Shukra Pradosh Vrat 2026: कब है शुक्र प्रद्रोष व्रत, क्या है पूजा विधि और मुहूर्त?
Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत ही मानक उपवास माना जाता है। जून महीने का पहला प्रदोष व्रत अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी कि 12 जून को है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहा जाएगा। काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक इस विशेष दिन पर भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तों को 1 घंटा 44 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, इस वजह से इस दिन का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त 11:53 AM से 12:49 PM
- निशिता मुहूर्त 12:01 AM (13 जून) से 12:41 AM (13 जून) तक
- प्रदोष पूजा मुहूर्त 07:36 PM से 09:40 PM
यह व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन की खुशहाली, धन-वैभव और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की पूजा विधि
शुक्र प्रदोष व्रत में प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। कुछ लोग इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करते हैं या निर्जला उपवास रखते हैं। प्रदोष काल अर्थात सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद का समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और नंदी महाराज की विधिवत पूजा की जाती है। शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं। पूजा के समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप और शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। अंत में भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग और नक्षत्र
इस शुक्र प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सुबह 05:23 बजे से 06:28 बजे तक रहेगा। इस दिन अतिगण्ड योग प्रातःकाल से रात 09:26 बजे तक प्रभावी रहेगा।
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी से माना जाता है, जबकि प्रदोष काल भगवान शिव को समर्पित होता है। इसलिए इस दिन किया गया व्रत शिव और लक्ष्मी दोनों की कृपा दिलाने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से शुक्र प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में आर्थिक समस्याएं कम होती हैं, दांपत्य जीवन सुखमय बनता है और परिवार में शांति बनी रहती है। अविवाहित युवकों और युवतियों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति तथा विवाहित लोगों को वैवाहिक सुख का आशीर्वाद मिलता है।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा सामग्री
- गंगाजल
- शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत)
- बेलपत्र
- धतूरा और भांग (यदि उपलब्ध हो)
- सफेद पुष्प
- चंदन
- अक्षत (चावल)
- धूप और दीप
- रुई और घी का दीपक
- नैवेद्य या फल
- कपूर
- प्रसाद के लिए मिठाई
शुक्र प्रदोष व्रत से जुड़े कुछ खास सवाल
- शुक्र प्रदोष व्रत किस देवता को समर्पित है?
- यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।
- शुक्र प्रदोष व्रत करने से क्या लाभ मिलता है?
- इस व्रत से धन, सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख, संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- शुक्र प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?
- व्रती फलाहार, दूध, फल और सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। कई भक्त निर्जला या निराहार व्रत भी रखते हैं।
- प्रदोष काल कब माना जाता है?
- सूर्यास्त से लगभग 1.5 घंटे पहले और 1.5 घंटे बाद तक का समय प्रदोष काल कहलाता है।
- क्या महिलाएं शुक्र प्रदोष व्रत कर सकती हैं?
- हां, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धा के साथ यह व्रत कर सकते हैं।
- शुक्र प्रदोष व्रत में कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?
- "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है।
- क्या अविवाहित लोग भी यह व्रत कर सकते हैं?
- हां, अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत कर सकते हैं।
- क्या प्रदोष व्रत में शिवलिंग का अभिषेक आवश्यक है?
- हां, शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।














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