Ajit Pawar Political Journey: कभी 80 घंटे की सरकार, तो कभी आधी रात का खेल! 'दादा' के सफर की अनकही दास्तां
Ajit Pawar Political Journey: महाराष्ट्र की राजनीति में 28 जनवरी 2026 की तारीख एक युग के अंत के रूप में दर्ज हो गई है। राज्य के कद्दावर नेता और 'दादा' के नाम से मशहूर अजित पवार (Ajit Pawar) का बारामती के पास एक दुखद विमान हादसे में निधन हो गया। अजित पवार केवल एक नेता नहीं, बल्कि सत्ता के वो 'पावर सेंटर' थे जिन्होंने पिछले 13 सालों में रिकॉर्ड 6 बार उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचा था।
दिसंबर 2024 में छठी बार जिम्मेदारी संभालने के बाद वे देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे सरकार की सबसे मजबूत कड़ी बने हुए थे। 22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने महज 20 साल की उम्र में सहकारी संस्था से अपना सफर शुरू किया और शरद पवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए खुद को महाराष्ट्र का सबसे प्रभावशाली प्रशासक साबित किया। आज उनके जाने से बारामती से लेकर मुंबई तक एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना नामुमकिन है।

Ajit Pawar: छठी बार डिप्टी सीएम, सत्ता के सबसे बड़े 'पावर सेंटर'
अजित पवार ने पिछले 13 वर्षों में छह बार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वे अलग-अलग विचारधारा वाली सरकारों में भी अपनी जगह बनाने में माहिर थे। वे महाराष्ट्र के ऐसे नेता हैं जो सबसे अधिक बार, हालांकि लगातार नहीं, इस पद पर रहे। दिसंबर 2024 से वे राज्य के आठवें उप मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा बने थे।
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20 साल की उम्र में आगाज और 'बारामती' का गढ़
अजित पवार का राजनीतिक सफर अहमदनगर जिले से शुरू हुआ, लेकिन उनकी असली पहचान बारामती बनी। उन्होंने अपना पहला चुनाव महज 20 साल की उम्र में एक चीनी सहकारी संस्था (Sugar Cooperative) से लड़ा था। वे बारामती से कई बार विधायक रहे। एक बार उन्होंने लोकसभा चुनाव भी जीता, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए अपनी सीट छोड़ दी।
कृषि से लेकर जल संसाधन तक, अहम विभागों के सारथी
प्रशासनिक पकड़ के मामले में अजित पवार को सबसे तेज तर्रार नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान संभाली। जिनमें प्रमुख विभाग, कृषि, बिजली, जल संसाधन और बागवानी थे।
जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर काम किया, हालांकि इन्हीं परियोजनाओं को लेकर वे बाद में विवादों में भी रहे।
Ajit Pawar Controversy: विवादों का साया और वापसी की कला
राजनीति में अजित पवार का नाता विवादों से भी गहरा रहा है।
बयानों का शोर: पानी को लेकर दिया गया उनका एक विवादित बयान आज भी उनके विरोधियों द्वारा याद किया जाता है।
इस्तीफा और वापसी: 2010 में पहली बार डिप्टी सीएम बनने के बाद कई बार उन्हें आरोपों के चलते इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन हर बार वे और भी मजबूती के साथ सत्ता में लौटे।
80 घंटे की सरकार
23 नवंबर 2019 की सुबह महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा 'मिडनाइट ऑपरेशन' थी। अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर तड़के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सबको चौंका दिया था। शरद पवार की मर्जी के खिलाफ की गई इस बगावत ने पूरे देश को सन्न कर दिया था, लेकिन बहुमत न होने के कारण यह सरकार महज 80 घंटे ही चल सकी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और विधायकों के वापस लौटने के बाद 'दादा' को इस्तीफा देना पड़ा, जिसने उन्हें बगावत और फिर नाटकीय वापसी के एक नए अवतार में पेश किया।
संगठन पर पकड़ और शरद पवार से रिश्ता
अजित पवार को एक सख्त प्रशासक और संगठनकर्ता के रूप में देखा जाता था। भले ही चाचा शरद पवार से उनके मतभेदों की खबरें अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनीं और पार्टी में टूट भी हुई, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से हमेशा खुद को उनका अनुयायी ही बताया। आज उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है।
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