'BJP-अमित शाह मुर्दाबाद' के नारे लगाने पर तड़ीपार क्यों? Bombay High Court के फैसले पर क्यों हो रही चर्चा
Bombay High Court BJP Slogan Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागरिकों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार पर एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि सरकार की नीतियों का विरोध करना या उनके खिलाफ नारेबाजी करना किसी भी नागरिक को शहर से तड़ीपार करने का आधार नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार की सिंगल बेंच ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महाराष्ट्र महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी को एक साल के लिए मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों से तड़ीपार करने के पुलिसिया आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया।

कोर्ट ने इस दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली और देश की मौजूदा राजनीति पर बेहद तीखी और कटाक्ष भरी टिप्पणियां कीं, जो सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बन गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
SDPI के महाराष्ट्र महासचिव और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार सईद अहमद चौधरी को मुंबई पुलिस ने दिसंबर 2025 में एक आदेश जारी कर मुंबई और आसपास के इलाकों से 12 महीने के लिए बाहर रहने का निर्देश दिया था। पुलिस का कहना था कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे सरकार विरोधी प्रदर्शन तथा नारेबाजी में शामिल रहे हैं। इसके बाद चौधरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी।
Bombay High Court बोला-'जनता को केंद्र सरकार का गुलाम नहीं बना सकते'
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस से पूछा कि आखिर 'BJP सरकार मुर्दाबाद' और 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करने का आधार कैसे बन सकते हैं? कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है और केवल नारे लगाने के आधार पर इतनी सख्त कार्रवाई उचित नहीं लगती।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जामदार ने कहा कि नागरिकों को केंद्र सरकार का गुलाम नहीं बनाया जा सकता। पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, बल्कि वह जनता की सेवक है। कोर्ट की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रही।
Bombay HC ने पूछा-पार्टी बदल लें तो केस खत्म हो जाएंगे?
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक माहौल पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि क्या यह मामले इसलिए दर्ज किए गए क्योंकि संबंधित व्यक्ति किसी दूसरी पार्टी से जुड़ा है? जस्टिस जामदार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वह भी राजनीतिक दल बदल लें तो शायद उनके खिलाफ दर्ज मामले सरकार की वॉशिंग मशीन से साफ हो जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि देश में दल बदल की घटनाएं सामने आती रही हैं।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी नीति के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करता है, तो क्या उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी? सुनवाई के दौरान अदालत ने NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर हुए विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी ऐसे ही तड़ीपार के आदेश जारी किए जाएंगे?
कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अधिकारों का किया जिक्र
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 हर नागरिक को समानता, गरिमा के साथ जीवन जीने और अपनी बात रखने का अधिकार देते हैं। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के इन अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है और यह संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने सईद अहमद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश को रद्द कर दिया।
किन मामलों के आधार पर हुई थी कार्रवाई?
याचिका के अनुसार, सईद अहमद चौधरी 2019 से केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ आयोजित कई प्रदर्शन, धरना और मार्च में शामिल रहे थे। इनमें प्रमुख रूप से-
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में आंदोलन
- वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन
जैसे कार्यक्रम शामिल थे। इन्हीं प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मामलों का हवाला देते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की थी।
क्यों अहम है यह फैसला?
कानूनी तौर पर यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अदालत ने यह नहीं कहा कि किसी भी परिस्थिति में कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस मामले में उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल सरकार विरोधी नारे या विरोध प्रदर्शनों को इस तरह की कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पुलिस की शक्तियों और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।














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