2023 से पहले की गाड़ियों में क्या डाला जा सकता है E20 पेट्रोल? केजरीवाल ने 29 कंपनियों को लिखा खत
E20 petrol: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के इस फैसले से देश के करोड़ों वाहन मालिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। केजरीवाल के अनुसार, पेट्रोल में तय सीमा से अधिक एथेनॉल मिलाने के कारण लोगों के वाहनों के इंजन समय से पहले खराब हो रहे हैं।
इस मुद्दे पर केजरीवाल ने देश की 29 दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों को पत्र लिखने की घोषणा की है। वे इन कंपनियों से एथेनॉल मिश्रण को लेकर उनकी तकनीकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि वाहन बनाने वाली कंपनियां खुद अपनी कारों और दोपहिया वाहनों की सुरक्षा पर क्या रुख रखती हैं।

पुराने वाहनों पर एथेनॉल ब्लेंडिंग का खतरा
केजरीवाल ने तकनीकी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के 'ओनर मैनुअल' में स्पष्ट लिखा है कि इनमें 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाकर बेच रही है, जिससे पुराने इंजनों को भारी क्षति पहुंच रही है।
आज मैंने देश के 29 auto manufacturers को पत्र लिखा है। पहला पत्र तीन कंपनियों को लिखा है -
Maruti Suzuki India
Toyota Kirloskar Motor
Hero MotoCorpदूसरा पत्र बाक़ी 26 कंपनियों को लिखा है। pic.twitter.com/4phfeLFqOZ
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 8, 2026
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च एथेनॉल ईंधन पुराने इंजनों के अनुकूल नहीं होता। एथेनॉल नमी सोखता है, जिससे ईंधन प्रणाली में जंग लगने और पाइप फटने का खतरा रहता है। केजरीवाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जबरन थोपी गई नीति मध्यम वर्ग के वाहन मालिकों की जेब पर भारी पड़ रही है क्योंकि उन्हें महंगे इंजन मरम्मत का खर्च उठाना होगा।
आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी रणनीति के तहत केजरीवाल खुद जमीन पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वह जल्द ही ऑटोमोबाइल शोरूम का दौरा करेंगे और वहां के प्रबंधकों व शोरूम मालिकों से सीधे बातचीत कर ग्राहकों को दी जाने वाली तकनीकी सलाह का सच जानेंगे।
मैकेनिकों और जनता के बीच जाने का फैसला
शोरूम मालिकों के अलावा, केजरीवाल स्थानीय ऑटो मैकेनिकों से भी राय लेंगे। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले मैकेनिकों के पास इसका सीधा अनुभव होता है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहनों के इंजन में खराबी के कितने मामले आ रहे हैं। इस चर्चा से ईंधन नीति के व्यावहारिक प्रभावों का एक वास्तविक डेटा सामने आ सकेगा।
इस जनसंपर्क अभियान के जरिए केजरीवाल आम उपभोक्ताओं के बीच जाकर उनकी राय भी इकट्ठा करेंगे। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर आम लोगों के दैनिक बजट और वाहनों के जीवनकाल से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को बिना किसी पूर्व तैयारी के इस तरह के बदलावों को जनता पर नहीं थोपना चाहिए।
भारत की एथेनॉल नीति
भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम शुरू किया है। इसका लक्ष्य साल 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) का मिश्रण हासिल करना है। सरकार के अनुसार, इस कदम से घरेलू स्तर पर जैविक ईंधन का उत्पादन बढ़ेगा और पर्यावरण को भी लाभ होगा।
इस नीति के तहत, अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी नई गाड़ियां अनिवार्य रूप से E20 ईंधन के अनुकूल बनाई गई हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन लाखों पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा को लेकर है जो अप्रैल 2023 से पहले सड़कों पर उतारी गई थीं और जिनमें 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाला पेट्रोल हानिकारक साबित हो सकता है।












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