क्या एक और टूट की ओर बढ़ रही है उद्धव की शिवसेना ?
मुंबई, 11 जुलाई: शिवसेना के विधायक दल में दो फाड़ पहले ही हो चुका है और इसी की वजह से उद्धव ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन, अब अटकलें लग रही हैं कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कुछ सांसद भी उनके खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर सकते हैं और लोकसभा स्पीकर से अलग गुट के रूप में मान्यता देने की गुजारिश कर सकते हैं। दरअसल, उद्धव ठाकरे ने आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए चर्चा को लेकर पार्टी सांसदों की एक बुलाई थी, लेकिन उसमें कुछ सांसदों का नहीं पहुंचना काफी कुछ संकेत दे रहा है।

क्या एक और टूट की ओर बढ़ रही है उद्धव की शिवसेना ?
राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी की लाइन तय करने के लिए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने मुंबई स्थित आवास मातोश्री में पार्टी सांसदों की एक बैठक बुलाई। 12 बजे के लिए तय की गई इस बैठक में काफी देर बाद भी लोकसभा के 19 सांसदों में से सिर्फ 12 सांसदों के पहुंचने की ही सूचना थी। पिछले कुछ दिनों से शिवसेना के सांसदों के बीच से जो जानकारी मिल रही है, उससे सांसदों की गैरमौजूदगी को विधायकों की तरह एक और बगावत का संकेत माना जा रहा है। खास बात ये है कि पार्टी के कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की भी वकालत की है और कुछ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे से सुलह करने का भी सुझाव दे चुके हैं।

उद्धव ठाकरे की बैठक में शामिल होने वाले सांसद
हालांकि बाद में पार्टी सांसद गजानन कीर्तिकर ने दावा किया कि सिर्फ दो सांसदों को छोड़कर सारे पहुंचे थे। शुरू में राजेंद्र गावित, गजानन कीर्तिकर, धैर्यशील माने, अरविंद सावंत, हेमंत गोडसे, राजन विचारे, विनायक राउत, ओमराजे निंबालकर और राहुल शेवाले समेत कुछ और सांसदों के ही पहुंचने की सूचना थी।। इससे पहले शिवसेना नेता ठाकरे ने पार्टी के उन 15 विधायकों को बगावत नहीं करने के लिए धन्यावाद वाला खत भेजा था जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया और दूसरे गुट की कथित धमकियों के बावजूद मातोश्री का साथ खड़े रहे।

लोकसभा स्पीकर से मांगेंगे अलग गुट की मान्यता ?
इससे पहले अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने एक खबर दी थी कि शिवसेना के 14 लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से उन्हें अलग ग्रुप के रूप में मान्यता देने को कह सकते हैं। भाजपा-एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना गठबंधन के सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि शिवसेना के ये सांसद 13 या 14 जुलाई को बगवात का कदम आगे बढ़ा सकते हैं। इसके पीछे कारण के तौर पर यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी के ये सांसद एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में 18 जुलाई को होने वाले चुनाव में वोट डालना चाहते हैं। पार्टी सांसद राहुल शेवाले ने इस संबंध में उद्धव को खत भी लिखा था।

एकनाथ शिंदे के विद्रोह से मात खा चुके उद्धव
गौरतलब है कि इससे पहले सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई में शिवसेना के 40 विधायकों ने उद्धव के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जिसकी वजह से महा विकास अघाड़ी की सरकार गिर गई थी और शिंदे गुट और भाजपा की गठबंधन वाली सरकार सत्ता में आई है। शिंदे गुट को करीब 10 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है। फिलहाल जिन सांसदों के बगावत करने को लेकर अटकलें लग रही हैं उनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे और भावना गवली जैसे नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं। कीर्तिकर के मुताबिक यही दोनों आज की बैठक में नहीं आए थे।

उद्धव को लगातार झटका दे रहे हैं शिंदे
बता दें कि शिवसेना में ठाकरे परिवार के खिलाफ नेताओं की बगावत कोई पहली बार नहीं देखने को मिल रही है। शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के जमाने में भी ऐसा हो चुका है और जिन नेताओं ने ऐसा किया है, उनमें छगन भुजवल, नारायण राणे और राज ठाकरे जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन, एकनाथ शिंदे ने जिस तरह से लगभग पूरी पार्टी ही साफ कर दी है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। एमएलए को तोड़ने के बाद शिंदे के चलते उद्धव ठाकरे को सबसे पहले ठाणे नगर निगम में तगड़ा झटका लगा है, जहां शिवसेना के 67 में से 66 पार्षदों ने शिंदे गुट का हाथ थाम लिया और निगम पर से उद्धव गुट का नियंत्रण खत्म हो गया। एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव गुट को नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका में भी ऐसे ही झटके दिए हैं।












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