ऐसे होते है ठग: चुनाव ड्यूटी वालों के खातों से ही उड़ा दिए हजारों, अब पीट रहे अपना माथा
बालाघाट सायबर पुलिस को की गई शिकायत के मुताबिक फोन करने वाले ठग ने उनसे सरकारी तरुण एप डिलीट करने कहा। फिर दोनों से चुनाव संबंधी कुछ कामों जैसे कितनी पर्चियां भरी, कहाँ-कहाँ काम किया ये बाते की।
बालाघाट, 24 जुलाई: Hello...Hello चुनाव ड्यूटी वाले सर बोल रहे है...मैडम बोल रही है..फिर शुरू हुई थोड़ी देर की बात में मैडम-सर दोनों के बैंक खातों से 85 हजार रुपए गायब हो गए। तरह-तरह के ऑनलाइन फ्रॉड के बीच ठगों के निशाने पर अब चुनाव भी आ गए है। इसका खुलासा मप्र के बालाघाट जिले में चुनाव ड्यूटी करने वाले दो BLO की शिकायत से हुआ है। फोन करने वाले को अपनी सारी जानकारी मुहैया कराने वाले दोनों कर्मचारी अब अपना माथा पीट रहे है।

चुनाव ड्यूटी करने वाले कर्मचारी हुए शिकार
बालाघाट जिले के रहने वाले प्रेमलता धवड़े और रूपेंद्र कुमार बोपचे की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कार्य में ड्यूटी लगी थी। BLO के रूप में इनके हिस्से में मतदाता पर्ची और चुनाव संबंधी अन्य कार्य का जिम्मा था। चुनाव के बाद दोनों के पास बारी-बारी से किसी अज्ञात शख्स ने खुद को निर्वाचन कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए फोन किया और अपनी बातों में उलझाकर बैंक खाते की जानकारी माँगी। जिसके थोड़ी देर बाद ही प्रेमलता धवड़े के खाते से 27,600 और रूपेंद्र के खाते से 57,546 रुपए गायब हो गए।

रिमोट डेस्कटॉप एप डाउनलोड करवाकर ठगी
पीड़ितों के द्वारा बालाघाट साइबर पुलिस को की गई शिकायत के मुताबिक फोन करने वाले ठग ने उनसे सरकारी तरुण एप डिलीट करने कहा। फिर दोनों से चुनाव संबंधी कुछ कामों जैसे कितनी पर्चियां भरी, कहाँ-कहाँ काम किया ये बाते की। उसके बाद रिमोट डेस्कटॉप एप डाउनलोड करवाकर उनके किए गए काम का भुगतान करने का लालच दिया। ठग ने दोनों कर्मचारियों के कुछ सहयोगियों के नाम का उल्लेख भी किया कि उनकी भी चुनाव में ड्यूटी लगी थी। इतनी बातों से दोनों ही कर्मचारियों को लगने लगा कि कोई निर्वाचन कार्यालय से ही फोन कर रहा है।

ATM कार्ड की जानकारी देते ही उड़ने लगी रकम
रिमोट डेस्कटॉप एप डाउनलोड कराने के बाद पीड़ितों का मोबाइल ठग ने अपने नियंत्रण में ले लिया। उसके बाद चुनाव कार्य की रकम जमा करने के बहाने पीड़ितों से ATM कार्ड की सारी जानकारी ले ली। थोड़ी ही देर में उनके बैंक खाते से रकम कम होती गई। पीड़ितों की समझ में ही नहीं आया कि उनके खाते से रकम कैसे कम हो गई? अगले दिन जब उन्होंने अपने बैंक में संपर्क किया तो मालूम हुआ कि वह ठगी का शिकार हो गए है।

अब साइबर पुलिस ठग का लगा रही पता
साइबर पुलिस भी इस मामले को सुनकर हैरान है। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर अज्ञात शख्स के खिलाफ ठगी का प्रकरण दर्ज किया है। जिस नंबर से पीड़ितों को कॉल किया गया, अब वह बंद आ रहा है। पुलिस ने अभी तक उस नंबर की जो लोकेशन पता की वह अलग-अलग स्थानों की मिली है। फिर पुलिस दावा कर रही है कि संबंधित ठग के मोबाइल नंबर का पहले का रिकॉर्ड पता कर उसे जल्द गिरफ्तार करेगी।

देश भर में फैला ठगों का मायाजाल
देशभर में रोजाना इस तरह की ठगी की वारदातें हो रही है। इससे बचने आम लोगों को भी जागरूक करने प्रयास हो रहे है, फिर भी नए तरीकों और अलग ढंग के मौके का फायदा उठाकर ठग गिरोह भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना बैठते है। तरह तरह के मोबाइल एप, लोन, सेक्सटॉर्शन, फाइनेंशियल फ्रॉड धड़ल्ले से हो रहे है। साइबर एक्सपर्ट बताते है कि गिरोह के सदस्य जिस राज्य में रहते है, वह वहां से कोसो दूर अन्य राज्य के लोगों को अपना निशाना बनाते है। ताकि आसानी से वह पकड़े न जा सकें। शातिर दिमाग इतना कि जिस नंबर से वह कॉल करते है कई बार वह ग्रामीण अंचल के मजदूर वर्ग के नंबर निकले। जिनके नाम पर कई सिम कार्ड एलॉट करा लिए गए। ऐसे बढ़ते मामलों में जरुरी है कि हम और आप पूरी सतर्कता बरते। किसी भी तरह मोबाइल पर अपने बैंक खातों और खुद से जुड़ी कोई भी जानकारी शेयर न करें।
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