गरीबी ने IAS बनने का सपना तोड़ा तो नेहा बनी गरीबों के लिए 'मसीहा'

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टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के छोटे से गांव पोहा की रहने वाली नेहा यादव का आईएएस बनने का सपना गरीबी के चलते अधूरा रह गया था लेकिन अब वो गरीबों के सपनों को साकार करने के मसीहाई काम में जुटी हैं। सामाजिक बदलाव के  लिए नेहा एक तरफ गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रही हैं, तो दूसरी तरफ गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है।

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नेहा ने कभी हिम्मत नहीं हारी

नेहा ने कभी हिम्मत नहीं हारी

पढ़ाई में हमेशा से अव्वल रहने वाली नेहा का सपना आईएस बनने का था। गरीबी ने सपना तोड़ दिया लेकिन नेहा ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। नेहा ने गांव में ही स्कूल खोला ताकि हर बच्चा पढ़ सके।

बिना सरकारी मदद के सामाजिक बदलाव की मुहिम

बिना सरकारी मदद के सामाजिक बदलाव की मुहिम

वहीं दोना बनाने की मशीन खरीदकर गरीब महिलाओं को ट्रेनिंग दी और उन्हें रोजगार देने का काम शुरू कर दिया। खास बात ये है कि इसके लिए कोई सरकारी मदद नहीं ली बल्कि बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर और कर्ज लेकर ये काम किए हैं।

नेहा यादव बनीं दूसरों के लिए मिसाल

नेहा यादव बनीं दूसरों के लिए मिसाल

नेहा यादव उन लोगों के लिए मिसाल हैं, जो सपने टूटने के बाद खुद भी टूट जाते हैं। निराश हो जाते हैं और हालातों के आगे घुटने टेक देते हैं। नेहा ने साबित किया है कि रास्ते तो बहुत हैं, पर जरूरत है उसे पहचान कर पूरी शिद्दत से उस पर आगे बढ़ने की।

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English summary
Neha empowering children and woman in Tikamgarh, Madhya Pradesh.
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