Maharashtra Chunav: ग्रामीण महाराष्ट्र में बदल सकता है समीकरण, 'परिवर्तन महाशक्ति' कितनी दमदार?

Maharashtra Election News: महाराष्ट्र में छोटे-छोटे दलों के नेताओं ने एक मोर्चा बनाया है, जिसे 'परिवर्तन महाशक्ति' का नाम दिया गया है। हालांकि, अभी इस मोर्चे का चुनावी लिहाज से कोई खास वजूद नहीं दिख रहा है। लेकिन, जिस तरह से इसमें शामिल नेता जमीनी स्तर पर छोटे-छोटे समूहों में वोटरों को टारगेट करना चाहते हैं, उससे अगर ग्रामीण इलाकों की सीटों पर असर पड़ गया तो सारे बने-बनाए समीकरण धरे के धरे रह सकते हैं।

2019 में प्रकाश अंबेडकर के वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) ने प्रदेश की राजनीति को एक नई धारा दी थी। इसका प्रभाव खासकर विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) पर देखने को मिला था। धीरे-धीरे उसका असर कम हुआ है तो 'परिवर्तन महाशक्ति' इन दलों के लिए एक नई चुनौती बनकर खड़ा हो रहा है।

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'परिवर्तन महाशक्ति' क्या है?
'परिवर्तन महाशक्ति' में पूर्व राज्यसभा सांसद कोल्हापुर के संभाजीराजे छत्रपति, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक राजू शेट्टी, प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्चू काडु, महाराष्ट्र राष्ट्र समिति के शंकर धोंगडे और स्वतंत्र भारत पार्टी के वामनराव चतप शामिल हैं। मोर्चे में शामिल नेताओं से साफ है कि इसका लक्ष्य किसान, असंगठित क्षेत्र के मजदूर, मराठा समुदाय के गरीब और आदिवासी वोटर हैं।

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'परिवर्तन महाशक्ति' की वजह से महाराष्ट्र में हरियाणा जैसा परिणाम?
हालांकि यह मोर्चा अभी नया है, लेकिन जानकारों की राय में चुनावों में इसकी वजह से विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) का खेल बिगड़ सकता है।

ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश पवार का कहना है, 'विधानसभा चुनावों में यह एमवीए के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है। अगर तीसरा मोर्चा वोट का बड़ा हिस्सा जुटाने में सफल रहा, तो महाराष्ट्र में महायुति को फायदा होगा, महाराष्ट्र में हरियाणा जैसा परिणाम आ सकता है।'

वीबीए की वजह से 2019 में कांग्रेस-एनसीपी का बिगड़ गया था खेल
इन आशंकाओं के पीछे वजहें भी हैं। वंचित बहुजन अघाड़ी की वजह से 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को कम से कम 11 सीटों पर नुकसान हुआ था। उसी साल विधानसभा चुनावों में भी गठबंधन के वोट वीबीए की वजह से बंट गए थे।

वीबीए के उम्मीदवार 250 से ज्यादा सीटों पर थे। वह एक भी सीट जीत नहीं सकी, लेकिन उसे 5.5% वोट मिले और कम से कम 32 सीटों पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन का खेल बिगड़ गया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन उसके खतरे से राहत पा ली।

ग्रामीण महाराष्ट्र की सीटों पर 'परिवर्तन महाशक्ति' की नजर
लेकिन, अब विपक्षी गठबंधन के लिए 'परिवर्तन महाशक्ति' के नए खतरे के रूप में उभरने की आशंका है। नए मोर्चे के बारे में राजू शेट्टी ने कहा है, 'संभाजीराजे का जहां गरीब मराठों में अच्छा समर्थन है, हमारे शेतकरी संगठन का किसानों के बीच बड़ा जनाधार है। बच्चू काडु के साथ आदिवासियों और असंगठित क्षेत्र का समर्थन है। हम राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं और मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिलने का भरोसा है। हमने अभी यह तय नहीं किया है कि कितनी सीटों पर लड़ना है, लेकिन यह साफ है कि हमारे उम्मीदवार प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से लड़ेंगे।'

एमवीए का खेल खराब हो सकता है- एक्सपर्ट
प्रकाश पवार का कहना है, 'लोकसभा चुनावों में महायुति और एमवीए दोनों का वोट शेयर लगभग समान ही था। विधानसभा चुनाव दोनों गठबंधनों के ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए और भी कड़े मुकाबले वाला होगा।'

उनका अनुमान है, 'हालांकि, तीसरा मोर्चा अभी खुद को स्थापित करने में ही लगा है, लेकिन यह अगर वोट शेयर का एक फीसदी भी ले लेता है, तो इस प्रमुख राज्य में एमवीए की संभावनाओं पर सीधा असर पड़ेगा।'

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