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शरद पवार के पोते रोहित पवार ने बनाया ट्रंप का फर्जी आधार कार्ड, गंभीर धाराओं के तहत पुलिस ने दर्ज किया केस

Rohit Pawar maked Trump fake Aadhaar: महाराष्‍ट्र में निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंधन महाराष्‍ट्र की वोटर लिस्‍ट में फर्जी वोटरों का मुद्दा उठाकर सीधे चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसी बीच महाराष्‍ट्र की राजनीति के धुरंधर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के पोते रोहित पवार को लेकर बड़ा मामला सामने आया है।

मुंबई की साइबर पुलिस ने रोहित पवार के खिलाफ मुंबई साउथ पुलिस स्‍टेशन में फर्जी आधार कार्ड बनाने के आरोप में केस दर्ज किया है। रोहित पवार ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। ट्रंप के नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनवाना ना केवल गैर कानूनी है बल्कि ये अंतराष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसलिए रोहित पवार की मुसीबत बहुत बढ़ चुकी है।

Rohit Pawar

रोहित पवार ने खुद कबूली ये बात

ताज्‍जुब की बात ये है कि एनसीपी एसपी विधायक रोहित पवार ने स्वयं सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का फर्जी आधार कार्ड बनाया था। मुंबई के दक्षिण क्षेत्र साइबर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इस स्वीकारोक्ति ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई के लिए उकसाया। ह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है।

क्‍यों रोहित पवार ने बनवाया ट्रंप का फर्जी आधार?

रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके डोनाल्ड ट्रंप का आधार कार्ड तैयार किया है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य देश की पहचान सत्यापन प्रणाली में मौजूद कमियों को उजागर करना था।

किसने दर्ज करवाई शिकायत, रोहित पर क्‍या लगे हैं आरोप?

इस घटना के बाद, बीजेपी पदाधिकारी धनंजय वागस्कर ने रोहित पवार के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। वागस्कर ने आरोप लगाया कि पवार ने सार्वजनिक शांति भंग करने और लोगों में भ्रम फैलाने का प्रयास किया है। उनकी शिकायत के आधार पर, मुंबई साइबर पुलिस ने पवार के साथ-साथ वेबसाइट निर्माता, उपयोगकर्ता और मालिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

इन गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज

जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेज बनाने का यह कृत्य सामाजिक सुरक्षा के लिए एक खतरा माना गया है। पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा 336(2), 336(3), 336(4), 337, 353(1)(B), 353(1)(C), 353(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(C) सहित कई गंभीर धाराएं लगाई हैं। इन धाराओं के तहत कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

जांच अधिकारी इस पूरे प्रकरण में यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या फर्जी आधार कार्ड बनाने के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक या डिजिटल नेटवर्क शामिल है। पुलिस ने बताया है कि डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच चल रही है और जल्द ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्‍या बोले एक्‍सपर्ट?

कानूनी विशेषज्ञों ने ऐसे कृत्यों को स्पष्ट रूप से आपराधिक श्रेणी में रखा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कार्यों और बयानों से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है और लोगों का सरकारी प्रणालियों पर से विश्वास उठ सकता है। ऐसी घटनाएं समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ा सकती हैं।

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