KDMC में सियासी भूचाल, उद्धव गुट के 4 नगरसेवक 'लापता', क्या कल्याण-डोंबिवली में भी चलेगा शिंदे का 'गेम'?
KDMC Political Chaos: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) की सत्ता पर काबिज होने की जंग ने अब एक नाटकीय मोड़ ले लिया है। शिवसेना (UBT) के चार नगरसेवकों के अचानक लापता होने और उनके संपर्क से बाहर जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मच गया है। उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना उनके पार्षदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
122 सीटों वाली इस महानगरपालिका में बहुमत का आंकड़ा 62 है, जिसे छूने के लिए शिंदे गुट अब बेहद करीब पहुंच गया है। संजय राउत के तीखे बयानों और पुलिस स्टेशन तक पहुंची इस लड़ाई ने महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे आने वाले कुछ घंटे KDMC की सत्ता के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।

KDMC का अंकगणित, बहुमत के दरवाजे पर शिंदे-भाजपा गठबंधन
122 सदस्यों वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में सत्ता का समीकरण अब पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।
- शिंदे गुट (शिवसेना): 53 नगरसेवक
- भाजपा: 50 नगरसेवक
- मनसे (MNS): 5 नगरसेवक (समर्थन की घोषणा)
- बहुमत का आंकड़ा: 62
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शिंदे गुट और भाजपा का गठबंधन पहले ही बहुमत पार कर चुका है, लेकिन शिवसेना (UBT) के 4 नगरसेवकों के शामिल होने से यह स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी। फिलहाल उद्धव गुट के पास कुल 11 नगरसेवक हैं, जिनमें से 4 पर दल-बदल का खतरा मंडरा रहा है।
लापता नगरसेवक और पुलिस में शिकायत
शिवसेना (UBT) के स्थानीय नेता शरद पाटिल ने कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। जिन नगरसेवकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनके नाम हैं:
- मधुर म्हात्रे
- कीर्ति धोणे
- राहुल कोट
- स्वप्निल केणे
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ नगरसेवक मूल रूप से मनसे से जुड़े थे, लेकिन चुनाव शिवसेना (UBT) के टिकट पर लड़े थे। पुलिस का कहना है कि यह राजनैतिक मामला है और नगरसेवक स्वेच्छा से कहीं गए हो सकते हैं, इसलिए फिलहाल मिसिंग केस दर्ज नहीं किया गया है।
संजय राउत का तीखा हमला, 'जनता के साथ धोखा'
सांसद संजय राउत ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो लोग जीत के 24 घंटे के भीतर पाला बदल रहे हैं, वे मतदाताओं के साथ गद्दारी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नगरसेवक वापस नहीं आए, तो पार्टी KDMC परिसर में उनके खिलाफ पोस्टर लगाकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
मनसे की भूमिका और अंदरूनी खींचतान
राज ठाकरे की मनसे द्वारा शिंदे गुट को समर्थन देने से उद्धव गुट और भी नाराज है। हालांकि, मनसे सूत्रों का कहना है कि यदि वे समर्थन नहीं देते, तो उनके खुद के नगरसेवक टूटकर सत्ताधारी खेमे में जा सकते थे। यह स्थानीय समीकरणों को बचाने की एक मजबूरी बताई जा रही है।
मीरा-भायंदर में अलग है सियासी तस्वीर
जहां कल्याण-डोंबिवली में सत्ता की खींचतान जारी है, वहीं मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) में स्थिति स्पष्ट है। 95 सीटों वाली इस नगर पालिका में भाजपा ने 78 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। यहां शिवसेना (3 सीटें) और कांग्रेस (13 सीटें) ने मिलकर विपक्ष में बैठने का फैसला किया है।
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