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Assembly Election 2024: क्या महाराष्ट्र और झारखंड में सहयोगियों के भरोसे रहेगी कांग्रेस?

Assembly Election 2024 News: महाराष्ट्र और झारखंड दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी सहयोगी दलों के भरोसे रहेगी। खासकर के हरियाणा में हार के बाद उसका चुनावी गणित और कमजोर हुआ है। झारखंड में वह जेएमएम की अगुवाई में चुनाव लड़ेगी तो महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) में सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी (एससीपी) उसपर हावी नजर आ रही है।

बीजेपी से सीधे मुकाबले में कमजोर पड़ रही है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के कमजोर दिखने की वजह ये है कि पिछले साल के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद वह कहीं भी बीजेपी के साथ सीधे मुकाबले में टिक नहीं पा रही है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बाद हरियाणा में उसे भाजपा ने बुरी तरह से पछाड़ा है।

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जम्मू और कश्मीर में भी पार्टी का अपना ग्राफ काफी नीचे गिरा है; और सबसे बड़ी बात कि लोकसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी की लोकप्रियता वाला गुब्बारा भी हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में फूट चुका है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में बदल गया लोकसभा वाला समीकरण
लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में 48 सीटों में से एमवीए या इंडिया ब्लॉक को 30 सीटों पर जीत मिली थी और एनडीए या महायुति 17 सीटों पर सिमट गया था।

वहीं झारखंड में भी 14 में से कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन ने बीजेपी-एजेएसयू गठबंधन को 9 सीटों पर रोक दिया था और खुद 5 सीटें जीती थी। लेकिन, लोकसभा चुनाव का अंकगणित, विधानसभा चुनाव की केमिस्ट्री से अलग होता है। हरियाणा इसका सटीक उदाहरण है।

हरियाणा के बाद बीजेपी को फिर से बड़ी चुनौती मानने लगा है विपक्ष
इंडिया ब्लॉक के नेता खुद अपनी चुनौतियों को मानने लगे हैं। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है, 'हमें महाराष्ट्र और झारखंड जीतने का भरोसा है, लेकिन हो सकता है कि मुकाबला कड़ा हो जाए। मतदाता मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ महाराष्ट्र में पूरा और कुछ हद तक झारखंड में अपना गुस्सा लोकसभा चुनावों में ही निकाल चुके हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में हमने देखा है कि बीजेपी के वोटर फिर से एकजुट हो रहे हैं। इसलिए विपक्ष को भी महाराष्ट्र और झारखंड में तत्काल सुधार करना होगा।'

कांग्रेस की ईवीएम वाली कहानी पर भी अंदर उभरने लगा है असंतोष!
विपक्ष खासकर कांग्रेस के नेता जब भी चुनाव हारते हैं, उनमें ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ने की एक आदत सी नजर आने लगी है। लेकिन, सूत्रों के मुताबिक अब विपक्ष के लोग जिसमें महाराष्ट्र और झारखंड के कुछ कांग्रेसी भी शामिल हैं, कांग्रेस पार्टी की इस प्रवृत्ति को लेकर आगाह करने लगे हैं।

उन्हें यह डर सता रहा है कि अगर ईवीएम पर दोष मढ़ने वाली प्रवृत्ति जारी रही तो कुछ समर्थक मतदान केंद्र तक यह सोचकर पहुंचना बंद कर सकते हैं कि 'उनके वोट से क्या होगा, मायने तो ईवीएम रखेगा।'

हरियाणा के रिजल्ट ने महाराष्ट्र में बदल दिए कांग्रेस के तेवर!
सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में एमवीए दलों के बीच लगभग 210 सीटों के लिए बातचीत पूरी हो चुकी है। कुछ सीटें फंसी हुई थीं, क्योंकि हरियाणा में जीत की उम्मीद में कांग्रेस ज्यादा दावेदारी कर रही थी, लेकिन अब उम्मीद है कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होने वाली।

झारखंड में जेएमएम भरोसे कांग्रेस!
झारखंड में तो हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली जेएमएम पहले से ही ड्राइविंग सीट पर है। उसके आदिवासी कार्ड और कल्याणकारी योजनाओं में ही कांग्रेस की उम्मीदें अटकी हुई हैं। क्योंकि यहां पार्टी के पास अपना कोई खास चेहरा भी नहीं है। ऊपर से मुंबई से लेकर रांची तक कांग्रेसी नेता इस सोच में पड़े हैं कि हरियाणा में चुनाव प्रबंधन करने वाली राहुल गांधी की टीम इन दोनों राज्यों में किस तरह से चुनावों का संचालन करती है।

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