Maharashtra: उद्धव ठाकरे को एक और झटका, पूर्व मंत्री दीपक सावंत सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल
महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉक्टर दीपक सावंत उनकी पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बुधवार को एक और झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉक्टर दीपक सावंत पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। डॉक्टर सावंत पहले महाराष्ट्र में पब्लिक हेल्थ और फैमिली वेलफेयर विभाग के मंत्री रह चुके हैं। सीएम एकनाथ शिंदे ने उनके शिवसेना में शामिल होने का स्वागत किया है और कहा है कि उनके अनुभव से पार्टी को फायदा मिलेगा।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को एक और झटका
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री डॉक्टर दीपक सावंत उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर बुधवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उनके पार्टी में शामिल होने के बाद सीएम शिंदे ने कहा है, 'मैं डॉक्टर दीपक सावंतत का हमारी शिवसेना पार्टी में शामिल होने का स्वागत करता हूं। हमें उनके अनुभवों का लाभ मिलेगा।' देश में कई छोटे राज्यों से ज्यादा बजट वाली बीएमसी के चुनावों से पहले ठाकरे कैंप के लिए इसे राजनीतिक तौर पर बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं दीपक सावंत
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दीपक सावंत पहले शिवसेना से एमएलसी थे और 2014 से 2018 तक तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 2018 में उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया और उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव में उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था।
सुभाष देसाई के बेटे भी छोड़ चुके हैं साथ
दो दिन पहले ही उद्धव के एक और बेहद करीबी नेता सुभाष देसाई के बेटे भूषण देसाई ने यह कहकर उनका साथ छोड़ दिया था कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों को तो मुख्यमंत्री शिंदे आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए उन्होंने उद्धव का साथ छोडने का फैसला किया है। हालांकि, अपने बेटे के फैसले से सुभाष देसाई ने असहमति जताई थी।
महाराष्ट्र में क्या से क्या हो गया ?
दरअसल, नवंबर, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को जीत मिली थी। लेकिन, तब उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री बनने का फैसला किया था। करीब ढाई साल बाद यानि जून 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में करीब 40 विधायकों ने उनके खिलाफ बगावत कर दी। फिर शिवसेना टूटी और भाजपा के समर्थन से शिंदे सीएम बन गए। हाल ही में चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी है और तीन और धनुष के निशान पर भी उन्हीं की पार्टी का अधिकार बताया है।












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