Opnion: 7.5 लाख कर्मचारियों की 'हैप्पी लाइफ' बनाने सीएम शिवराज के बढ़ते कदम, हकीकत में बदल रही उम्मीदें
Opinion: 'मध्य प्रदेश' विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जहां सजता-संवरता जा रहा है, वहीं सरकार की सौगातों की बारिश से भीगने का मौका कर्मचारी वर्ग को भी मिला। हाल ही में सीएम शिवराज ने डीए के मामले में केन्द्रीय कर्मचारियों के बराबर राज्य के साढ़े सात लाख कर्मचारियों को खड़ा कर दिया।
जिन कर्मचारियों के बलबूते कोई सरकार अपना प्रशासनिक तंत्र चलाती है, उनको खुश करने का सीएम शिवराज ने सही वक्त चुना। इसी साल फरवरी में 4% डीए का इजाफा किया था, उसके ठीक चार माह बाद जून के आखिरी में 4% डीए बढ़ाने की घोषणा कर कर्मचारियों का दिल जीत लिया हैं।
ये करना भी इसलिए जरुरी था, क्यों चुनावी साल है। लंबे समय से केंद्र और राज्य कर्मचारियों के बीच भत्ते की तुलना मुद्दा बनकर चुनाव के वक्त उछलती आई। शायद इसी वक्त की नजाकत को देखते हुए उस भेद को मिटाने का साहस शिवराज ने करके दिखा दिया। अब मिलने वाले 38 फीसदी डीए की जगह 42 फीसदी डीए कर्मचारियों को वेतन में मिलेगा।

इससे सरकारी खजाने पर बढ़ने वाले 160 करोड़ के अतिरिक्त भार का इंतजाम भी कर लिया जाएगा। हाल फिलहाल सरकार को जरुरी कर्मचारियों की नाराजगी को भी दूर करना था। आंकड़ों के लिहाज से कर्मचारियों को कम से कम 800 और अधिकारी वर्ग को 6000 हजार रुपये का फायदा मिला हैं।
सरकार की दरियादिली सिर्फ स्थाई कर्मचारियों में ही देखने को नहीं मिली, बल्कि उन संविदा कर्मचारियों के चहेरों पर भी मुस्कान ला दी, जो स्थाई कर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं से महरूम थे। सौगातों के दौर में लगभग सवा लाख संविदा कर्मियों को नियमित करने का लगे हाथ फैसला ले लिया। यानि आने वाले वक्त में उन्हें स्थाई नियमित कर्मचारियों की तरह सुख सुविधाएं नसीब होना शुरू जाएगी। अनुबंध की प्रक्रिया बंद हो जाएगी। इनका भी दिल जीतने शिवराज ने कोई कसर नहीं छोड़ी। खुले मंच से यह तक कहा कि 'प्रदेश का हर संविदा कर्मचारी 'नींव का पत्थर' हैं। उनकी क्षमताएं, सेवाभाव और कार्यकुशलता किसी से कम नहीं है। कुल मिलाकर सरकारी कर्मचारी जगत में भी 'शिवराज' आइकॉन बन गए हैं।












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