Kuno National Park: चीतों के घर में आ धमका राजस्थान के रणथंबौर का 'टाइगर'
राजस्थान के रणथंबौर टाइगर रिजर्व से एक बाघ टहलते हुए सीधे मप्र में चीतों के घर कूनो तक पहुंच गया है। यहां उसके देखे जाने की पुष्टि भी हुई है। वन विभाग उसके पगमार्ग को देखकर उसकी तलाश की जा रही है।

चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो के जंगल में छोड़े गए चीतों के लिए नया खतरा जंगल में प्रवेश कर गया है। राजस्थान के सवाई माधोपुर के रणथंबौर टाइगर रिजर्व से एक टाइगर टहलते हुए कूनो के जंगल में आ गया। पास के गांव में उसने मवेशी का शिकार भी किया था।
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत के कूनो में लाए गए चीतों ने टाइगर को कभी देखा नहीं है। टाइगर चीतों पर भारी पड़ता है। इस लिहाज से रणथंबौर टाइगर रिजर्व के जंगलों से होता हुआ जो टाइगर कूनो तक आ गया है, यह चीतों के लिए खतरनाक हो सकता है। कूनो के जंगल में चीता की मौजूदगी के स्पष्ट प्रमाण सामने आए हैं। उसे देखा भी गया है, लेकि वह घने जंगल में पहुंच गया। उसकी लोकेशन तो फिलहाल नहीं मिल पा रही, लेकिन पगमार्ग से उसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग उसे चीतों के इलाके से दूर रखने का भरसक प्रयास करेगा। कूनो पार्क के रेंजर वीरेंद्र पूनिया ने यहां टाइगर के पहुंचने की पुष्टि स्थानीय मीडिया से चर्चा के दौरान की है।

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रणथंबौर के टी 136 बताया जा रहा है
कूनो में देखे गए टाइगर की पहचान रणथंबौर के टाइगर टी-136 के रुप में की जा रही है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह वहीं टाइगर है, लेकिन कूनो नेशनल पार्क, माधव नेशनल पार्क और मप्र की सीमा से सटे राजस्थान के सवाई माधोपुर रणथंबौर टाइगर रिजर्व प्राकृतिक कारीडोर से जुड़े हुए हैं। यह पहली बार नहीं है जब टाइगर इस काॅरीडोर के माध्यम से यहां आया है, इसके पहले भी कई दफा रणथंबौर से बाघ यहां आते-जाते रहे हैं।












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