Sagar: ब्राह्मण और जैन में अटकी कांग्रेस, एक को जिलाध्यक्ष तो दूसरे वर्ग को विधानसभा टिकट तय होगा
सागर 23 सितंबर। आखिरकार कांग्रेस में बदलाव की बयार ऊपर से नीचे तक शुरु हो गई। उधर राहुल गांधी भारत जोड़़ों यात्रा पर निकले हैं, इधर मप्र में कांग्रेस को जगाने और स्फूर्ति लाने के लिए कमलनाथ ने सर्जरी प्रारंभ कर दी है। सबसे पहली गाज सागर जिलाध्यक्ष रेखा चौधरी पर गिरी, जो पिछले 12 साल से लगातार जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज थी। कमलनाथ ने जिलाध्यक्ष चौधरी सहित उनकी पूरी जिला कांग्रेस कमेटी को ही भंग कर दिया है। भविष्य में विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर अब ब्राह्मण या जैन समाज से जिलाध्यक्ष की ताजपोशी की जाएगी। एक समाज को जिलाध्यक्ष तो दूसरे को विधानसभा का टिकट दिया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी सहित उनकी पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है। मालूम हो कि श्रीमती चौधरी पिछले करीब 12 वर्ष से इस पद पर थीं। इस दौरान लगातार पार्टी न सिर्फ शहर से विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हारती रही तो वहीं इस दौरान हुए महापौर के चार चुनावों में भी पार्टी हारी थी। यहां तक की 2010 में हुए महापौर चुनाव में खुद श्रीमती चौधरी मैदान में थी और कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। तब किन्नर कमला बुआ महापौर निर्वाचित हुई थीं। दो माह पूर्व हुए निकाय चुनाव में सर्वाधिक संभावनाओं के बावजूद मिली हार के बाद से ही यह बात जोर पकडऩे लगी थी कि अब कांग्रेस संगठन में बदलाव तय है, हालांकि रेखा चौधरी को शहर अध्यक्ष पद से हटाने की मांग पिछले 5 साल से कांग्रेस के नेता ही कर रहे थे।
सबसे अधिक कार्यकाल तक पद पर केवल दो अध्यक्ष रहे
बहरहाल श्रीमती चौधरी दूसरी शहर कांग्रेस अध्यक्ष हैं जिनका कार्यकाल सर्वाधिक रहा। इसके पूर्व स्व. हुकुमचंद चौधरी करीब 16 वर्ष तक शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे। बहरहाल श्रीमती चौधरी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद अब नए अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक हल्कों और कांग्रेस संगठन में ही सरगर्मी तेज हो गई है। मालूम हो कि पहले से ही शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई नेता अपने आकाओं के यहां जमावट किए हुए थे।
ब्राह्मण या जैन अध्यक्ष! एक को अध्यक्ष तो दूसरे को विधानसभा टिकट
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पिछले निकाय चुनाव और आगामी वर्ष में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी अब शहर में जातिगत समीकरणों को साधने के लिए शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद पर किसी जैन या ब्राह्मण नेता को अध्यक्ष बना सकती है। राजनीतिक जानकारों की माने तो अगर कांग्रेस ने इन दोनों में से किसी एक वर्ग के नेता को अध्यक्ष का पद सौंपा तो आगामी विधानसभा चुनाव में फिर दूसरे वर्ग के नेता को टिकट मिलना लगभग तय है। बहरहाल अब कांग्रेस नेताओं की निगाहें जिला ग्रामीण अध्यक्ष के पद पर भी लगी हैं। जानकारों की मानें तो जल्द ही जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष की भी छुट्टी हो सकती है वैसे भी वह अब तक अपनी कार्यकारिणी नहीं बना सके।












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