Crude Oil Price Hike: फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? अमेरिका की एक हरकत से बढ़े कच्चे तेल के दाम, अब क्या किया?

Crude Oil Price Hike: 11 जून 2026 को अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला बोल दिया है। इसके जवाब में ईरान भी हमले कर रहा है लेकिन जो असर देखने को मिल रहा है वह है दुनिया के तेल बाजार पर। ग्लोबल ऑयल मार्केट में अमेरिका की कार्रवाई के बाद तेल के दामों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। इसी बीच ईरान ने दावा किया कि उसने दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है।

इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.6 प्रतिशत बढ़कर 94.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 1.9 प्रतिशत बढ़कर 91.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

Crude Oil Price Hike

इस इलाके से गुजरे जहाज तो करेंगे हमला- ईरान

तेहरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। इसमें तेल टैंकरों से लेकर कमर्शियल शिप तक शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। यह दावा इसलिए भी टेंशन देने वाला है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल आता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी हमलों में क्या-क्या निशाना बनाया गया?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, हालिया सैन्य अभियान के दौरान ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें मिलिट्री सर्विलांस सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे। यह हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस चेतावनी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान अमेरिकी मीडिएटर्स द्वारा प्रस्तावित शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका उसके खिलाफ और कड़े कदम उठाएगा।

तेल बाजार में दिखा तत्काल असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो तेल उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से कई प्रमुख ऊर्जा बेंचमार्क में तेजी दर्ज की गई। खासतौर पर मर्बन क्रूड, गैसोलीन और हीटिंग ऑयल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।

प्रमुख फ्यूचर्स और ऊर्जा इंडेक्स

Crude Oil Price Hike

अमेरिका ने ईरान के दावे को किया खारिज

हालांकि ईरान के दावों के कुछ ही समय बाद अमेरिका ने इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। CENTCOM ने बयान जारी करते हुए कहा कि कमर्शियल शिप अभी भी इस समुद्री रास्ते से गुजर रहे हैं और शिपिंग एक्टिविटीज जारी हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि बढ़ते तनाव के बावजूद समुद्री व्यापार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

फिर क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें?

ऊर्जा बाजारों में सबसे बड़ी चिंता संभावित सप्लाई बाधित होने की है। इन्वेस्टर्स को डर है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में वाकई में मुसीबत में पड़ जाता है, तो दुनिया के कई देशों तक तेल की सप्लाई कम या ठप हो सकती है। इसी डर के चलते मर्बन क्रूड लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 89.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। गैसोलीन और हीटिंग ऑयल फ्यूचर्स में भी मजबूती दर्ज की गई।

आगे क्या हो सकता है?

एक्सपर्ट्स की मानें तो यदि होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बंद होने की पुष्टि होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और बड़ा उछाल आ सकता है। इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ेगा और कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में उछाल आ सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह संकट केवल तेल बाजार तक सीमित रहता है या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े झटके में बदल जाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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