MP News: कटनी से भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनियों से 520 करोड़ की कैसे होगी रिकवरी, जानि पूरा मामला
मध्य प्रदेश के कटनी और जबलपुर में अवैध खनन और जीएसटी चोरी के मामले में विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक की तीन कंपनियों पर मध्य प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। सरकार ने इन कंपनियों-निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, और पेसिफिक एक्सपोर्ट-से 520 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया है।
इस राशि में 440 करोड़ रुपये अवैध खनन और 80 करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी चोरी के जुर्माने के रूप में वसूले जाएंगे। यह कार्रवाई खनिज विभाग की जांच के बाद हुई, जिसमें सैटेलाइट इमेजरी और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के आंकड़ों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं। इस मामले ने मध्य प्रदेश की सियासत में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि संजय पाठक राज्य के सबसे धनाढ्य विधायकों में से एक हैं।

जांच की शुरुआत: व्हिसल ब्लोअर की शिकायत
इस मामले का खुलासा कटनी के व्हिसल ब्लोअर आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित की शिकायत से हुआ, जिन्होंने जनवरी 2025 में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) में संजय पाठक की कंपनियों के खिलाफ अवैध खनन और जीएसटी चोरी की शिकायत दर्ज की थी। उनकी शिकायत में दावा किया गया था कि इन कंपनियों ने स्वीकृत माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय मंजूरी की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए लाखों टन अतिरिक्त लौह अयस्क का खनन किया। इसके अलावा, सहारा ग्रुप की 310 एकड़ जमीन को बाजार मूल्य से 70% कम दाम में खरीदने का भी आरोप लगाया गया, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हुई।
इस शिकायत के आधार पर, खनिज विभाग के प्रमुख सचिव के निर्देश पर अप्रैल 2025 में एक जांच टीम गठित की गई। इस टीम में मनीष पालेवार (उप संचालक, खनिज शाखा, बैतूल) और अनित पंड्या (प्रभारी खनिज अधिकारी, सागर) शामिल थे। जांच दल ने जबलपुर की सिहोरा तहसील में स्थित खदानों-दुबियारा (32.3 हेक्टेयर), घुघरी (8.6 हेक्टेयर), प्रतापपुर (11.5 हेक्टेयर), अगरिया (20.2 हेक्टेयर), और टिकरिया (26 हेक्टेयर)-की गहन पड़ताल की।
जांच में क्या सामने आया?
खनिज विभाग की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच दल ने इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के आंकड़ों और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पुष्टि की कि इन खदानों में स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक लौह अयस्क का खनन किया गया।
अवैध खनन: कंपनियों ने माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय मंजूरी की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए लाखों टन अतिरिक्त खनन किया। यह अनियमितता वर्षों से चल रही थी, जिस पर पहले कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जीएसटी चोरी: जांच में यह भी पाया गया कि इन कंपनियों ने खनन से प्राप्त आय पर जीएसटी भुगतान में भारी अनियमितताएं बरतीं। इससे शासन को 80 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व हानि हुई।
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन: खदानों में पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे वन भूमि और आसपास के क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा।
जांच दल ने 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें इन कंपनियों पर 440 करोड़ रुपये का जुर्माना अवैध खनन और 80 करोड़ रुपये जीएसटी चोरी के लिए प्रस्तावित किया गया। इस आधार पर मध्य प्रदेश सरकार ने 520 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया।
संजय पाठक और उनकी कंपनियां
संजय पाठक मध्य प्रदेश के सबसे धनाढ्य विधायकों में से एक हैं, जिनकी संपत्ति 2018 में 222.54 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो 2013 में 121.32 करोड़ रुपये थी। वे कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक हैं और पूर्व में शिवराज सिंह चौहान सरकार में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग राज्य मंत्री रह चुके हैं। उनके परिवार की कंपनियां-निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, और पेसिफिक एक्सपोर्ट-खनन कारोबार में सक्रिय हैं। इन कंपनियों में उनके परिजन, जैसे निर्मला पाठक और यश पाठक, प्रमुख भूमिका में हैं।
इन कंपनियों पर पहले भी अवैध खनन के आरोप लगते रहे हैं। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जबलपुर की सिहोरा तहसील में निर्मला मिनरल्स की खदान को सील कर दिया गया था, क्योंकि इस पर वन भूमि पर अवैध खनन का आरोप था। इसके अलावा, 2016 में 500 करोड़ रुपये के हवाला कांड में भी पाठक की कंपनी आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन का नाम सामने आया था।
रिकवरी की प्रक्रिया
520 करोड़ रुपये की रिकवरी के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
नोटिस जारी: खनिज विभाग ने तीनों कंपनियों-निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, और पेसिफिक एक्सपोर्ट-को नोटिस जारी किया है, जिसमें 440 करोड़ रुपये अवैध खनन और 80 करोड़ रुपये जीएसटी चोरी के लिए वसूली की मांग की गई है।
कानूनी कार्रवाई: यदि कंपनियां निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करतीं, तो खनिज विभाग और जीएसटी विभाग संयुक्त रूप से कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। इसमें खदानों को सील करना, संपत्ति जब्ती, और अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं।
निगरानी और जवाबदेही: सरकार ने खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन, और पर्यावरण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर नजर रखेंगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन: यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के अनुरूप है, जो अवैध खनन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।
संजय पाठक का पक्ष और सियासी हलचल
संजय पाठक ने इस कार्रवाई को साजिश करार दिया है। अक्टूबर 2024 में उन्होंने दावा किया था कि कुछ लोग उनके पीछे पड़े हैं और उनके भोपाल, कटनी, और जबलपुर स्थित आवासों पर संदिग्ध लोग देखे गए हैं। उन्होंने इसकी शिकायत प्रदेश के डीजीपी से भी की थी। हालांकि, उन्होंने इस रिकवरी आदेश पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
यह मामला मध्य प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह सहारा ग्रुप के निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी को उजागर करता है। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस मामले को उठाते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन कैसे संभव हुआ।
भविष्य की संभावनाएं
इस रिकवरी आदेश के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। क्या संजय पाठक की कंपनियां इस भारी-भरकम राशि का भुगतान करेंगी, या यह मामला कोर्ट में जाएगा? क्या इस कार्रवाई से मध्य प्रदेश में खनन माफिया पर और सख्ती होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल संजय पाठक की कंपनियों के लिए, बल्कि पूरे खनन उद्योग के लिए एक नजीर बन सकता है।
खनिज विभाग ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन और राजस्व चोरी के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी जारी रहेंगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और पारदर्शी खनन नीति को लागू करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जैसे पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करना और वैध खदानों की संख्या बढ़ाना।
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