Maharashtra Election Result 2024: क्यों हारा MVA? मालेगांव सेंट्रल में कांग्रेस को नहीं मिले मुस्लिम वोट
Maharashtra Election Results 2024 in Hindi: महाराष्ट्र में मालेगांव सेंट्रल सीट इस विधानसभा में शुरू से चर्चा में रही है। बीजेपी और महायुति को लोकसभा चुनावों में जो हार का सामना करना पड़ा था, तो उसका ठीकरा पार्टी धुले लोकसभा सीट के अंदर आने वाली इसी विधानसभा क्षेत्र पर फोड़ती थी। लेकिन, इस चुनाव में भारी मतदान के बावजूद कांग्रेस का चौथे स्थान पर खिसकना राज्य में महा विकास अघाड़ी (MVA) की करारी हार का एक संकेत लग रहा है।
आगे बढ़ने से पहले मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट पर आए चुनाव के नतीजे पर गौर करना जरूरी है। यहां अंतिम राउंड की गिनती के बाद एआईएमआईएम के मुफ्ती इस्माइल अब्दुल खलीक मात्र 75 वोटों से आगे थे। उन्हें 1,09,332 वोट मिले हैं। दूसरे स्थान पर इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र के आसिफ शेख रशीद को 1,09,257 वोट मिले हैं।

मालेगांव सेंट्रल सीट पर चौथे नंबर पर रही कांग्रेस
तीसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी की शान ए हिंद निहाल अहमद रही हैं, जिन्हें 9,580 वोट मिले हैं। लेकिन, हैरानी की बात है कि कांग्रेस के उम्मीदवार एजाज बेग अजीज बेग को सिर्फ 7,485 वोट ही मिल सके हैं।

मालेगांव सेंट्रल में 78% से ज्यादा हैं मुस्लिम वोटर
मालेगांव सेंट्रल एक मुस्लिम बहुल सीट है। एक आंकड़े के अनुसार यहां के 78% से ज्यादा वोटर मुसलमान हैं। लोकसभा चुनावों में यहां जबर्दस्त वोटिंग हुई थी और विधानसभा चुनावों में भी वही रफ्तार रही है। इसी सीट पर एकतरफा वोटिंग से कांग्रेस पार्टी धुले लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को हरा पाई थी।
लोकसभा चुनाव में मालेगांव सेंट्रल सीट पर कांग्रेस को मिले थे 1.98 लाख वोट
इस साल लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था, तो उसने इसके पीछे धुले लोकसभा सीट में मतदान के पैटर्न का ही हवाला दिया। दरअसल, धुले की 6 में से 5 विधानसभा सीटों पर तो बीजेपी को बढ़त मिली हुई थी, लेकिन मालेगांव सेंट्रल में कांग्रेस उम्मीदवार को 1.98 लाख वोट मिल गए और इसकी वजह से बीजेपी मात्र 3,831 वोटों से हार गई। इसे भगवा खेमे सेपार्टी के खिलाफ 'वोट जिहाद' भी कहा गया।
मालेगांव सेंट्रल के मुसलमानों का कांग्रेस से मोहभंग!
अलबत्ता इस चुनाव में यहां से बीजेपी या महायुति से कोई भी उम्मीदवार नहीं उतरा था और कांग्रेस का मुकाबला असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव की पार्टियों के साथ था और लगता है कि ऐसे में यहां के मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा नहीं दिखाया है।
यह पूरे देश में हुए पिछले कुछ चुनावों से बिल्कुल अलग ट्रेंड लगता है, जहां मुसलमानों ने कांग्रेस को वोट न देकर उसके विकल्प को चुनने की कोशिश की है। हालांकि, यह एक शुरुआती अनुमान है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस या एमवीए के पक्ष में मुस्लिम मतदाताओं ने वह वफादारी नहीं दिखाई है, जिसका पार्टी और उसका गठबंधन उम्मीद कर रहा था।












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