Baby Do Die Do Review: भारत की पहली 'देसी हिटवुमन' की कहानी, हुमा कुरैशी का दिखा सुपारी किलर अवतार
फिल्म: बेबी डू डाई डू (Baby Do Die Do)
स्टारकास्ट: हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा
डायरेक्टर: नचिकेत सामंत
रन टाइम: 2 घंटे 05 मिनट
स्टार: 3 (***)
Baby Do Die Do Review: बॉलीवुड में पिछले कुछ वर्षों में महिला-केंद्रित फिल्मों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी कड़ी में निर्देशक नचिकेत सामंत की फिल्म 'बेबी डू डाई डू' एक बिल्कुल ही अलग किस्म का और दिलचस्प कॉन्सेप्ट लेकर आती है। ये फिल्म एक ऐसी महिला सुपारी किलर की कहानी है, जो बोल और सुन नहीं सकती लेकिन अपने साहस, सूझबूझ और एक्शन से हर मुश्किल का सामना करती है।

ये सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं बल्कि डार्क कॉमेडी, मिस्ट्री और हाई-ऑक्टेन एक्शन का ऐसा मिश्रण है, जो दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखने की कोशिश करता है। इस रिव्यू में आइए जानते हैं कैसी है ये फिल्म ?
क्या है फिल्म 'बेबी डू डाई डू' की कहानी?
-कहानी शुरू होती है दो जुड़वा लड़कियों से जिनमें से एक का नाम बेबी है, जो बचपन से ही गूंगी और बहरी है। दोनों लड़कियां अपने घर के नजदीक एक खाली पड़े 5 स्टार होटल में घूमने जाती हैं। वहां पर दोनों एक मर्डर होते हुए देख लेती हैं। इसके बाद हत्यारे ने बेबी की बहन को गला घोंट के मार दिया। तभी से बेबी बदले की आग में जलने लगती है फिर वह पीएम जैन से संपर्क में आती है जो उसको सुपारी किलिंग की काली दुनिया में धकेल देता है।
-बेबी अपने काम में माहिर है और बहुत ही सफाई से मर्डर करती है, खास बात ये है कि मर्डर के लिए वह छाते का इस्तेमाल करती है जो देखने में दिलचस्प लगता है। दूसरी खासियत ये है कि बेबी बोल और सुन नहीं सकती लेकिन उसकी खामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। बेबी एक के बाद एक मर्डर की सुपारी लेती जाती है, हत्याओं का सिलसिला चल पड़ता है लेकिन उसका असली मकसद उसकी बहन के हत्यारे को ढूंढना है। क्या वह अपने मकसद में कामयाब हो पाएगी या नहीं इसके लिए आपको देखनी पड़ेगी ये फिल्म।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनका दमदार अभिनय
-सबसे पहले बात करते है फिल्म में लीड रोल निभाने वाली हुमा कुरैशी की जिन्होंने बिना डायलॉग के अपने हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर बेबी के किरदार को बेहद सशक्त और प्रभावशाली बनाया है। एक प्रोफेशनल कान्ट्रैक्ट किलर के साथ बदले की आग में जलती एक बहन और अपने पति के प्यार को संभालने वाली बेबी को 3 अलग रूपों में दर्शाने का सफल प्रयास किया गया है। ये उनके करियर के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक कहा जा सकता है।
-सिकंदर खेर अपने किरदार में पूरी तरह जमे नजर आते हैं और फिल्म को मजबूत सहारा देते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजन्स काफी अच्छी है। एक शातिर बिल्डर जफर के किरदार में दर्शकों के दिल में जगह बनाने में वह सफल रहे हैं।
-चंकी पांडे ने फिल्म में बेबी के पप्पा पीएम जैन का किरदार निभाया है और इस रूप में दर्शकों को वह एकदम अलग अंदाज से प्रभावित करते हैं जबकि सीमा पाहवा हमेशा की तरह सहज और असरदार अभिनय करती हैं और इस फिल्म में भी उन्होंने वही सहजता दिखाई है।
-विद्या मालवडे और हिमांशु मलिक अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं। रूपेश बने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत और रचित सिंह भी कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं और अपने किरदारों को विश्वसनीय बनाते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पहलू
-निर्देशक नचिकेत सामंत ने एक अलग और साहसिक विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर उतारा है। उन्होंने क्राइम, मिस्ट्री, डार्क ह्यूमर और एक्शन के साथ ईमोशनल रोमांस का संतुलन बनाए रखा है। फिल्म की रफ्तार एक दो जगह छोड़कर अधिकांश समय बनी रहती है और कहानी कहीं भी अनावश्यक रूप से भटकती नहीं है।
-फिल्म की सिनेमैटोग्राफी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के माहौल को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है। एक्शन सीक्वेंस स्टाइलिश हैं और बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। एडिटिंग भी चुस्त है, जिसकी वजह से 2 घंटे 5 मिनट की फिल्म कहीं भी बोझिल महसूस नहीं होती।
फाइनल वर्डिक्ट
'बेबी डू डाई डू' मूवी एक अलग सोच के साथ बनाई गई मनोरंजक क्राइम थ्रिलर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और हुमा कुरैशी का शानदार अभिनय है। फिल्म सस्पेंस, एक्शन, थ्रिल का संतुलित मिश्रण पेश करती है और कहानी में कई अप्रत्याशित मोड़ दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं। यदि आप सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर, स्टाइलिश और कुछ नया देखने के शौकीन हैं, तो ये फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications