MP News: खेत से नरवाई हटाने के लिए मिलेगी मशीन, सरकार करेगी मदद, ऐसे करें आवेदन
मध्यप्रदेश में सहायक कृषि यंत्री भिण्ड से प्राप्त जानकारी अनुसार कृषि अभियांत्रिकी विभाग के ऑनलाईन पोर्टल ई-कृषि यंत्र अनुदान (वेबसाइट dbt.mpdage.org) पर यंत्र हैप्पी सीडर और सुपर सीडर के आवेदन ऑनलाईन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
ये यंत्र गेहूं, धान एवं अन्य फसल की कटाई उपरांत बिना जुताई किए सीधे बोनी हेतु अत्यंत उपयोगी हैं। ये खेत में बची नरवाई/पराली को जमीन में सीधे मिला देते हैं। जिससे किसानों को नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं रहती है और पराली/नरवाई खेत में खाद का काम करती है।

उपरोक्त यंत्रों की अनुमानित कीमत 2.10 लाख से 3.00 लाख रूपये है। जिस पर शासन द्वारा 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अनुदान (अधिकतम राशि 1.05 लाख रूपये) देय है। आवेदन हेतु पात्रता/आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड, जमीन की खतौनी/बी1, सहायक कृषि यंत्री भिण्ड के नाम 4500/- का बैंक डिमांड ड्राफ्ट जो आवेदक किसान के स्वयं के खाते से बना है, ट्रेक्टर (50एचपी या अधिक) का पंजीयन प्रमाण पत्र (आर.सी), एससी/एसटी वर्ग हेतु जाति प्रमाण पत्र, कृषक के बैंक खाते की छाया प्रति जरूरी है।
किसानों पर लगातार हो रहा एक्शन
मध्य प्रदेश में लगातार किसानों की ओर से नरवाई और पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं इसके बाद अब नरवाई और पराली जाने वाले किसानों पर एक्शन लिया जा रहा है। इसके साथ ही अब सरकार नरवाई और पराली जलने वाले किसानों पर एक्शन की तैयारी कर रही है।
नरवाई और पराली जलाने से ना सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि किसानों के खेत खराब होते हैं। यही कारण है कि, लगातार मध्य प्रदेश सरकार नरवाई और पराली जलाने वाले किसानों प्रशिक्षण दे रही है, तो वहीं नरवाई और पराली के निस्तारण को लेकर अलग-अलग तरह की पहल की जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि, मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है। फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने के मामलों में वृद्धि होने से वायु प्रदूषण सहित कई प्रकार से पर्यावरण को बेहद नुकसान हो रहा है। खेत में आग लगाने से जमीन में उपलब्ध पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और भूमि की उर्वरक क्षमता में भी गिरावट आती है। इसके निदान के लिये राज्य सरकार पहले ही नरवाई जलाने को प्रतिबंधित कर चुकी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि, इसके बाद भी यदि कोई किसान अपने खेत में नरवाई जलाता है तो उसे मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा नरवाई जलाने पर संबंधित किसान से अगले साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल उपार्जन भी नहीं किया जाएगा। वे समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में राजस्व विभाग की समीक्षा में निर्देशित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, मृदा संरक्षण एवं भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के मद्देनजर राज्य सरकार का यह निर्णय एक मई से लागू होगा।
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