अशोकनगर: त्रिवेणी नदी में कांवड़ भरने गए दो बच्चों की डूबने से मौत, SDERF की अनुपस्थिति से उठे सवाल
MP News: श्रावण मास के दूसरे सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक की आस्था दो परिवारों के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गई। अशोकनगर जिले के तूमैन गांव स्थित त्रिवेणी नदी में जल लेने गए दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान 16 वर्षीय सौरभ लोधी और 9 वर्षीय आरूषि साहू के रूप में हुई है। दोनों बच्चे अशोकनगर की मुंगावली तहसील के दियाधरी गांव के रहने वाले थे।
दियाधरी गांव से हर साल बड़ी संख्या में लोग कांवड़ यात्रा के लिए तूमैन नदी पहुंचते हैं। इस बार भी दर्जनों लोग सुबह से ही जल भरने पहुंचे थे। लेकिन सोमवार दोपहर करीब 12 बजे अचानक उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दोनों बच्चे नदी में नहाने के दौरान गहराई में चले गए और डूब गए। वहां मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता से उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कैसे हुई ये घटना, कांवड़ यात्रा का दुखद अंत
सावन मास के दूसरे सोमवार को, दियाधरी गांव से 8-10 लोगों की एक टोली कांवड़ यात्रा के लिए त्रिवेणी नदी के घाट पर जल भरने पहुंची थी। इस टोली में सौरभ लोधी, पुत्र हरिसिंह लोधी (16 वर्ष), और आरूषि साहू, पुत्री मुनेश साहू (9 वर्ष) भी शामिल थे। दोनों बच्चे अपने परिजनों और अन्य ग्रामीणों के साथ तूमैन गांव के त्रिवेणी नदी घाट पर पहुंचे थे। यह घाट अशोकनगर जिले में कांवड़ यात्रा के लिए महत्वपूर्ण स्थल है, जहां हर सावन में श्रद्धालु भारी संख्या में जल लेने आते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, टोली के अन्य लोग एक तरफ जल भर रहे थे, जबकि सौरभ और आरूषि बिना किसी को बताए घाट के दूसरी ओर चले गए। कचनार थाना प्रभारी पूनम सेलर ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी ने पहले ही बच्चों को नदी में जाने से रोका था। उस समय दोनों बच्चे किनारे पर बैठ गए थे, लेकिन बाद में वे अन्य ग्रामीणों के साथ नहाने के लिए नदी में उतर गए। नहाते समय दोनों अनजाने में गहरे पानी में चले गए, जहां उनका पैर फिसल गया और वे डूबने लगे।
आरूषि के चाचा शिवकुमार साहू ने बताया, "हम लोग जल भर रहे थे, तभी बच्चों के चिल्लाने की आवाज आई। मैं और कुछ अन्य लोग उन्हें बचाने के लिए नदी में कूदे, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि हम खुद डूबने लगे।" ग्रामीणों ने तौलिया और साफे जैसे कपड़ों का उपयोग कर बच्चों को बचाने की कोशिश की, लेकिन गहराई और तेज बहाव के कारण वे असफल रहे। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद स्थानीय गोताखोरों ने दोनों बच्चों को नदी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
दोनों बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए शवों को भेज दिया और मामले में आकस्मिक मौत का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बच्चों का पारिवारिक पृष्ठभूमि: मातम में डूबा दियाधरी गांव
सौरभ लोधी और आरूषि साहू दियाधरी गांव के पास-पास रहने वाले परिवारों से थे। आरूषि अपने परिवार की सात संतानों में चौथी थी, जिसमें पांच बहनें और दो भाई हैं। वहीं, सौरभ तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था, जिसके एक बड़ा भाई और एक बहन है। इस हादसे ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सौरभ और आरूषि स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय थे। सौरभ कक्षा 10वीं का छात्र था, जबकि आरूषि तीसरी कक्षा में पढ़ती थी।
दियाधरी गांव में इस हादसे के बाद मातम का माहौल है। आरूषि के पिता मुनेश साहू ने रोते हुए कहा, "मेरी बेटी को भोलेनाथ की पूजा के लिए जल लेने जाना था, लेकिन उसकी जिंदगी ही चली गई।" सौरभ की मां ने बताया, "वह बहुत समझदार और मेहनती था। हमने कभी नहीं सोचा था कि कांवड़ यात्रा का यह दिन हमारे लिए इतना दुखद होगा।"
SDERF की अनुपस्थिति
इस हादसे ने त्रिवेणी नदी के घाट पर SDERF की अनुपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सावन के महीने में त्रिवेणी नदी के घाट पर हर सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके बावजूद, घाट पर SDERF की नियमित तैनाती नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर SDERF की टीम मौके पर मौजूद होती, तो शायद बच्चों को समय पर बचाया जा सकता था।
एक स्थानीय निवासी, रामेश्वर यादव, ने कहा, "हर साल सावन में हजारों लोग यहां जल लेने आते हैं। नदी का बहाव तेज होता है, और गहरे गड्ढे भी हैं। फिर भी प्रशासन SDERF की तैनाती क्यों नहीं करता? यह हादसा टाला जा सकता था।" ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हाल ही में नदी के घाट पर एक गड्ढा खोदा गया था, जिसके कारण गहराई बढ़ गई थी। संभवतः सौरभ और आरूषि इसी गड्ढे में फंस गए।
घटना के बाद SDM बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव, तहसीलदार शंभू मीणा, और SDERF की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कचनार थाना प्रभारी पूनम सेलर ने बताया कि दो पुलिसकर्मी घटनास्थल पर ड्यूटी पर मौजूद थे, लेकिन उन्हें तैरना नहीं आता था। उन्होंने तौलिया और कपड़ों से बचाव का प्रयास किया, लेकिन यह नाकाफी रहा।
जांच शुरू, मुआवजे की घोषणा
जिला प्रशासन ने इस हादसे को गंभीरता से लिया है। अशोकनगर के कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और SDERF की तैनाती न होने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। प्रशासन ने मृतक बच्चों के परिवारों को मुआवजे का आश्वासन दिया है। शासन के नियमों के अनुसार, नदी में डूबने से मृत्यु होने पर मृतक के आश्रितों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है, जिसके लिए पोस्टमॉर्टम और पंचनामा अनिवार्य है।
SDM बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव ने कहा, "यह एक दुखद घटना है। हमने जांच शुरू कर दी है, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए घाट पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।" उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सावन के बाकी दिनों में त्रिवेणी नदी के घाट पर SDERF और जल पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
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