अजित पवार को सबसे बड़ा झटका, बेटे पार्थ पवार की संपत्ती की जांच करेगी सरकार, महाराष्ट्र में मचा सियासी बवाल
Parth Pawar: महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार एक बड़े भूमि सौदे को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं। राजस्व विभाग ने पुणे में 300 करोड़ रुपये के महार वतन की 40 एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री से जुड़े इस सौदे की जांच के आदेश दिए हैं, और संबंधित सब-रजिस्ट्रार को निलंबित भी कर दिया है।
आरोप है कि इस जमीन को Amadea Enterprises LLP को बेचा गया, जिसमें पार्थ पवार पार्टनर थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जांच का आश्वासन दिया है। विपक्ष ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए गहन जांच की मांग की है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है।

कौन हैं पार्थ पवार?
पार्थ पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं। उन्होंने मुंबई के एच.आर. कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और लंदन से लॉ की पढ़ाई की। 2019 में उन्होंने मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन शिवसेना उम्मीदवार से हार गए थे। इसके बाद भी वे अपने पिता के राजनीतिक क्षेत्र पिंपरी-चिंचवाड़ और मावल में सक्रिय रहे हैं।
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अजित पवार के बेटे पर दर्ज हुई FIR
मिली जानकारी के अनुसार, पुणे पुलिस ने पार्थ पवार और उनकी कंपनी 'अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी' के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इस कंपनी ने पुणे के मुंधवा इलाके में सरकारी जमीन को उसकी असली कीमत से कई गुना कम दाम पर खरीदा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन करीब 1800 करोड़ रुपये की थी, लेकिन इसे मात्र 300 करोड़ में खरीद लिया गया। एफआईआर में तीन लोगों के नाम शामिल हैं, जिनमें से एक पार्थ पवार हैं।
सरकारी अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। सरकार ने तहसीलदार सूर्यकांत येवले और सब-रजिस्ट्रार आरबी तारु को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मामले की जांच रेवेन्यू और लैंड रिकॉर्ड विभाग से कराई जा रही है और यदि गड़बड़ी पाई गई तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।
क्या है पुणे का लैंड डील विवाद?
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 16.19 हेक्टेयर सरकारी जमीन अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई, जिसमें पार्थ पवार साझेदार हैं। यह सौदा 20 मई को हुआ, जिसमें कंपनी के पार्टनर दिग्विजय अमर सिंह पाटिल का नाम सेल डीड में दर्ज है। माना जा रहा है कि इस डील की असली कीमत लगभग 1600 से 1800 करोड़ रुपये थी, जबकि इसे 300 करोड़ में रजिस्टर्ड किया गया। अब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद इस हाईप्रोफाइल सौदे की जांच की जा रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अजित पवार खुद सत्ता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। विपक्ष ने इसे सत्ता और रसूख का दुरुपयोग बताया है, जबकि सरकार ने कहा है कि "दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।"
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