Madhya pradesh news: डीएम ने लड़की से कहा, एक दिन की कलेक्टर बनोगी ! फिर क्या हुआ ?
शिवपुरी। फिल्म नायक में अनिल कपूर एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे। 14 दिसम्बर की बात है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में जाह्नवी एक दिन के लिए कलेक्टर बनी। जाह्नवी अभी पढ़ाई कर रही है। वह अपने कॉलेज की समस्या लेकर डीएम ऑफिस में शिकायत करने पहुंची थी। लेकिन डीम साहब को न जाने क्या सूझा कि उन्होंने जाह्नवी को अपनी कुर्सी ऑफर कर दी। जिलाधिकारी के इस फैसले की सोशल मीडिया में जम कर तारीफ हो रही है।

एक दिन की कलेक्टर
शिवपुरी आईटीआई के कुछ छात्रों को परीक्षा देने से रोक दिया गया था। निराश छात्र अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे थे। छात्रों का नेतृत्व जाह्नवी कर रही थी। कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह के सामने जाह्नवी तर्कसंगत तरीके से बात रख रही थी। डीएम ने तत्काल आईटीआई के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इस मामले की जांच के लिए एक अफसर को जिम्मेवारी भी सौंप दी। इसके बाद अक्षय कुमार सिंह ने जाह्नवी से कहा, मैं चाहता हूं कि तुम एक दिन के लिए मेरी कुर्सी संभालो और लोगों की समस्याएं सुनो। फिर वे कुर्सी से उठ गये और जाह्नवी को अपनी जगह बैठा दिया। जाह्नवी अचानक मिले इस प्रस्ताव पर हैरान रह गयी। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। वह डीएम की कुर्सी पर बैठ गयी। डीएम साहब से मिलने जो फरियादी आये थे उनकी बातें सुनी। उनकी समस्याओं के निदान के लिए संबंधित अफसरों को निर्देश दिये।

डीएम साहब ने क्यों लिया ऐसा फैसला?
शिवपुरी के जिलाधिकारी अक्षय कुमार सिंह जिले में बालिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान चला रहे हैं। जब जाह्नवी उनके सामने अपने कॉलेज की समस्या बता रही थी तब उनकी जेहन में एक बात कौंधी। उन्होंने सोचा कि अगर इस लड़की को एक दिन का डीएम बना दिया जाए तो बालिका शिक्षा अभियान के लिए एक अच्छा संदेश जाएगा। डीएम अक्षय कुमार सिंह ने अपने ऑफिशियल ट्वीटर अकांउट से ट्वीट कर खुद इस बात की जानकारी दी। उन्होंने ट्वीटर पर वह तस्वीर भी शेयर की जिसमें जाह्नवी डीएम की कुर्सी पर बैठी है। डीएम साहब ने ऐसा क्यों किया ? अक्षय कुमार सिंह ने बताया कि आज के छात्र भविष्य के कर्णधार हैं। उनके मन में दायित्व और उसके निर्वाह की भावना जगाने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। मैंने यही किया। एक युवा को समझना चाहिए कि किसी पद का आकर्षण एक बात है और उसकी जिम्मेवारियां अलग बात हैं।

16 साल की श्रावणी ने किया था फाइल का निबटारा
हाल के दिनों में छात्र- छात्राओं को प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेवारियों से रू-ब-रू कराने की पहल तेज हुई है। अक्टूबर 2020 में जब आंध्र प्रदेश अनंतपुर जिल में बारहवीं की छात्रा श्रावणी को एक दिन के लिए डीएम बनाया गया था तो केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर इस फैसले की सराहना की थी। उन्होंने लिखा था, 16 साल की श्रावणी ने 11 अक्टूबर 2020 को एक दिन के लिए अनंतपुर जिले का कार्यभार संभाला। एक मजदूर की बहादुर बेटी को डीएम की कुर्सी पर बैठा देख कर अच्छा लगा। प्रकाश जावड़ेकर ने श्रावणी की तस्वीर भी शेयर की थी। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिला प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर श्रावणी को एक दिन का कलेक्टर बनाने का फैसला किया था। श्रावणी ने एक अपने सिग्नेचर से एक सरकारी फाइल का निबटारा भी किया था। लड़कियों में आत्मविश्वास जगाने के लिए ऐसा किया गया था।

जब सातवीं की छात्रा ने थानेदार को हड़काया
इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बिहार के सीतामढ़ी में सातवीं की एक छात्रा को एक दिन के लिए एसपी बनाया गया था। उस लड़की ने असल पुलिस अधीक्षक की तरह लोगों की समस्याएं सुनीं। एक फरियादी की समस्या पर उसने संबंधित थानेदार को फोन लगाया और रिश्वत ना लेने की चेतावनी दी। उसने थानेदार को हड़काते हुए कहा था, अगर काम ठीक से नहीं करेंगे तो तुरंत सस्पेंड किये जाएंगे। सीतामढ़ी के एसपी अनिल कुमार वहीं मौजूद थे। वह उस बालिक के तेवर को देख कर दंग रह गये। इस रोमांचक अनुभव के बाद उस लड़की ने कहा था कि वह असल जिंदगी में भी एसपी बनना चाहती है और वह इसके लिए जीतोड़ पढ़ाई करेगी। एक प्रशासनिक अधिकारी को कठिन चुनौतियों और भारी दबाव के बीच काम करना पड़ता है। जनता की आकांक्षा और सरकार की योजनाओं के बीच उन्हें तालमेल बैठाना होता है। आज के छात्र ही भविष्य के अफसर हैं। अगर पहले से उन्हें चुनौतियों की जानकारी होगी तो उनका प्रदर्शन और भी बेहतर होगा। इसलिए अब छात्र-छात्राओं को एक दिन के अफसर बनाने का प्रयोग तेज कर दिया गया है।












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