Maharashtra Election: '6 करोड़' मराठा किसे डालेंगे वोट? MVA को मनोज जारांगे पाटिल का झटका!

Maharashtra Chunav 2024: मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे पाटिल का एक बार फिर से हृदय परिवर्तन होता नजर आ रहा है। जबसे उन्होंने खुद के समर्थकों को चुनाव नहीं लड़वाने का एलान किया है, वह तीसरी बार अपनी लाइन बदलते नजर आ रहे हैं। अब उन्होंने कहा है कि उनके लिए महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों एक ही हैं।

महाराष्ट्र के जालना के अंतरावाली सराती में अब भी मराठों के बीच मनोज जारांगे पाटिल का प्रभाव साफ तौर पर नजर आता है। वे कई बार यू-टर्न लेते नजर आए हैं, लेकिन अपने समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता पहले की तरह कायम है। क्या युवा और क्या बुजुर्ग सभी उनके पैर छूते नजर आते हैं।

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'6 करोड़' मतदाता किधर जाएंगे?
उनके समर्थक अभी भी उनसे आशीर्वाद और मार्गदर्शन मांगने आते हैं कि वोट किसे देना है। पाटिल ने ईटी से बातचीत में कहा है, 'मराठों के लिए सिर्फ एक ही मुद्दा है, वह है आरक्षण हासिल करना। और उनके मुद्दे ने पूरे महाराष्ट्र में '6 करोड़' मराठों को एकजुट किया है।'

MVA को मनोज जारांगे पाटिल का झटका!
जब उनसे पूछा गया कि महायुति या एमवीए मराठा मुद्दे का समर्थन कर सकते हैं? तो उन्होंने कहा, 'सब एक ही हैं।' उन्होंने कहा, 'आपको एक बात स्पष्ट कर दूं। मैं न तो किसी का समर्थन कर रहा हूं, न ही किसी का विरोध कर रहा हूं। मुझे मेरे आंदोलन के अलावा और किसी से भी उम्मीद नहीं है।'

'मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सिर्फ बीजेपी से नाराजगी नहीं'
जब उनसे यह पूछा गया कि उनके अंदाज से बहुतों को लगता है कि उनके निशाने पर मूल रूप से बीजेपी है, तब उन्होंने बताया, 'मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सब एक ही हैं। वे इसके बारे में बात करते हैं, लेकिन उसे सुनिश्चत नहीं करते। बीजेपी के साथ भी यही है।'

हाल तक बीजेपी बनी हुई थी नंबर वन दुश्मन!
कुछ दिन पहले ही उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से कहा था, 'मराठों को बहुत अच्छे से मालूम है कि हराना किसे है। वे लोकसभा चुनावों के समय ही इसे समझ चुके हैं और वह अभी भी उन्हें यह पता है। कोई भी असमंजस नहीं है।'

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मराठा कर सकते हैं बड़ा उलटेफर!
महाराष्ट्र में करीब 28% मतदाता मराठा समुदाय के बताए जाते हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान इस जाति ने आरक्षण मुद्दे की वजह से आम तौर पर विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) का दिल खोलकर समर्थन किया था और महायुति के खिलाफ गुस्सा दिखाया था। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अगर महायुति के खिलाफ गुस्से की यह धार कम हुई तो फिर बड़ा उलटफेर होना तय लग रह हा।

अगर जारांगे के नए दावों के तहत मराठा समुदाय ने स्वतंत्र तौर पर अपनी मर्जी के मुताबिक मतदान किया तो मराठों का वोट बिखरना तय है और इसका सबसे ज्यादा फायदा सत्ताधारी महायुति गठबंधन को मिलने की संभावना है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों में मराठा वोट बैंक महायुति के खिलाफ और एमवीए के समर्थन में गोलबंद हुआ था और विपक्ष को इसका बहुत बड़ा फायदा मिला था।

वैसे भी बीजेपी और महायुति गठबंधन ने मराठों की नाराजगी की आशंका में पहले ही ओबीसी वोट बैंक को एकजुट करने के लिए जमीनी स्तर पर काफी तैयारी की हुई है। जारांगे अगर अपनी ताजा स्टैंड पर कायम रहे तो एमवीए की मुश्किल बढ़नी तय हैं।

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