Kunal Kamra Controversy: शिवसेना इस बार इतनी आक्रामक क्यों है, एकनाथ शिंदे की कहीं ये रणनीति तो नहीं?
Kunal Kamra Controversy: महाराष्ट्र का एक वीडियो वायरल है,जिसमें एमएनएस (MNS) कार्यकर्ता एक मेगा स्टोर के मैनेजर को थप्पड़ मार रहा है और माफी मांगने के लिए मजबूर कर रहा है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस घटना को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के दिनों की पुरानी शिवसेना के अंदाज की याद दिलाने वाली राजनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राज ठाकरे की पार्टी के लोगों की ये हरकत ऐसे समय में सामने आई है, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के कार्यकर्ता स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ की गई हिंसक प्रतिक्रिया की वजह से सुर्खियों में हैं।

Kunal Kamra Controversy: कुणाल कामरा विवाद और शिवसेना की प्रतिक्रिया
शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के खार स्थित हैबिटैट स्टूडियो में तोड़फोड़ की, जहां कामरा ने अपना विवादास्पद शो रिकॉर्ड किया था। इस वारदात के पीछे कामरा का वह बयान था, जिसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे के लिए 'गद्दार' जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था।
गौरतलब है कि यह शब्द 2022 में शिंदे द्वारा उद्धव ठाकरे की शिवसेना को विभाजित कर एनडीए में जाने के बाद से लगातार उनके विरोधियों की ओर से इस्तेमाल किया जाता रहा है। उद्धव ठाकरे की पार्टी और उनके सहयोगी सार्वजनिक मंचों से भी शिंदे पर यह लांछन लगाने से परहेज नहीं करते। लेकिन, अपमान का घूंट पीकर भी कभी शिंदे की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
Kunal Kamra Controversy in Hindi: शिवसेना की पुरानी शैली की वापसी?
शिवसेना का इतिहास आक्रामक राजनीति से जुड़ा रहा है, बल्कि शुरू में इसी से इसकी पहचान स्थापित हुई थी। बाल ठाकरे के नेतृत्व में, पार्टी ने कई बार विरोध प्रदर्शन और हिंसक कार्रवाइयों का सहारा लिया। 1991 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम की पिच खोदकर भारत-पाकिस्तान मैच को रद्द करवाने से लेकर 1999 में फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में ऐसी ही घटना तक, शिवसेना की रणनीति हमेशा ही उग्र रही है।
2000 में वेलेंटाइन डे के विरोध में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निजी समारोहों पर हमला किया था। जबसे कमान उद्धव के हाथों में आई तो कहा गया कि अब पार्टी का चाल, चेहरा और चरित्र सब बदलने लगा है। लेकिन,फिर भी जब बात खुद के या परिवार पर आई या अन्य मौकों पर भी तब शालीनता का चेहरा उतारकर इस पार्टी ने अपने बदले-बदले तेवर दिखा दिए। इसी कड़ी में इसने 2015 में पाकिस्तानी गायक गुलाम अली का शो भी इसी तरह रद्द करवा दिया गया था।
Kunal Kamra Controversy Eknath shinde: एकनाथ शिंदे की कहीं ये रणनीति तो नहीं?
इसी वजह से विश्लेषकों को लगता है कि कुणाल कामरा विवाद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना की आक्रामकता एक रणनीतिक कदम हो सकता है-
1.बीएमसी चुनावों की तैयारी: शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी के बीच बीएमसी (BMC) चुनावों की लड़ाई की तैयारी तेज हो रही है। शिंदे चाहते हैं कि वह इस लड़ाई को बीजेपी बनाम शिवसेना (यूबीटी) के बजाय शिवसेना बनाम उद्धव ठाकरे के रूप में पेश करें।
2.बदली परिस्थितियों में अपनी मजबूत स्थिति फिर से स्थापित करने की कोशिश: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस को अहमियत देने के बाद शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा है। इस झटके से उबरने के लिए वह खुद को प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से स्थापित करना चाहते हैं।
3.बाल ठाकरे की सियासी विरासत: शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की शैली में राजनीति करने से शिंदे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि शिवसेना संस्थापक के राजनीतिक वारिस वही हैं, और वही उनकी विचारधारा और स्टाइल में राजनीति करना जानते हैं। जबकि, उद्धव विचारधारा से भी भटक चुके हैं और उनके सियासी स्टाइल में भी दम नहीं रह गई है।
Kunal Kamra Controversy Eknath shinde: भाजपा और शिवसेना में वैचारिक तालमेल?
इस पूरे प्रकरण में भाजपा की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 'स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को भी झूठ और बदनामी फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।' यह बयान शिंदे की सेना की कार्यवाही को अप्रत्यक्ष समर्थन प्रदान करता है।
इस तरह से यह लगता है कि शिवसेना की कुणाल कामरा के खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया केवल एक कॉमेडियन की टिप्पणी का प्रतिकार नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पकड़ और मजबूत करने की एक रणनीति भी हो सकती है।
बीएमसी चुनावों (BMC Elections) के मद्देनजर, शिंदे अपने आक्रामक तेवरों के माध्यम से कहीं न कहीं बीजेपी और उद्धव ठाकरे दोनों को ही चुनौती दे रहे हैं।












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