Maharashtra Chunav: बीड में एक ही परिवार के 4 उम्मीदवार, पति-पत्नी भी आजमा रहे भाग्य, दिलचस्प हुआ मुकाबला
Maharashtra Elections 2024: अविभाजित एनसीपी का ऐतिहासिक गढ़ रही बीड विधानसभा सीट पर आगामी चुनावों में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। पूर्व मंत्री जयदत्त क्षीरसागर के परिवार के चार-चार सदस्य यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर पहले अविभाजित एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। इस बार एक ही परिवार के चार सदस्यों की उम्मीदवारी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
बीड सीट से एक ही परिवार के चार उम्मीदवार
2019 के विधानसभा चुनाव में अविभाजित एनसीपी के संदीप क्षीरसागर ने अपने चाचा जयदत्त क्षीरसागर को 1,984 वोटों से हराया था। जयदत्त ने तब अविभाजित शिवसेना के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस बार जयदत्त निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि संदीप एनसीपी (एससीपी) गुट से चुनाव मैदान में हैं।

पति-पत्नी भी इसी सीट से आजमा रही हैं सियासी दांव
जयदत्त क्षीरसागर के एक अन्य भतीजे योगेश क्षीरसागर ने पहले एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था। लेकिन, बाद में उन्हें अजित पवार की एनसीपी ने बीड सीट से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया।
संदीप क्षीरसागर की पत्नी भी अपना सियासी दांव यहीं से आजमा रही हैं। नेहा क्षीरसागर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। अन्य उम्मीदवारों में यहां से शिवसेना के अनिल जगताप और पूर्व विधायक सुरेश नावले शामिल हैं, जो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
चार नवंबर को स्थिति ज्यादा स्पष्ट होने की संभावना
महाराष्ट्र की 288 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होना है। मतगणना तीन दिन बाद 23 नवंबर को होगी। वरिष्ठ पत्रकार दत्ता देशमुख ने बताया कि 4 नवंबर को नामांकन वापसी के बाद स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी। क्योंकि, हो सकता है, तब नाम वापसी से पारिवारिक और राजनीतिक समीकरण बदल जाए।
चुनावों में क्षीरसागर परिवार के सदस्यों के सामने चुनौतियां
इस चुनाव में क्षीरसागर परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मसलन, योगेश को अपने समर्थकों का एकमत समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
वहीं, पिछले चुनाव में भतीजे से हार चुके जयदत्त को प्रमुख राजनीतिक दलों से समर्थन नहीं मिल पाया है, जिसके चलते वे निर्दलीय ही मैदान में हैं। वहीं मौजूदा विधायक संदीप को लेकर भी मतदाताओं एक वर्ग में असंतोष देखने को मिल रहा है।
एक ही परिवार के इतने सदस्यों के चुनाव मैदान में होने से मुकाबला रोचक हो गया है। उम्मीद है कि जैसे-जैसे प्रचार अभियान तेज होगा और चुनाव नजदीक आएंग तो चीजें ज्यादा साफ होती चली जाएंगी।
हालांकि, मतदाता परिवार के ही किसी सदस्य पर ही भरोसा जताते हैं या फिर उनकी पसंद कोई और है, यह तो वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा। (इनपुट-पीटीआई)












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