श्योपुर में वनभूमि पर चला सरकारी बुलडोजर, ग्रामीणों ने मचा दिया घमासान – पत्थर चले, जेसीबी टूटी, वनकर्मी घायल
MP News Sheopur: श्योपुर जिले के मोरका गांव में शनिवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब वनभूमि अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई को देखकर पहले तो महिलाएं सामने आईं और विरोध जताया, लेकिन कुछ ही देर में मामला उग्र हो गया और पत्थरों की बौछार, आगजनी और तोड़फोड़ में तब्दील हो गया। इस जंगल-जंग के टकराव में चार वनकर्मी घायल हो गए और जेसीबी समेत कई सरकारी वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

क्या है पूरा मामला, कैसे हुई ये घटना
घटना श्योपुर जिले के टर्रा-ओछापुरा रोड पर स्थित मोरका गांव के वन क्षेत्र में हुई। वन विभाग को सूचना मिली थी कि करीब 500 बीघा वनभूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। इस कब्जे को हटाने के लिए वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम, जिसमें डिप्टी रेंजर गणपत आदिवासी, वनकर्मी मनोज कुमार आदिवासी, वीतेंद्र सिंह राजपूत, और धीरज सक्सेना शामिल थे, शनिवार दोपहर मौके पर पहुंची।
टीम के पहुंचते ही बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों, विशेष रूप से महिलाओं, ने विरोध शुरू कर दिया। स्थिति तब बिगड़ गई जब ग्रामीणों ने पथराव शुरू किया और जेसीबी मशीन सहित सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की। हमले में चार वनकर्मी घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वन विभाग की टीम को अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा।
घायल वनकर्मी और FIR
हमले में डिप्टी रेंजर गणपत आदिवासी, मनोज कुमार आदिवासी, वीतेंद्र सिंह राजपूत, और धीरज सक्सेना को चोटें आईं। सभी को प्राथमिक उपचार के लिए श्योपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। रेंजर पवन कुमार शर्मा की शिकायत पर रघुनाथपुर थाना पुलिस ने चार नामजद व्यक्तियों-डुम्मा आदिवासी, गुरुदयाल आदिवासी, पवन, और रामविलास-के साथ-साथ 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353 (शासकीय कार्य में बाधा), 332 (शासकीय कर्मचारी को चोट पहुंचाना), 147 (दंगा करना), और 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना) के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
500 बीघा वनभूमि पर अवैध कब्जा
जानकारी के अनुसार, टर्रा-ओछापुरा रोड पर सामान्य वनमंडल श्योपुर के अंतर्गत आने वाली करीब 500 बीघा वनभूमि पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा था। इस जमीन पर झोपड़ियां बनाकर कुछ लोग खेतीबाड़ी और रहवास कर रहे थे। वन विभाग के अनुसार, पिछले तीन साल से यह अतिक्रमण चल रहा था। पिछले साल प्रशासन ने इस जमीन को खाली कराया था, लेकिन ग्रामीणों ने दोबारा कब्जा कर लिया।
एसडीओ (वन) इंदर सिंह धाकड़ ने बताया कि दो महीने पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें जमीन खाली करने के लिए कहा गया था। लेकिन ग्रामीणों ने नोटिस का पालन नहीं किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
झोपड़ी में आग लगने का विवाद
विरोध के दौरान एक झोपड़ी में आग लग गई, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है। वन विभाग का दावा है कि ग्रामीणों ने कार्रवाई रुकवाने के लिए जानबूझकर अपनी झोपड़ी में आग लगाई। दूसरी ओर, ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने उनकी झोपड़ी में आग लगाई, जिसमें उनका घरेलू सामान जल गया। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है।
डीएफओ का बयान: पहले से थी हमले की योजना
सामान्य वनमंडल श्योपुर के डीएफओ केएस रंधा ने इस घटना को गंभीर बताया। उन्होंने कहा, "हमारी संयुक्त टीम वनभूमि से अवैध कब्जा हटाने गई थी। अतिक्रमणकारी पहले से हमले की योजना बनाकर तैयार थे। उन्होंने पथराव किया और वाहनों में तोड़फोड़ की। इस हमले में हमारे चार कर्मचारी घायल हुए हैं। रघुनाथपुर थाने में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है।" डीएफओ ने यह भी कहा कि वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए भविष्य में भी कार्रवाई जारी रहेगी।
ग्रामीणों के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से इस जमीन पर रह रहे हैं और छोटे स्तर पर खेतीबाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त सूचना या पुनर्वास की व्यवस्था के उनकी झोपड़ियां तोड़ने की कोशिश की। एक महिला ग्रामीण ने कहा, "हमने सामान निकालने के लिए थोड़ा समय मांगा था, लेकिन वन विभाग ने हमारी बात नहीं सुनी और हमारी झोपड़ी में आग लगा दी।" ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में बड़े दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि गरीब आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है।
पूर्व में भी हुई हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब श्योपुर में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने गई टीम पर हमला हुआ है। अक्टूबर 2024 में कोलारस के सनवारा बीट में भी वन विभाग की टीम पर आदिवासियों ने पथराव किया था, जिसमें दो वनकर्मी घायल हुए थे। उस घटना में भी ग्रामीणों ने वनकर्मियों पर मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ का आरोप लगाया था, जबकि वन विभाग ने ग्रामीणों पर हमले का जवाबी आरोप लगाया था। इन घटनाओं से साफ है कि वनभूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा श्योपुर में लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ है।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सियासी रंग भी ले लिया है। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार करार दिया है। स्थानीय कांग्रेस नेता बाबू जंडेल ने कहा, "वन विभाग और प्रशासन बिना पुनर्वास की व्यवस्था के गरीब आदिवासियों को बेघर कर रहा है। बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यह सरकार की पक्षपातपूर्ण नीति को दर्शाता है।" वहीं, बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने वन विभाग की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त करना पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।
प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करेगा?
जिला प्रशासन और वन विभाग ने इस घटना के बाद सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने कहा कि सभी आरोपियों की तलाश की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। डीएफओ केएस रंधा ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कार्रवाई से पहले स्थानीय समुदायों के साथ संवाद बढ़ाया जाएगा। साथ ही, अतिक्रमण हटाने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
जिला कलेक्टर ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे ग्रामीणों की शिकायतों को सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है।












Click it and Unblock the Notifications