Ladki Bahin Yojana:महिलाओं को हर मिलने वाली धनराशि जल्द बढ़ेगी? PM Modi की आर्थिक सलाहकार समिति ने की सिफारिश
Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की महायुती सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और लोक-लुभावन 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' (Mukhyamantri Mazi Ladki Bahin Yojana) एक बार फिर पूरे देश में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। इस बार इस योजना की चर्चा केवल राजनीतिक गलियारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने भी इस पर एक बेहद महत्वपूर्ण और रिसर्च पेपर जारी किया है।
दरअसल, इस रिसर्च पेपर में शोध पत्र में सहायता राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से सही ठहराया गया है। जिसके बाद सवाल उठा रहा है कि क्या योजना के तहत महिलाओें को हर माह दी जाने वाली धनराशि जल्द बढ़ाए जाएगी? आइए जानते हैं?

आर्थिक सलाहकार परिषद ने Ladki Bahin Yojana की तारीफ
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने अपने हालिया अध्ययन में महाराष्ट्र की 'माझी लाडकी बहीण योजना' के साथ-साथ ओडिशा की 'सुभद्रा योजना' का गहराई से विश्लेषण किया है। इस शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि सीधे बैंक खातों में भेजी जाने वाली नकद राशि (Direct Benefit Transfer) महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन स्तर में किस तरह का बुनियादी बदलाव लाती है।
Ladki Bahin Yojana की महिलाओं का बढ़ा बैंक बैलेंस
इस रिपोर्ट के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद महाराष्ट्र की लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में औसत शेष राशि (बैंक बैलेंस) में रिकॉर्ड 84 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा स्पष्ट प्रमाण है कि इस सरकारी पहल ने गरीब और मध्यमवर्गीय महिलाओं के बीच बचत की भावना को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है।
स्टडी में आगे यह भी पाया गया है कि इन महिलाओं की मासिक खर्च क्षमता में भी औसतन 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों की शिक्षा और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए हो रहा है, जिससे समाज पर बेहद सकारात्मक असर पड़ा है।
क्या बढ़ेगी Ladki Bahin Yojana की धनराशि?
आर्थिक सलाहकार परिषद ने एक उपयोगी नीतिगत सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को इस प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की सहायता राशि की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए। यदि महंगाई बढ़ती है, तो लाभार्थियों की वास्तविक क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए इस नकद मदद को बढ़ाना आवश्यक है।
परिषद के इस सुझाव के बाद, योजना के तहत दी जाने वाली राशि को 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने की मांग मजबूत हुई है। महायुती सरकार ने पहले भी इस बढ़ोतरी का संकेत दिया था। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के आधार पर की गई यह वृद्धि राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की रफ्तार और तेज करेगी।
इसके अलावा, सलाहकार समिति ने महिलाओं को पूरी तरह स्वतंत्र बनाने के लिए वित्तीय सहायता को डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने का सुझाव दिया है। महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ सीधे जुड़ने पर लाभार्थी महिलाएं भविष्य में खुद का छोटा व्यवसाय शुरू कर अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
80 लाख महिलाएं क्यों हुईं अपात्र?
इस योजना के आर्थिक फायदों के साथ ही एक प्रशासनिक चुनौती भी खड़ी हो गई है। व्यापक छंटनी के तहत लगभग 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है। इतनी बड़ी तादाद में अपात्र सूची जारी होने के बाद उठे सभी सवालों पर अब प्रशासन ने स्पष्टीकरण देकर वास्तविक कारणों का खुलासा किया है।
अधिकारियों के अनुसार, इन आवेदनों के खारिज होने के तीन मुख्य कारण हैं। पहला, बैंक खातों की अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया का समय पर पूरा न होना। दूसरा, तय किए गए आय और पारिवारिक मानदंडों को पूरा न कर पाना। तीसरा, आवेदन पत्रों में की गई गंभीर तकनीकी गलतियां और फर्जी दस्तावेजों का जमा किया जाना।
इस संवेदनशील मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि "राज्य की किसी भी वास्तविक और पात्र लाडकी बहन को इस योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।" हालांकि, डेटाबेस और कानूनी पात्रता मानदंडों में फिट न बैठने वालों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा।












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