Maharashtra Chuanv: क्या नतीजों के बाद फिर बदलेंगे महाराष्ट्र में समीकरण, उद्धव की शिवसेना दे रही क्या संकेत?
Maharashtra Chuanv 2024: 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जीतने वाले गठबंधन की ही सरकार बनेगी, 2019 के नतीजों को देखने के बाद तो ऐसा दावा कतई नहीं किया जा सकता। इस बार राज्य में मुख्य तौर पर सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच टक्कर है। अभी तो ये दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
जहां तक सत्ताधारी महायुति की बात है तो इसमें स्पष्ट तौर पर बीजेपी का दबदबा दिख रहा है और इसकी जीत के बाद सीएम पद पर कौन बैठेगा, इसमें भी पार्टी की भूमिका सबसे अहम और निर्णायक रहने वाली है। इसके ठीक उलट एमवीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के फैसले में तीनों सहयोगी दलों का संख्या गणित सबपर भारी पड़ने वाला है।

एमवीए जीता तो कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
कांग्रेस,उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी-एससीपी ने चुनाव से पहले किसी को सीएम चेहरा घोषित नहीं किया है। जबकि, तथ्य यह है कि उद्धव की अगुवाई में यह गठबंधन करीब ढाई साल तक सरकार चला चुका है। शिवसेना (यूबीटी) ने बहुत जोर लगाया कि सहयोगी दल उद्धव को ही सीएम चेहरा घोषित कर दें। लेकिन, कांग्रेस इस मांग के खिलाफ चट्टान बनकर खड़ी रही है।
जब शिवसेना (यूबीटी) के नेता और उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे से वनइंडिया ने सोमवार को पूछा कि एमवीए ने सीएम चेहरा क्यों नहीं घोषित किया तो वे बोले,"चिंता मत कीजिए, चुनाव के बाद हम इसपर फैसला करेंगे।" जबकि, कुछ दिन पहले ही राज्य के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण एक इंटरव्यू में चुनाव जीतने पर कांग्रेस के ही नेता के मुख्यमंत्री बनने का दावा कर चुके हैं।
2019 वाला ही रंग दिखाने की तैयारी में उद्धव ठाकरे?
2019 का उदाहरण हमारे सामने है। तब राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक पद की इस लड़ाई के चलते गठबंधन की राजनीति में ऐतिहासिक उलटफेर हो गया था। उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ चुनाव जीतने के बावजूद हारी हुई कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी।
ऐसे में अगर एमवीए इस बार चुनाव जीत जाता है और सीएम पद पर सहमति में अड़चन आती है तो फिर उसका सियासी अंजाम क्या होगा, ये कहना मुश्किल है।
बीजेपी को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के मन में क्या है?
पांच साल पहले जिस उद्धव ठाकरे की वजह से निर्वाचित गठबंधन की सरकार नहीं बन पाई थी, उन्होंने हाल ही में भाजपा कार्यकर्ताओं से एक ऐसी अपील की है, जिससे पुराने सहयोगी को लेकर उनके मन में क्या चल रहा है, इसपर संदेह को हवा मिल गई है।
उद्धव ने छत्रपति संभाजीनगर के सिल्लोड की एक रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा, 'मैं यहां के बीजेपी कार्यकर्ताओं से एक खास अपील और आग्रह करना चाहता हूं.....सब ठीक है.....हमारे बीच कुछ मतभेद हैं....अगर आपकी तरफ से कोई मुझसे बात करने को तैयार है, मैं चर्चा के लिए तैयार हूं...यह इसलिए कि हमारी संस्कृति और परंपरा है।
भाजपा के लिए धड़का उद्धव का दिल!
दरअसल,सिल्लोड में सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने कांग्रेस से आए अब्दुल सत्तार को टिकट दिया है। यही बात उद्धव को रास नहीं आ रही है।
उन्होंने अब्दुल सत्तार पर निशाना साधते हुए कहा, 'अगर आम लोग साथ आ जाएं तो कोई भी व्यक्ति कितना भी बड़ा न हो, उसका हारना तय है। यही कारण है कि मैं तहे दिल से बीजेपी वर्करों से आग्रह करना चाहता हूं कि इस मौके को न गवाएं।'
उन्होंने आगे कहा,'क्या बीजेपी कार्यकर्ता सिल्लोड में गुंडागर्दी और आतंक का माहौल चाहते हैं? मैं ऐसा नहीं समझता...मुझे पक्का यकीन है कि सच्चे भाजपा कार्यकर्ता ऐसी गुंडागर्दी को मंजूर नहीं करेंगे और इसे खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।'
जब से उद्धव ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ा है, उस पार्टी के लिए पहली बार उनका इस तरह का हृदय परिवर्तन दिख रहा है। ऐसे में अगर महा विकास अघाड़ी को जीत मिलती है और सबसे बड़ी पार्टी बनने पर कांग्रेस सीएम की कुर्सी के लिए अड़ी रहती है तो क्या उद्धव फिर से पांच साल पहले की तरह फिर से पलटी मार सकते हैं? यह बड़ा सवाल है।












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