नीलम गोरे के बचाव में उतरे महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फडणवीस, उद्धव ठाकरे गुट को दिया करारा जवाब

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस नीलम गोरे के बचाव में उतरे। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति के अयोग्यता की मांग कर रहे उद्धव गुट को करारा जवाब दिया ।

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे को अयोग्य घोषित करने की शिवसेना (यूबीटी) की मांग के बीच डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने मंगलवार को कहा कि अयोग्यता पर कानून उनके पद पर लागू नहीं होती है।

पहले उद्धव ठाकरे के वफादार रहे गोरे इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली प्रतिद्वंद्वी शिवसेना में शामिल हो गई। परिषद में इस मुद्दे पर बोलते हुए फड़नवीस ने कहा कि वो किसी भी नई पार्टी में शामिल नहीं हुई हैं, क्योंकि वो शिवसेना के टिकट पर सदन के सदस्य के रूप में चुनी गई थीं और उनका 'धनुष और तीर' चिह्न अब पार्टी का नाम और चिह्न दोनों है।

devendra fadnavis

शिवसेना (यूबीटी) नेता अनिल परब ने ये मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब तक गोरे को उपसभापति पद से हटाने या उनकी अयोग्यता पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें उपसभापति के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उनका कृत्य दसवीं अनुसूची (संविधान की जिसमें विधायकों की अयोग्यता के बारे में प्रावधान हैं) के तहत कार्रवाई को आकर्षित करता है।

फडणवीस ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि 10वीं अनुसूची अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर लागू नहीं होती है। कानून के तहत उपसभापति की कोई अयोग्यता नहीं है। फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट में शेष सेना सदस्यों को भी 'मूल शिवसेना' में शामिल होना चाहिए क्योंकि उनकी सदस्यता के बारे में सवाल उठेंगे।

उन्होंने कहा कि गोरे को एमएलसी के रूप में अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली सेना (यूबीटी) की याचिका पर फैसला तब लिया जा सकता है जब अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा या इस पर निर्णय लेने के लिए किसी सदस्य को नामित किया जाएगा।

अयोग्यता की प्रक्रिया सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं है। जब तक सदन की सदस्यता अयोग्य नहीं हो जाती, तब तक कोई सदस्य भाग ले सकता है और सदन में सर्वोच्च पद पर आसीन हो सकता है।

अध्यक्षता कर रहे निरंजन डावखरे ने कहा कि ये एक अजीब स्थिति है, इसलिए निर्णय लेने के लिए एक पैनल बनाया जाएगा।

पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के जयंत पाटिल ने कहा कि गोरे राज्य विधानमंडल के परिसर में शिंदे के नेतृत्व वाली सेना में शामिल हुई और पूछा कि क्या उपसभापति के रूप में उनकी क्षमता में ये स्वीकार्य है। उन्होंने चेयरपर्सन पद के लिए चुनाव कराने की भी मांग की।

एनसीपी के शशिकांत शिंदे ने बताया कि जब तक उन्हें हटाने पर फैसला नहीं हो जाता, गोरे को अपने पद का प्रभार किसी अन्य सदस्य को सौंप देना चाहिए।

कांग्रेस के सतेज पाटिल ने कहा कि गोरे का मामला अयोग्यता के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संकट है क्योंकि सदन के पीठासीन अधिकारी ने दल बदल लिया है और कोई सभापति नहीं है।

दूसरी ओर संस्कृति मंत्री और भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि गोरे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना को छोड़कर शिवसेना नहीं छोड़ी है।

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