उद्धव के खिलाफ नारायण राणे की टिप्पणी को महाराष्ट्र कोर्ट ने 'असंसदीय' माना, फिर बरी क्यों किया? जानिए
केंद्रीय मंत्री नारायण राणे उद्धव ठाकरे पर दिए विवादास्पद बयान के मामले में बरी हो गए हैं। महाराष्ट्र की कोर्ट ने माना है कि उनकी भाषा असंसदीय थी, लेकिन कानूनी तौर पर उन्हें दोषी सिद्ध करने के लिए काफी नहीं थी।

महाराष्ट्र की एक अदालत ने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ अमर्यादित बयान के मामले में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को बरी कर दिया है। रायगढ़ के सीजेएम कोर्ट से उन्हें बरी किए जाने का फैसला शनिवार को ही आया था, लेकिन रविवार को विस्तृत आदेश उपलब्ध हुआ है, जिससे जाहिर हुआ है कि राणे को किस आधार पर राहत दी गई है। क्योंकि, राणे ने तत्कालीन सीएम को 'जोरदार थप्पड़' मारने जैसी अभद्र टिप्पणी की थी। कोर्ट ने उनके बयान को एक केंद्रीय मंत्री के पद पर बैठे शख्स के लिए पूरी तरह अनुचित बताया है।

उद्धव के खिलाफ टिप्पणी पर बरी हुए राणे
महाराष्ट्र की एक अदालत ने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ 'अगर मैं वहां होता तो मार देता जोर से थप्पड़...' वाली केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की टिप्पणी को असंसदीय करार दिया है। रायगढ़ की एक कोर्ट ने कहा है कि राणे एक प्रभावशाली राजनीतिक शख्सियत हैं और वे 2021 में तत्कालीन सीएम के खिलाफ की गई अपनी 'असंसदीय' टिप्पणी के सियासी परिणाम से अवगत थे। लेकिन, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा कि उनकी टिप्पणी कानून के प्रावधानों के तहत शत्रुता बढ़ाने वाली नहीं थी, क्योंकि इसमें किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया था।

बयान 'विवादास्पद और राजनीतिक तौर पर असंवेदनशील'
रायगढ़ की अदालत ने शनिवार को इस मामले में राणे को बरी करते हुए कहा कि जो भी दस्तावेज और सामग्रियां उपलब्ध हैं, वह उनके खिलाफ सभी अपराधों के अस्तित्व का खुलासा नहीं करते हैं। इसलिए आरोपी पर लगाए गए आरोप 'निराधार' पाए गए हैं। अलबत्ता कोर्ट ने यह जरूर कहा कि आरोपी ने जो बयान दिया उसे 'विवादास्पद और राजनीतिक तौर पर असंवेदनशील' माना जा सकता है, जिसकी उम्मीद एक ऐसे व्यक्ति से नहीं की जा सकती है, जो केंद्रीय मंत्री के पद पर बैठा हो। रायगढ़-अलीबाग के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एसडब्ल्यू उगाले ने यह टिप्पणी राणे को उद्धव के खिलाफ दिए गए विवादित बयान मामले में बरी करते हुए की है। अदालत के आदेश की विस्तृत जानकारी रविवार को उपलब्ध हुई है।

राणे के खिलाफ 2021 में दर्ज हुआ था मामला
रायगढ़ क महाड पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने नारायण राणे के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए (1-बी) (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 505(2) (सार्वजनिक क्षति को प्रेरित करने वाला बयान),504 (शांति भंग करने की मंशा से जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत समन जारी किया था। भाजपा नेता के खिलाफ यह मुकदमा 2021 में दर्ज हुआ था, जब राज्य में उद्धव की अगुवाई वाली महा विकास अघाडी की सरकार थी।

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नारायण राणे ने उद्धव पर क्या टिप्पणी की थी?
दरअसल, राणे ने दावा किया था कि 15 अगस्त पर भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने आजादी के वर्ष की गिनती में भूल की थी। उन्होंने इसी आधार पर उनके खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी में कहा था, 'यह शर्मनाक बात है कि मुख्यमंत्री को स्वतंत्रता का साल नहीं पता है। अपने भाषण के दौरान स्वतंत्रता के वर्ष की जानकारी लेने के लिए उन्हें पीछे मुड़ना पड़ा। अगर मैं वहां होता तो मैं (उन्हें) एक जोरदार तमाचा लगा देता।'

इस कानूनी आधार पर बरी हुए राणे
हालांकि, राणे ने यह कहकर अपना बचाव किया था कि ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी करके उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। राणे के वकील सतीश मानशिंदे ने अदालत में उन्हें बरी किए जाने की याचिका पर कहा था, 'राणे ने कथित तौर पर (तब के) मुख्यमंत्री पर एक बयान दिया था। उन्होंने धर्म, वंश, जन्म स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय या कोई भी अन्य आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने वाला कोई बयान नहीं दिया था।' यही नहीं उनके वकील की दलील थी कि कथित बयान से समाज में किसी तरह की शत्रुता, नफरत या धार्मिक, नस्ली, भाषा या क्षेत्रीय समूहों या जातीय या समुदायों के बीच किसी भी तरह की दुश्मनी पैदा होने की कोई आशंका नहीं है। मानशिंदे के मुताबिक यह मामला राजनीतिक मंशा से प्रेरित है, लेकिन कानून में इसका कोई ठोस आधार नहीं है।

'तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ असंसदीय टिप्पणी की थी'
कोर्ट ने इस मामले में उद्धव के वकीलों से असहमति जताते हुए राणे को बरी तो कर दिया, लेकिन उनके बयान की भाषा पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है, 'यह कहना काफी है कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन्हें पता है कि वह जो बोलेंगे उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी। उन्होंने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ असंसदीय टिप्पणी की थी और राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व और राजनीति में लंबे अनुभव होने के नाते वह अच्छी तरह जानते थे कि उनके कहे गए शब्दों के बाद समाज में क्या हो सकता है।' शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के नेता उद्धव ठाकरे 2019 के नवबर से लेकर 2022 के जून तक महाराष्ट्र के सीएम थे।

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