Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी को क्यों नहीं चाहिए मुस्लिम उम्मीदवार?
Maharashtra Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की ओर से एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया जाने का मामला तूल पकड़ चुका है। खासकर कांग्रेस के अंदर इसको लेकर खुलकर नाराजगी देखने को मिली रही है।
मुंबई में कांग्रेस के दिग्गज चेहरे बाबा सिद्दीकी मोहभंग होने की वजह से पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। पिछले हफ्ते आरिफ नसीम खान ने भी खुद को लोकसभा चुनाव अभियान से दूर कर लिया। वे महाराष्ट्र में कांग्रेस के एक प्रमुख मुस्लिम चेहरा रह गए हैं।

एमवीए से एक भी मुस्लिम को नहीं मिला टिकट
खान मुंबई उत्तर मध्य लोकसभा सीट से कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। लेकिन, यहां से मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ को मौका दिया गया है। तथ्य यह है कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन या विपक्षी महा विकास अघाड़ी में से किसी की ओर से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है।
'कांग्रेस को मुस्लिम वोट चाहिए.....कैंडिडेट क्यों नहीं'
मुसलमानों के बीच कांग्रेस की एक अलग छवि रही है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी से मायूसी मिलने के बाद आरिफ नसीम खान ने ये कहते हुए खुद को प्रचार से अलग कर लिया कि, 'कांग्रेस को मुस्लिम वोट चाहिए.....मुसलमान कैंडिडेट क्यों नहीं....'
महाराष्ट्र की 14 सीटों पर महत्वपूर्ण हैं मुस्लिम वोटर
महाराष्ट्र में मुसलमानों की जनसंख्या करीब 1.30 करोड़ है, जो कि राज्य की कुल आबादी के 11.56% हैं। राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से कम से कम 14 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमान वोटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मायानगरी मुंबई की सभी 6 सीटों के अलावा धुले, नांदेड़, परभणी, लातूर, औरंगाबाद, भिवंडी, अकोला और ठाणे की सीटों पर चुनावों में इस समुदाय का रोल अहम है।
मुंबई की लोकसभा सीटों पर तो मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 14% से लेकर 25% तक के बीच है। फिर भी कांग्रेस या एमवीए का इस समुदाय के प्रत्याशियों से कन्नी काटना हैरान करता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने तीन दलों के गठबंधन की बताई वजह
हाल ही में जब महाराष्ट्र में मुस्लिम उम्मीदवार से मुंह फेरने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से गुवाहाटी में सवाल पूछा गया था तो उन्होंने इस सवाल पर पहले तो आपत्ति जताई।
फिर बोले, 'यह तीन पार्टियों का गठबंधन (एमवीए) है और मिलजुलकर फैसला लिया गया।' अलबत्ता उन्होंने नसीम खान के लिए कुछ व्यवस्था करने का संकेत दिया।
बाद में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा, 'किसे टिकट देना है, ये कांग्रेस का विशेषाधिकार है। हमने कोई स्टैंड नहीं लिया है कि कांग्रेस को किसे उतारना चाहिए। अगर कोई कहता है कि सेना ने नसीम खान का विरोध किया है, क्योंकि वह मुसलमान हैं तो यह एक गलत बयान है। उनके पास अभी भी मौका है, उम्मीदवार बदलने का।'
2019 में ओवैसी की पार्टी से एक मुस्लिम को मिली थी जीत
अभी महाराष्ट्र से सिर्फ एक लोकसभा सांसद मुसलमान हैं। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम से इम्तियाज जलील 2019 में औरंगाबाद से महज 3,000 से कुछ ज्यादा वोटों से चुनाव जीते थे। तब भी ओवैसी की पार्टी ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) से गठबंधन किया था। इस बार एआईएमआईएम कुछ और सीटों पर भी चुनाव लड़ने की बात कह रही है।
आज शिवसेना-यूबीटी को भी समर्थन देने को राजी हैं मुसलमान
वैसे महाराष्ट्र में पहले भी आबादी के हिसाब से मुसलमानों की नुमाइंदगी कम देखी गई है। लेकिन, अभी समीकरण बदल चुका है। कभी बाल ठाकरे की जो शिवसेना एक तरह से मुस्लिम मतदाताओं के लिए वर्जित होती थी, वे अब कांग्रेस की वजह से उद्धव ठाकरे की पार्टी का भी खुलकर समर्थन को तैयार हैं।
'हारने वाली सीट पर भी दे देते मुसलमान को टिकट'
नांदेड़ के एक सामाजिक कार्यकर्ता उबैद बहुसैन को लगता है कि नसीम खान ने मुस्लिम वोट को कांग्रेस के हल्के में लेने की जो बात कही है, वह सही है।
मुस्लिम वोट को लेकर निश्चिंत है कांग्रेस?
उनके मुताबिक, 'अगर महाराष्ट्र में पार्टियों को लगता है कि मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सकते, उन्हें कम से कम एक सीट भी देनी चाहिए, जिसके बारे में वे पहले से जानते हैं कि वह हारने जा रहे हैं। इससे समुदाय को यह संदेश जाएगा कि उन्हें कुछ तो प्रतिनिधित्व मिला।'
एमवीए के एक मुस्लिम विधायक के अनुसार वह आग्रह कर रहे थे कि उनके चुनाव क्षेत्र में एमवीए उम्मीदवार मुस्लिम इलाके में एक सभा करें, लेकिन उसे भी अनसुना कर दिया गया। उस विधायक ने कहा, 'वह मुस्लिम वोट मिलने को लेकर इतने निश्चिंत हैं कि मुसलमानों के इलाके में प्रचार तक भी नहीं करना चाहते।'












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