BMC elections 2025: बीएमसी चुनाव से पहले कांग्रेस और शरद पवार में ठनी, राज ठाकरे को लेकर संग्राम
BMC elections 2025: मुंबई के बीएमसी चुनाव सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति का ट्रेलर होता है। इस बार मुकाबला काफी रोमांचक होता दिख रहा है, क्योंकि चुनाव से पहले ही गठबंधनों के बीच संग्राम छिड़ गया है। महाविकास अघाड़ी (MVA) में अंदरूनी तनाव खुलकर सामने आने लगा है। एक तरफ महायुति हैं, जिसमें देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच मनमुटाव की बात कही जा रही है। दूसरी ओर एमवीए में भी सब कुछ ठीक नहीं है।
शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार गुट) विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। दोनों ही राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को साथ लाना चाहते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस इस प्रस्ताव को किसी सूरत में मानने के लिए तैयार नहीं है। पवार ही इस गठबंधन को जोड़ने वाली कड़ी हैं, लेकिन अब उनकी भी कांग्रेस से तकरार बढ़ती दिख रही है।

BMC elections 2025: राज ठाकरे को साथ लाने के पक्ष में पवार
- 2024 विधानसभा चुनावों में भारी नुकसान झेलने के बाद एमवीए के लिए बीएमसी चुनाव अग्निपरीक्षा है। घटक दल के नेता इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
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- सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार का मानना है कि अगर राज ठाकरे की एमएनएस को महाविकास अघाड़ी में शामिल किया जाए, तो मुंबई में सत्ताधारी महायुति (भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।
- इसी सोच के तहत शरद पवार और उद्धव ठाकरे इस मुद्दे पर चर्चा के पक्ष में दिख रहे हैं। दोनों मानते हैं कि बीएमसी चुनाव में जीत कार्यकर्ताओं और संगठन के मनोबल को बढ़ाने के लिए जरूरी है। इसके लिए व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए।
Congress किसी सूरत में राज ठाकरे को लाने के लिए तैयार नहीं
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने इस संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस और एमएनएस की राजनीतिक शैली और विचारधारा दो विपरीत ध्रुव हैं। उन्होंने साफ कहा कि उद्धव ठाकरे को कांग्रेस और MNS में से किसी एक को चुनना होगा।
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Sharad Pawar के सामने हैं कई चुनौतियां
सूत्रों के मुताबिक परिवार और पार्टी टूटने के बाद विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से शरद पवार चिंतित हैं। वह अपनी पार्टी और परिवार के राजनीतिक भविष्य के साथ ही संगठन को मजबूत करने जैसी चुनौतियों से एक साथ निपट रहे हैं। ऐसे हालात में बीएमसी चुनाव में अगर सहमति नहीं बनती है, तो इंडिया गठबंधन के भविष्य पर भी सवालिया निशान उठ सकते हैं।
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