Ketan Agrawal Case: कौन हैं संदीप सिंह? प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर IPS बने गिल ने खोला सिया का काला चिठ्ठा

Ketan Agrawal Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोरकर रख दिया है, लोगों के मन में ये सवाल बार-बार आ रहा है कि 20 साल की मासूम सी दिखने वाली सिया ने अपने 26 साल के मंगेतर को प्रेमी के साथ मिलकर क्यों मारा, अगर उसे शादी नहीं करनी थी तो ना करती लेकिन केतन को मारने की क्या जरूरत थी? इस केस ने एक बार फिर से रिश्तों, मोहब्बत और भरोसे पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

जहां न्य़ूज रूम से लेकर सोशल मीडिया तक लोग सिया गोयल और चेतन चौधरी के कथित प्रेम प्रसंग के बारे में बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप सिंह गिल लोगों के बीच आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं।

Ketan Agrawal Case

संदीप सिंह गिल, जिस तरह से इस हादसे बताने वाली घटना के पीछे का घृणित सच लोगों के सामने लेकर आए हैं उसके कारण लोग उन्हें सोशल मीडिया पर 'रीयल हीरो', 'असली सिंघम' कहकर संबोधित कर रहे हैं। एक हाईप्रोफाइल पुलिस केस की तफ्तीश और मीडिया के हर सवाल का शांति से जवाब देने के कारण वो इस वक्त इंटरनेट पर छाए हुए हैं। आइए एक नजर डालते हैं इस जांबाज अफसर के अब तक के सफरनामे पर जो कि वाकई में काफी इंप्रेसिव है।

72 घंटे में सिया की सच्चाई बताने वाले IPS संदीप सिंह गिल कौन?

संदीप सिंह गिल पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं, उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से इंग्लिश से एमए किया, इसके बाद वो चंडीगढ़ के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थे, जहां वे विद्यार्थियों को पढ़ाते थे लेकिन समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करने की इच्छा ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। नौकरी के साथ तैयारी करना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने लगातार मेहनत की और आखिरकार यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल करके सफलता का नया इतिहास लिखा।

2016 बैच के अधिकारी हैं संदीप सिंह गिल

संदीप सिंह गिल महाराष्ट्र कैडर के 2016 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो UPSC सिविल सेवा परीक्षा के ज़रिए सीधे भर्ती (RR) हुए थे।। उनकी ऑल इंडिया 143वीं रैंक थी। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक बनने से पहले वो पुणे शहर में डीसीपी जोन-1 के पद पर भी काम कर चुके है, इस दौरान उनकी कानून व्यवस्था की काफी तारीफ हुई थी और इसी कारण उन्हें पिछले साल पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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संदीप सिंह गिल ने खोली सिया-चेतन की पोल

पुणे के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक लोहागढ़ किले पर 18 जून 2026 को केतन अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पहली नजर में यह मामला दुखद हादसा लग रहा था लेकिन मृतक के परिजनों ने इस घटना पर गहरा संदेह व्यक्त किया। पारिवारिक शिकायत और अंदेशे को गंभीरता से लेते हुए एसपी संदीप सिंह गिल ने बिना समय गंवाए मामले की गहन जांच के निर्देश दिए। उन्होंने जांच के लिए तुरंत विशेष टीमों का गठन किया, जिन्हें तकनीकी और स्थानीय स्तर पर सुराग तलाशने का कड़ा जिम्मा सौंपा गया। जांच दलों ने सबसे पहले उस दिन किले के आसपास मौजूद चश्मदीदों और स्थानीय दुकानदारों से पूछताछ करना शुरू किया।

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सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से पकड़ा गया सिया का झूठ

इसके साथ ही पुणे ग्रामीण पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों को टटोलना शुरू किया। इसके तहत घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली गई। पुलिस को असली संदेह तब हुआ जब केतन की मंगेतर सिया गोयल और आरोपी चेतन चौधरी की कॉल डिटेल्स और दोनों के घटनास्थल के आसपास होने की भौगोलिक लोकेशन मेल खाने लगीं।

केतन का मर्डर सिया-चेतन ने मिलतकर किया: संदीप सिंह गिल

तकनीकी साक्ष्यों की इन कड़ियों को एक साथ जोड़ने पर सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच गहरी बातचीत और घटना के समय दोनों की संदिग्ध मौजूदगी स्पष्ट हो गई। पुलिस के सबूतों के सामने आने पर आरोपियों का झूठ अधिक देर तक नहीं टिक सका। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि यह कोई आकस्मिक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूर्व नियोजित हत्या थी, जिसे कि सिया ने अपने सो कॉल प्रेमी चेतन चौधरी संग मिलकर अंजाम दिया। मात्र 72 घंटों के अंदर केतन केस की काली तस्वीर दुनिया के सामने आ गई।

मीडिया से संदीप सिंह गिल ने क्या कहा?

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक (SP) संदीप गिल ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'केतन अग्रवाल मर्डर केस की जांच से पता चला है कि यह हत्या पहले से सोची-समझी साज़िश थी, जिसे कथित तौर पर लोनावला के लोहागढ़ किले में रचा गया था। आरोपी जोड़े ने सबसे पहले 31 मई को लोहागढ़ किले का दौरा किया था। उस समय उन्होंने केतन अग्रवाल को ट्रेकिंग का शौक होने का फायदा उठाकर पहाड़ की चोटी से नीचे धकेलने की योजना बनाई थी।'

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18 जून को केतन अग्रवाल को पहाड़ी से धक्का दिया गया

कथित तौर पर 4 जून को दूसरी कोशिश की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। पुलिस ने बताया कि 14 जून को एक और कोशिश की गई, जो भी नाकाम रही और पीड़ित को कोई शक भी नहीं हुआ। 14 जून की कोशिश नाकाम होने के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर तय किया कि चेतन खुद इस योजना को अंजाम देगा। 18 जून को केतन अग्रवाल को तय जगह से कथित तौर पर नीचे धकेल दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। '

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