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CM Devendra Fadnavis: मंत्रालय के बंटवारे के बाद सीएम फडणवीस ने मंत्रियों से छीना ये बड़ा अधिकार, मचा हडकंप

CM Devendra Fadnavis news: मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस ने महाराष्‍ट्र में मंत्रीमंडल के बंटवारे के बाद बड़ा फैसला लेकर अचंभित कर दिया है। मुख्‍यमंत्री फडणवीस के इस निर्देश के बाद महाराष्ट्र में राजनीकि महौल तहलका मच गया है क्‍योंकि इससे महायुति गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व मेंएनसीपी के मंत्री प्रभावित हुए हैं।

दरअसल, सीएम फडणवीस ने राज्‍य के अंतर्गत आने वाले सभी मंत्रालय के कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इसके साथ ही निर्देश दिया है कि सभी नए कर्मचारियों, निजी सचिवों (पीएस) से लेकर विशेष कार्य अधिकारियों (ओएसडी) तक सभी की नियुक्तियों के लिए उनसे मंजूरी लेनी होगी। उनकी अनुमति के बिना कोई भी नियुक्ति नहीं की जाएगी।

CM Devendra Fadnavis

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों से छीना अधिकार

बता दें विधानसभा सत्र के समापन और कैबिनेट विभागों के आवंटन के बाद ये निर्देश जारी किया गया है। पहले के मानदंड के अनुसार मंत्रियों को अपने कर्मचारियों को नियुक्त करने की स्वायत्तता थी लेकिन अब मंत्रियों से सीएम फडणवीस ने ने अधिकार छीन लिया है।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपने आदेश में जानें क्‍या कहा?

नए निर्देश के अनुसार अब मंत्रियों को अपने मंत्रालय संबंधी विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इस नए प्रोटोकॉल का पालन करने संबंधी आधिकारिक अधिसूचनाएं विभागों को भेजी जा चुकी हैं।

सीएम देवेंद्र फडणवीस कार्यालय ने क्‍यों लिया ये निर्णय?

इस सख्त उपाय के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि गृह मंत्री के रूप में फडणवीस की समवर्ती भूमिका है, जिसमें कैबिनेट कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मामलों की देखरेख करना शामिल है। मुख्यमंत्री कार्यालय प्रस्तावित कर्मचारियों की हर तरह से जांच करना चाहती है। ताकि कर्मचारी के अनुमोदन से पहले सुरक्षा और परिचालन मानदंडों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जा सके।

सीएम देंवेंद्र फडणवीस के पहले के कार्यकाल में क्‍या था ये नियम?

गौरतलब है कि ये पहला मौका नहीं है जब देवेंद्र फडणवीस ने 2014 और 2022 में अपने कार्यकाल के दौरान इसी तरह के प्रोटोकॉल लागू किए थे। सीएमओ की भागीदारी का उद्देश्य कैबिनेट के आंतरिक मामलों पर कड़ी लगाम बनाए रखना है, जिससे सरकार की सुरक्षा प्सुनिश्चित हो सके।

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