OPINION: 2024 की तैयारियों की ड्रेस में MP में BJP की नई सरकार, सबसे पहले काम में जुटे शिवराज सिंह चौहान
OPINION: शानदार सरकार, जानदार सरकार.. दुनिया में कोई यूं ही पीएम मोदी को ताकतवर नहीं मानता। मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी मोदी की बीजेपी ने कर दिखाया। भारत के नक्शे पर गुजरात से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक प्रचंड जीत की सुंदर लकीर बढ़ गई हैं।
मध्य प्रदेश की जीत लाजबाव हैं। कांग्रेस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि चुनाव मैदान में उसके बड़े-बड़े सियासी घोड़े धड़ाम हो जाएंगे। बीजेपी 163 सीटों के साथ जीत का अद्भुत इतिहास लिखेगी। 2023 की जीत के साथ एमपी में बीजेपी की नई सरकार नई पोशाक में हैं। दावा है कि सुनहरी उम्मीदें, भरोसा और सच झलकता नजर आएगा।
18 साल यानि साढ़े तीन पंचवर्षीय कार्यकाल का बोझ उठाए 64 साल के हो चुके शिवराज सिंह चौहान का समर्पण, दरियादिली और वक्त की नजाकत को देखते हुए लिए गए अभूतपूर्व फैसले भी एमपी की जीत में मिश्री की तरह घुले हैं। केंद्र में 2014 से उभरी मोदी-शाह की जोड़ी हर वक्त नया करने पर ज्यादा भरोसा रखती आई। इसलिए एमपी में भी नया हुआ और होता आएगा।

बीजेपी प्रदेश में पहली दफा जीतती तो भी मान लिया जाता कि सीएम फेस को लेकर मंथन में इतना वक्त लगा। लेकिन 2018 के बाद 15 महीने छोड़ सिलसिलेवार इस जीत ने नए मापदंड तय करने संगठन को भी मजबूर कर दिया। इसी कारण राजधानी भोपाल के गलियारे से दिल्ली तक दिग्गजों की दौड़ सस्पेंस बढ़ाता गया।
प्रदेश में सरकार की नई टीम की जमावट के पीछे मिशन 2024 का लक्ष्य भी छिपा हैं। अगले पांच साल के लिए जिन्हें मौका मिला, उनकी जिम्मेदारियां भी तय हैं। इस आहट को शिवराज सिंह चौहान चुनाव के वक्त ही शायद भली-भांति पहचान गए थे। पब्लिक से ही सार्वजनिक तौर पर पब्लिक से सर्टिफिकेट लेने लगे, कि उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं? फिर हर कोने में जिस अंदाज में धुआंधार प्रचार किया, शिवराज की इस मेहनत को झुठलाया नहीं जा सकता। श्रेय की पोटली में गांठ लगाने वालों में पीएम मोदी तो दिखेंगे ही, क्योकि वह ऊपर हैं।दशक गुजरने को है बड़े फैसले वहीं से नीचे तक आ रहे हैं।
लिहाजा ठंड के सीजन में एमपी की सियासत की तासीर को समझते हुए शिवराज सिंह चौहान 2024 के युद्ध की तैयारियों में अपने अआप जुट गए। पद की लालसा को एक किनारे रखकर जनता जनार्दन को सबसे बड़ा पद बता दिया। छिंदवाड़ा पहुंचकर लाड़लियों के भैया और भांजे-भांजियों के मामा रूपी पद का फिर आचमन किया। संदेश दे दिया कि वह जबरदस्ती किसी खूंटे को पकड़ने के आदी नहीं है। हर फैसला सिर आंखों पर है। आने वाले वक्त में वह अपने जलवे को इसी तरह बरकरार रखेंगे। क्योकि 18 साल शिवराज सिंह बुलंदी के जिस सांचे में ढले, वह हर किसी को नसीब नहीं होता। दिल्ली से प्रदेश की राजनीति में पदार्पण का चलन तो अब बढ़ा हैं। इस अनुभव को पाने मौजूदा लोगों को 18 बरस इंतजार करना होगा।












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