Maharashtra: 6 क्लास की छात्रा से लगवाए 100 उठक-बैठक, और मौत, रूह कंपाने वाला इस स्कूल में बच्चों पर टॉर्चर!
Maharashtra Crime News: महाराष्ट्र के वसई शहर स्थित एक स्कूल की खौफनाक घटना ने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि वसई के एक स्कूल में एक मासूम बच्ची की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। महज 10 मिनट की देरी के लिए छठी कक्षा की 12 वर्षीय छात्रा काजल गोंड को शिक्षिका ने स्कूल बैग पीठ पर लादकर 100 उठक-बैठक करने की सजा दी।
सजा पूरी करने के तुरंत बाद उसे पीठ में तेज दर्द हुआ, जो दिनों तक बढ़ता रहा। आखिरकार, 15 नवंबर को मुंबई के जेजे अस्पताल में इलाज के दौरान काजल की मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्थमा से पीड़ित काजल के फेफड़ों में बैग के बोझ तले उठक-बैठक से आंतरिक रक्तस्राव हुआ, जो घातक साबित हुआ।

यह घटना श्री हनुमंत विद्या मंदिर हाईस्कूल (Vasai Vidya Mandir School), सतीवली (वसई पूर्व) में 8 नवंबर को घटी। काजल के परिवार ने शिक्षिका ममता यादव और स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस हृदयविदारक घटना ने अभिभावकों, स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों में आक्रोश पैदा कर दिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने स्कूल पर ताला जड़ दिया है और चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज न हो, स्कूल दोबारा न खुले।
Maharashtra Vasai Vidya Mandir School Case: क्या घटी दिल दहला देने वाली यह घटना?
8 नवंबर को काजल कुछ अन्य छात्रों के साथ महज 10 मिनट देरी से स्कूल पहुंचीं। कक्षा अध्यापिका ममता यादव ने देरी का बहाना बनाते हुए उन्हें सजा के तौर पर उठक-बैठक करने को कहा। काजल को स्कूल बैग कंधे पर लादकर 100 उठक-बैठक पूरी करनी पड़ीं, जबकि अन्य छात्र 10-20 के बाद रुक गए। काजल ने डर के मारे सारी सजा पूरी की। स्कूल से घर लौटते ही उसे पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द शुरू हो गया। मां शीला गौड़ ने बताया, 'घर आकर बेटी ने कहा कि तबीयत ठीक नहीं है। गर्दन से लेकर कमर तक दर्द हो रहा है, हिल-डुल नहीं पा रही।' अगले दिन से हालत बिगड़ने लगी। पहले वसई के आस्था अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर दूसरे स्थानीय अस्पताल में शिफ्ट किया गया। लेकिन स्थिति गंभीर होने पर 14 नवंबर को मुंबई के जेजे अस्पताल ले जाया गया। 15 नवंबर रात करीब 11 बजे काजल ने अंतिम सांस ली।
परिवार के अनुसार, काजल को अस्थमा की समस्या थी, जो स्कूल को पता थी। बैग का अतिरिक्त बोझ सजा को घातक बना दिया। डॉक्टरों ने बताया कि उठक-बैठक से फेफड़ों में आंतरिक रक्तस्राव हुआ, जो अस्थमा के कारण जानलेवा साबित हुआ। काजल के पिता, जो मजदूर हैं, ने शनिवार को वालिव पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें शिक्षिका और प्रबंधन को मौत का जिम्मेदार ठहराया। पुलिस अधिकारी ने कहा, 'पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है। उसके बाद बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई होगी।' काजल का अंतिम संस्कार रविवार को हो गया, जहां सैकड़ों लोग जुटे।
परिवार का दर्द: 'बेटी ने सजा पूरी की, लेकिन स्कूल ने उसकी जिंदगी छीन ली'
काजल की मां शीला गौड़ की आंखों में आंसू और गुस्सा भरा है। उन्होंने कहा, 'मेरी बेटी निर्दोष थी। 10 मिनट की देरी पर ऐसी क्रूर सजा? बैग लादकर 100 उठक-बैठक यह तो यातना है। घर आकर बोली, 'मां, दर्द हो रहा है।' हमने सोचा सामान्य दर्द है, लेकिन वह आंतरिक चोट थी। आज मेरी काजल नहीं रही।' परिवार ने स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। काजल की छोटी बहन ने बताया, 'दीदी डर गई थीं, इसलिए रुकीं नहीं।' परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया है।
आक्रोशित अभिभावक और मनसे का हल्ला: स्कूल पर ताला, दोषियों पर मुकदमा की मांग
घटना के खुलासे के बाद वसई-विरार में अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों लोग स्कूल पहुंचे और नारेबाजी की। मनसे के स्थानीय नेता सचिन मोरे ने कहा, 'यह बाल हिंसा है। काजल को अस्थमा था, स्कूल जानबूझकर मार डाला। जब तक शिक्षिका और प्रबंधन पर हत्या का मुकदमा न दर्ज हो, स्कूल न खुले।' मनसे कार्यकर्ताओं ने स्कूल में ताला जड़ दिया और गेट पर नजर रखी। एनसीपी (सपा) के रोहित सासाने ने कहा, 'स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह बच्चों की सुरक्षा का सवाल है।'
स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि श्री हनुमंत विद्या मंदिर को केवल आठवीं कक्षा तक की मान्यता है, लेकिन यह नौवीं-दसवीं तक छात्रों का दाखिला ले रहा है। स्कूल प्रबंधन ने इसे स्वीकार किया। वसई-विरार क्षेत्र में कई स्कूल ऐसी अवैध प्रथा चला रहे हैं, जहां छात्रों को बाद में अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। जिला शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गलांगे ने कहा, 'यह अवैध है। सभी विवरण इकट्ठा कर कार्रवाई करेंगे। स्कूल की मान्यता पर सवाल उठेगा।'
स्कूल का रुख: 'रिपोर्ट आने पर मानेंगे गलती'
स्कूल अधिकारी विकास यादव ने सफाई दी, 'अगर पोस्टमॉर्टम में सजा मौत का कारण बनी, तो हम गलती मानेंगे। लेकिन देरी पर सामान्य सजा दी जाती है।' उन्होंने अन्य छात्रों को 50-60 उठक-बैठक की बात कही, लेकिन काजल ने 100 पूरी की। स्कूल ने घटना पर शोक जताया, लेकिन अभिभावकों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा।
एक्सपर्ट्स की राय: शारीरिक सजा पर रोक क्यों जरूरी?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 2009 के RTE एक्ट के तहत शारीरिक सजा प्रतिबंधित है। बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. नेहा शर्मा ने कहा, 'ऐसी सजाएं बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं। अस्थमा जैसे मामलों में घातक हो सकती हैं। स्कूलों को सकारात्मक अनुशासन सिखाना चाहिए।' यह घटना महाराष्ट्र में स्कूलों की निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। वसई-विरार जैसे क्षेत्रों में अवैध स्कूलों की भरमार है, जो बच्चों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रही हैं।
यह दर्दनाक घटना पूरे देश को झकझोर रही है। काजल की मौत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की लापरवाही का आईना है। अभिभावक सतर्क हों: अपने बच्चों की स्कूल डायरी चेक करें, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी शेयर करें। न्याय मिलना चाहिए, ताकि कोई और काजल न खोए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है, जो सच्चाई उजागर करेगी।
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