क्यों चर्चा में है महज 17 मिनट की ये शादी? पूरा मामला जानकर आप भी कहेंगे- 'जोड़ी हो तो ऐसी'
इस शादी में ना बैंड था, ना बारात और ना ही खाने का इंतजाम...जानिए कहां हुई ये अनोखी शादी।
सीधी, 3 मई: शादियों में फिजुलखर्जी करना आम बात है और कुछ लोग इसे अपनी शान भी समझते हैं। मतलब, किसी शादी में जितना ज्यादा खर्चा, उतना लड़की और लड़के वालों का रुतबा...। हालांकि कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो शादियों को बेहद सादे तरीके से संपन्न कराते हैं और समाज को फिजुलखर्जी रोकने का एक संदेश देते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ, मध्य प्रदेश के सीधी जिले में, जहां एक दूल्हा-दुल्हन ने बिना बैंड-बाजे...बिना बारातियों और बिना किसी तामझाम के महज 17 मिनट में सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए।
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क्यों हो रही है इस शादी की चर्चा
दरअसल, सोमवार यानी 2 मई को सीधी जिले के रोली मेमोरियल भवन में ये अनोखी शादी संपन्न हुई। इस शादी की दूर-दूर तक चर्चा है...और हो भी क्यों ना, शादी में ना दूल्हे ने महंगी शेरवानी पहनी और ना ही दुल्हन ने कीमती लहंगा। दोनों साधारण कपड़ों में हॉल के अंदर दाखिल हुए और महज 17 मिनट के कार्यक्रम में ये शादी संपन्न हो गई।

ना बैंड...ना बाराती...ना ही खाने का इंतजाम
शादी के दौरान दोनों ने मंत्रोच्चार के बीच मंच पर ही एक पवित्र पुस्तक को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। रमेणी परंपराओं के साथ हुई इस शादी में बैंड-बाजे का कोई शोर नहीं था...बारातियों के नाम पर केवल दोनों पक्ष के परिजन थे। इसके अलावा आस-पास के कुछ लोग थे, जो इस अनोखी शादी के गवाह बने। इतना ही नहीं, शादी में खाने की भी व्यवस्था नही थी। दूल्हे और दुल्हन के लिए स्टेज जैसा तामझाम भी नहीं था और दोनों ने चटाई पर बैठकर महज 17 मिनट की रस्मों के बाद एक दूसरे को अपना हमसफर बना लिया।

क्या है रमेणी शादी?
दरअसल, शादियों में फिजुलखर्जी रोकने और समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने के लिए सीधी ट्रस्ट ने ये बड़ी पहल की है। बेहद साधारण तरीके से होने वाली इस शादी को रमेणी परंपरा कहा जाता है। शनिवार को इसी परंपरा के तहत बहरी तहसील के बंदैला गांव के रहने वाले पंचराज प्रजापति के बेटे दीपक प्रजापति और गोपद बनास तहसील के तहत आने वाले गांव कोटहा के रहने वाले गणेश प्रजापति की बेटी प्रियंका प्रजापति की शादी संपन्न हुई।

संत रामपाल के अनुयायी हैं दोनों पक्ष
परिजनों ने बताया कि दोनों पक्ष संत रामपाल के अनुयायी हैं। उनके गुरूजी सभी को ये संदेश देते हैं कि शादियों में फिजुलखर्जी रुकनी चाहिए, इसलिए उन्होंने इस विधि से अपने बच्चों की शादी कराने का फैसला लिया। शादी के दौरान हॉल में एक तरफ संत रामपाल के प्रवचन चलते रहे और दूसरी तरह शादी की सारी रस्में निभाई गईं। वहीं, संत रामपाल के शिष्य बब्लेश गुप्ता और सत्य लाल प्रजापति शादी को लेकर बताया कि बिना खर्च की शादी करके दूल्हा-दुल्हन के परिजनों ने समाज में सकारात्मक संदेश दिया है।












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