Maharashtra में टूटा MVA गठबंधन! कांग्रेस अकेले लड़ेगी BMC चुनाव, किसका होगा फायदा, किसे होगा भारी नुकसान?
BMC Election 2025: महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सभी सीटों पर 2 दिसंबर को मतदान होगा, जिसके नतीजे अगले दिन यानी 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। हालांकि मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे बड़े शहरों के नगर निगमों के चुनाव की घोषणा अभी नहीं की गई है। संभावना है कि इन महानगर पालिकाओं के चुनाव जनवरी के अंत तक कराए जाएंगे।
लेकिन इन चुनावों से पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता ने बीएमसी और महाराष्ट्र चुनाव को लेकर बड़ा बयान दे डाला है। जिसके बाद विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंधन (MVA)के टूटने की कगार पर नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर गठबंधन टूटता है और कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ती है तो किसे फायदा होगा और किसे ज्यादा नुकसान होगा? आइए जानते हैं?

कांग्रेस अकेले दम पर लड़ेगी चुनाव
दरसअल, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने घोषणा की है कि कांग्रेस महानगर पालिका चुनाव कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़ेगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2025 में पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। वडेट्टीवार ने इस बात का दावा किया है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। वडेट्टीवार ने जोर देकर कहा कि मुंबई दुनिया की सबसे बड़ी महानगरपालिका है और मुंबई कांग्रेस के नेताओं ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
उद्धव ठाकरे से क्यों कांग्रेस हुई नाराज?
ध्यान देने वाली बात ये है कि बृहद मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। इस बार का बीएमसी चुनाव ठाकरे बंधु (राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे) के एक साथ लड़ने की संभावना प्रबल है। हालांकि, महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के एक प्रमुख घटक दल कांग्रेस ने इस गठबंधन का स्पष्ट विरोध किया था।
क्या महाराष्ट्र निकाय भी कांग्रेस अकेले लड़ेगी?
वहीं अब कांग्रेस ने अकेले बीएमसी चुनाव लड़ने का ऐलान किया। वहीं स्थानीय नगरपालिका के चुनावों पर बोलते हुए, वडेट्टीवार ने बताया कि "स्थानीय निकाय चुनावों के संबंध में सभी निर्णय स्थानीय स्तर पर लेने का अधिकार हमने स्थानीय नेताओं को दिया है। इसलिए, स्थानीय स्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उस जिले के कार्यकर्ताओं और नेताओं को ये निर्णय लेने होंगे।"
मनसे के साथ गठबंंधन पर क्या बोली कांग्रेस?
मनसे के साथ गठबंधन की अटकलों पर उन्होंने कहा, "अगर नासिक में कांग्रेस नेताओं ने मनसे के साथ जाने का फैसला किया है, तो हम इसे केवल नासिक तक ही सीमित मानते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों को देखकर लिए जाते हैं, जिससे बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनती। वडेट्टीवार ने कहा कि गठबंधन के भीतर के घटक दल, जो चुनाव में गठबंधन करना चाहते हैं, वे स्थानीय स्तर पर चर्चा करके निर्णय ले सकते हैं।
क्या शरद पवार से भी दोस्ती तोड़ देगी कांग्रेस?
विजय वडेट्टीवार ने शरद पवार से दोस्ती तोड़ने के सवाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर शरद पवार की ओर से कोई प्रस्ताव आता है, तो उस पर विचार किया जाएगा। अगर उद्धव ठाकरे मनसे के साथ गठबंधन करते हैं और एमवीए में गठबंधन का प्रस्ताव आता है, तो इस पर स्थानीय नेताओं के साथ चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस ने मुंबई नगर निगम का चुनाव अपने दम पर लड़ने का निश्चय किया है।
कांग्रेस अकेले लड़ेगी चुनाव तो किसे होगा फायदा, किसे होगा नुकसान?
कांग्रेस महाराष्ट्र में आगामी चुनाव अकेले लड़ने का फैसले पर अमल करती है तो उसे अपनी संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इस रणनीति से उसकी सीटें कम होने का जोखिम अधिक है। कांग्रेस के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) के अन्य घटक दलों, जैसे उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) के नेतृत्व वाली शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस के अलग लड़ने से गठबंधन कमजोर और विभाजित दिखेगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी या महायुति को मिल सकता है।
यह स्थिति विशेष रूप से बृहद मुंबई महानगर पालिका (BMC) जैसे महत्वपूर्ण निगमों के चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है। विपक्ष के कमजोर पड़ने से भाजपा और उसके सहयोगी दल अपनी स्थिति और मजबूत कर सकते हैं खासकर मुंबई, पुणे और नाशिक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अहम प्रभाव पड़ सकता है।












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