MP News: हल्दी की खेती से चमकी किसानों की किस्मत, कैसे प्रोसेसिंग यूनिट से लाखों कमाए, जानिए
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिला मुख्यालय से करीबन 10 किलोमीटर दूर ग्राम पांतोड़ा में हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट का संचालन करने वाले सफल उद्यमी संदीप रावल की कहानी है.
लाभार्थी रावल बताते है कि, मैंने वर्ष 2017-18 में उद्यान विभाग अंतर्गत संचालित पीएमएफएमई योजना के तहत 25 लाख रूपये का ऋण लिया था। योजना अंतर्गत मुझे 8 लाख 75 हजार रूपये का अनुदान मिला। योजना के माध्यम से मेरे द्वारा माँ एकता मसाले नाम से यूनिट की स्थापना की है।

हितग्राहियों के लिए लाभदायक योजना
वाकई में यह योजना हितग्राहियों के लिए लाभदायक योजना है। वर्तमान परिस्थिति में लाभार्थी रावल अपनी हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट में अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे है। यूनिट में 8 व्यक्तियों को रोजगार मिल रहा है। एक सफल उद्यमी के रूप में संदीप रावल यूनिट संचालन कर लाखों रूपये का मुनाफा कमा रहे है।
उद्यमी रावल ने किसानों को प्रेरक संदेश दिया है कि, कृषकगण हल्दी की फसल उगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते है। यूनिट में तैयार की गई हल्दी मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों जैसे-महाराष्ट्र व गुजरात में भेजी जाती है। यूनिट में हल्दी के अलावा अन्य मसालें भी तैयार किये जाते है। संदीप रावल हल्दी की खेती भी करते है।
मध्यप्रदेश में भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए प्रमुख तत्व के रूप में हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए हल्दी का भारतीय रसोई में महत्वपूर्ण स्थान है। हल्दी को धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। हल्दी का उपयोग धार्मिक कार्यों के अलावा मसाला, रंग सामग्री तथा उपटन के रूप में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में हल्दी एक कारगर औषधि है।
हल्दी के फायदें अनेक
हल्दी (टर्मरिक) ये भारतीय वनस्पति है, यह अदरक की प्रजाति का 5 से 6 फिट बढ़ने वाला पौधा है, जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारी दृव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा, लौंगा, गौरी, वट्ट विलासनी, कुमकुम टर्मरिक नाम दिये गये है।
उपयोग
हल्दी में कैंसर रोधी गुण पाये जाते है। सौंदर्य में हल्दी का उपयोग त्वचा में निखार लाने के लिए किया जाता है। आन्तरिक रक्त स्त्राव की स्थिति में भी हल्दी का उपयोग दर्दनाशक के रूप में किया जाता है।
हल्दी पाउडर बनाने की प्रक्रिया
हल्दी की खुदाई के उपरान्त हल्दी को अच्छे से साफ कर बॉयलर के माध्यम से उबाला जाता है। अच्छी तरह से उबलने के बाद उबले हुए कन्दो को सोलर ड्रायर या धूप में चटाई में फैलाकर सूखाया जाता है। सूखी हुई गाठों की हस्तचलित या मशीन चलित ड्रमों के उपयोग से पॉलिसिंग की जाती है। पॉलिस उपरान्त सूखी गाठों में 2 प्रतिशत हल्दी का पीसा पाउडर मिलाकर पुनः इनकी पॉलिसिंग की जाती हैै। जिससे सूखे हुए कंद काफी आकर्षक हो जाते है। यह बाजार में विक्रय हेतु भेजी जाती है तथा इसी को पीसने के उपरान्त पाउडर बनता है।
2540 हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन
हल्दी माह अप्रैल-मई में लगाई जाती है और यह 9 से 10 माह में तैयार हो जाती है। जिले में 2540 हेक्टेयर क्षेत्र में 66040 मैट्रिक टन सेलम किस्म की हल्दी का उत्पादन हो रहा है।
वित्तीय अनुदान सहायता
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना अन्तर्गत कृषकों व व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनाये जाने हेतु जिले के उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने एवं उत्पादित फसल प्रसंस्करण ईकाईयाँ स्थापित किये जाने के लिये अनुदान सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
करीबन 1680 कृषक जुड़े हल्दी खेती से जिले में सेलम किस्म की हल्दी लगाई जाती है। हल्दी की खेती से जिले में करीबन 1680 कृषक जुडे़ है। मुख्यतः डोइफोड़िया कलस्टर, सिरपुर कलस्टर, खकनार कलस्टर एवं फोफनार कलस्टर में हल्दी की खेती होती है।
नमस्ते भारत प्रदर्शनी जनवरी, 2025 में रूस के मास्को में आयोजित ''नमस्ते भारत'' प्रदर्शनी में जिले की उद्यानिकी एवं कृषि फसलों के उत्पादों का विस्तृत विवरण प्रस्तुतीकरण किया गया था। जिसके अंतर्गत केले व हल्दी से निर्मित विभिन्न उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में शामिल हुए थे। जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि, हल्दी पाउडर के एक्सपोर्ट हेतु खकनार कृषि विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, संस्थापक इकोइंडिया और एलएससी एकोमिर कंपनी अध्यक्ष भारत-रूस मैत्री संगठन हारमनी द्वारा एमओयू साईन किया गया है।
समृद्धि और आर्थिक विकास के खुलेंगे द्वार
जिले में 32 हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट है। हल्दी की क्वालिटी गहरी पिली व कुरकमीन की मात्रा 3.2 प्रतिशत है। निश्चित ही हल्दी के व्यवसाय से जिले के किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ जिले में समृद्धि और आर्थिक विकास होगा।
पीएमएफएमई योजना से संदीप बने सफल उद्यमी
अपने दृढ़-संकल्प और प्रबल ईच्छाशक्ति के बल पर व्यक्ति की हर राह आसान होती है। बस हमें एक सही दिशा की आवश्यकता पड़ती है। यही सही दिशा बनकर प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना लाभार्थी संदीप के जीवन में आयी। इस योजना का लाभ उद्यानिकी विभाग के माध्यम से लाभार्थी को मिला। जिससे मानो उसके जीवन की दिशा-दशा ही बदल गई।
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