MP News: हुसैन टेकरी से बेशकीमती हीरा चोरी, 100 साल पुराना दान, 8 महीने की जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हुसैन टेकरी शरीफ एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह आस्था नहीं, बल्कि एक सनसनीखेज चोरी है। हुसैन टेकरी के छोटे रोजे की जरी मुबारक गुंबद से बेशकीमती हीरा, जो स्टार (ढांचे) समेत गायब हो गया, अब तक रहस्य बना हुआ है।
करीब 100 साल पहले मुंबई के प्रसिद्ध डायमंड कारोबारी उस्मान जौहरी द्वारा दान किए गए दो हीरों में से एक आज भी बड़े रोजे में सुरक्षित है, लेकिन छोटे रोजे का हीरा चोरी हो चुका है।

आठ महीने की लंबी जांच के बाद जावरा औद्योगिक थाना पुलिस ने 10 अप्रैल 2025 को अज्ञात चोर के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन इस अनसुलझे मामले ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में गुस्सा और अविश्वास पैदा कर दिया है। हीरे की कीमत और कैरेट का कोई रिकॉर्ड न होने से जांच और जटिल हो गई है, और लोग अब पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
हीरा चोरी का रहस्य, 100 साल पुराना दान
हुसैन टेकरी शरीफ, जो अपनी आध्यात्मिक मान्यताओं और भूत-प्रेत बाधा दूर करने की परंपरा के लिए जानी जाती है, एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। बताया जाता है कि करीब 100 साल पहले मुंबई के बड़े डायमंड कारोबारी उस्मान जौहरी ने हुसैन टेकरी को दो बेशकीमती हीरे दान किए थे। ये हीरे बड़े और छोटे रोजे की जरी मुबारक गुंबद में स्टार के ढांचे में जड़े गए थे। बड़े रोजे का हीरा आज भी अपनी जगह पर है, लेकिन छोटे रोजे का हीरा स्टार समेत गायब हो गया।
जांच में सामने आया कि यह हीरा 6 मार्च 2024 से 7 अगस्त 2024 के बीच चोरी हुआ। हुसैन टेकरी के पूर्व कर्मचारी इम्तियाज खान ने सबसे पहले 18 अगस्त 2024 को तत्कालीन SP राहुल कुमार लोढ़ा को सोशल मीडिया के जरिए इस चोरी की शिकायत की थी। इसके बाद हुसैन टेकरी के पूर्व CEO वसी जमा बेग और प्रबंधन कमेटी के कुछ पूर्व सदस्यों ने भी लिखित शिकायत दी, जिसमें छोटे रोजे की जरी से हीरा गायब होने की बात कही गई। शुरुआत में प्रबंधन कमेटी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि छोटे रोजे में कोई हीरा था ही नहीं। लेकिन शिकायतों के बढ़ते दबाव और पुलिस जांच के बाद चोरी की पुष्टि हुई।
MP News: पुलिस जांच, 8 महीने का इंतजार और केस दर्ज
हीरा चोरी की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्कालीन SP के निर्देश पर जांच शुरू की, लेकिन इसमें करीब आठ महीने लग गए। 9 दिसंबर 2024 को अधिकारियों ने छोटे रोजे का निरीक्षण किया, जिसमें शिकायतकर्ताओं और कमेटी सदस्यों की मौजूदगी में पाया गया कि जरी मुबारक के स्टार में पहले हीरा जड़ा था, जिसके स्थान पर अब केवल तिकोना निशान और स्टार का टूटा हुआ हिस्सा बचा है। यह साबित करता है कि हीरा चोरी हुआ।
10 अप्रैल 2025 को जावरा औद्योगिक थाना पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) (चोरी) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि छोटे रोजे की जरी में स्टार के साथ हीरा मौजूद था, जो अब गायब है। हालांकि, हीरे की कीमत, कैरेट, या अन्य विवरण का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड न होने से जांच में मुश्किलें आ रही हैं।
जावरा पुलिस ने अब तक कोई संदिग्ध गिरफ्तार नहीं किया है, और यह मामला अनसुलझा बना हुआ है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इसे प्रबंधन की लापरवाही और पुलिस की सुस्ती का नतीजा मान रहे हैं। एक स्थानीय निवासी, मोहम्मद शरीफ, ने कहा, "100 साल पुराना हीरा चोरी हो गया, और प्रबंधन को पता ही नहीं? यह शर्मनाक है। पुलिस को अब तक चोर को पकड़ लेना चाहिए था।"
MP News: प्रबंधन की भूमिका, आरोप-प्रत्यारोप का दौर
हीरा चोरी का मामला सामने आने के बाद हुसैन टेकरी प्रबंधन कमेटी पर गंभीर सवाल उठे हैं। शुरुआत में कमेटी ने दावा किया कि छोटे रोजे में कोई हीरा था ही नहीं, लेकिन जांच में चोरी की पुष्टि होने के बाद उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ पूर्व कमेटी सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने इस मामले को दबाने की कोशिश की और शिकायतकर्ताओं को चुप कराने का प्रयास किया।
हुसैन टेकरी प्रबंध समिति के अध्यक्ष रऊफ मोहम्मद कुरैशी ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, कमेटी का कहना है कि हीरे का कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं था, और यह चोरी पुरानी हो सकती है। इस बयान ने श्रद्धालुओं के गुस्से को और भड़का दिया है। एक श्रद्धालु, शहनाज बेगम, ने कहा, "हुसैन टेकरी पर लाखों लोग आस्था के साथ आते हैं। अगर प्रबंधन इतना लापरवाह है कि बेशकीमती हीरे की चोरी का पता ही नहीं, तो हमारी आस्था पर क्या असर पड़ेगा?"
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव, श्रद्धालुओं में नाराजगी
हुसैन टेकरी शरीफ, जो सभी धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, इस चोरी ने इसके प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह धार्मिक स्थल भूत-प्रेत बाधा, मानसिक रोगों के उपचार, और चेहल्लुम जैसे आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है, जहां हर साल लाखों जायरीन (श्रद्धालु) आते हैं। ऐसे में बेशकीमती हीरे की चोरी ने न केवल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर किया, बल्कि श्रद्धालुओं के बीच अविश्वास भी पैदा किया है।
सोशल मीडिया पर इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। X पर #HussainTekriTheft और #JaoraDiamondCase जैसे हैशटैग के साथ लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "हुसैन टेकरी जैसे पवित्र स्थल से हीरा चोरी होना शर्मनाक है। प्रबंधन और पुलिस की मिलीभगत की जांच होनी चाहिए।" एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया, "100 साल पुराना हीरा गायब हो गया, और किसी को पता नहीं? यह तो आस्था के साथ धोखा है।"
पुलिस के सामने चुनौतियां: रिकॉर्ड का अभाव और संदिग्धों की कमी
जावरा पुलिस के सामने इस मामले को सुलझाने की बड़ी चुनौती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हीरे की कीमत, कैरेट, या अन्य विवरण का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, चोरी 6 मार्च 2024 से 7 अगस्त 2024 के बीच हुई, जिसका मतलब है कि चोर को पकड़ने के लिए समयसीमा काफी बड़ी है। पुलिस ने छोटे रोजे के आसपास के CCTV फुटेज खंगालने की कोशिश की, लेकिन हुसैन टेकरी क्षेत्र में सीमित कैमरे और पुराने फुटेज की अनुपलब्धता ने जांच को और जटिल बना दिया।
जावरा औद्योगिक थाना प्रभारी ने कहा, "हमने केस दर्ज कर लिया है और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं। कुछ पूर्व कर्मचारियों और कमेटी सदस्यों से पूछताछ की गई है, लेकिन अभी कोई ठोस सुराग नहीं मिला।" पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि चोरी में कोई आंतरिक व्यक्ति शामिल हो सकता है, क्योंकि छोटे रोजे तक पहुंच सीमित लोगों की थी।
हुसैन टेकरी का इतिहास: आस्था और विवादों का संगम
हुसैन टेकरी शरीफ, जो रतलाम से 35 किलोमीटर दूर जावरा में स्थित है, करीब 100 साल पहले नवाब मोहम्मद इस्माइल अली खां की रियासत में स्थापित हुई थी। यह स्थल अपनी अनूठी परंपराओं, जैसे भूत-प्रेत बाधा दूर करने और मानसिक रोगियों के उपचार के लिए जाना जाता है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब हुसैन टेकरी विवादों में है।
- 2017 में मानसिक रोगियों का मामला: 2017 में पुलिस ने हुसैन टेकरी में जंजीरों से बंधे 40 मानसिक रोगियों को मुक्त कराया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद मानसिक रोगियों को जंजीरों में बांधने पर रोक लगाई गई।
- 2022 में हत्या का मामला: 2022 में हुसैन टेकरी परिसर में एक महिला के दो बच्चों की हत्या और खुद चाकू से घायल होने का मामला सामने आया था, जिसमें उसके पति पर "भूत सवार" होने का आरोप लगा।
- 2024 में दुष्कर्म: 2024 में हुसैन टेकरी क्षेत्र में 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ, जिसका आरोपी अभी तक फरार है।
इन घटनाओं ने हुसैन टेकरी की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। हीरा चोरी का यह ताजा मामला इन विवादों की कड़ी में एक और अध्याय जोड़ता है।
सामाजिक मांग: पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई
हुसैन टेकरी के श्रद्धालु और जावरा के स्थानीय लोग इस मामले में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि प्रबंधन कमेटी की लापरवाही और रिकॉर्ड की कमी ने इस चोरी को संभव बनाया। कुछ स्थानीय नेताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच, जैसे CBI या SIT से, की मांग की है।
जावरा के सामाजिक कार्यकर्ता अली हुसैन ने कहा, "हुसैन टेकरी पर देश-विदेश से लोग आते हैं। अगर इतने बड़े धार्मिक स्थल पर चोरी हो सकती है, तो यह हमारी आस्था पर चोट है। सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।" कुछ श्रद्धालुओं ने यह भी मांग की है कि हुसैन टेकरी की संपत्तियों का पूरा ऑडिट हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सियासी कोण: विपक्ष ने उठाया मुद्दा
इस मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। कांग्रेस ने इसे बीजेपी सरकार की नाकामी करार देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा खतरे में है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने X पर लिखा, "हुसैन टेकरी से बेशकीमती हीरा चोरी हो गया, और बीजेपी सरकार 8 महीने तक सोती रही। यह धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। CBI जांच हो।"
वहीं, बीजेपी ने इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी से बचते हुए कहा कि पुलिस जांच कर रही है। स्थानीय बीजेपी नेता ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन पुलिस अपना काम कर रही है। जल्द ही सच सामने आएगा।"












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