण हैं, जब विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सीएम का शपथग्रहण हुआ है। मसलन, 13वीं विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर, 2019 को समाप्त हो गया था। लेकिन, नए मुख्यमंत्री ने 28 नवंबर को शपथ ली थी।

इसी तरह से 11वीं विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर, 2009 को ही खत्म हो चुका था, लेकिन नए मुख्यमंत्री को 7 नवंबर को शपथ दिलाई गई थी।

यही कहानी 2004 के विधासभा चुनावों के बाद भी देखने को मिली थी। 10वीं विधानसभा का कार्यकाल 19 अक्तूबर, 2004 को खत्म हो गया, लेकिन नए मुख्यमंत्री का शपथग्रहण 1 नवंबर को हुआ था।

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विधायिका के पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी अनंत कलसे के मुताबिक,'महाराष्ट्र में महायुति को स्पष्ट बहुमत मिला है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में नई सरकार बन जाएगी। अगर नए मुख्यमंत्री का शपथग्रहण नहीं भी होता है, तो भी गवर्नर मौजूदा सीएम से नए मुख्यमंत्री के पदभार ग्रहण करने तक कार्यभार संभाले रखने के लिए कह सकते हैं।'

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