MP Government: IAS प्रमोशन में बड़ा बदलाव, MP सरकार ने फिर गैर प्रशासनिक अधिकारियों को किया दरकिनार
MP Government: मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति के नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। कारण? लगातार नौवें वर्ष राज्य सरकार ने गैर प्रशासनिक सेवा (Non-Administrative Services) के अधिकारियों को IAS में पदोन्नति के लिए योग्य नहीं माना है।
साल 2024 के लिए प्रस्तावित आठ पदों के लिए भेजी गई सूची में केवल राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिससे गैर प्रशासनिक सेवा अधिकारियों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

पिछले 9 वर्षों से एक ही कहानी, कोई बदलाव नहीं
वर्ष 2016 में जब तत्कालीन मुख्य सचिव एंटोनी डिसा ने चार गैर प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को IAS में शामिल करने की सिफारिश की थी, तब उम्मीद जगी थी कि यह परंपरा बनी रहेगी। लेकिन उसके बाद से स्थिति जस की तस बनी हुई है। एक के बाद एक साल बीतते गए और सरकार ने SAS अधिकारियों को तरजीह देते हुए गैर प्रशासनिक सेवा को किनारे कर दिया।
वर्ष 2023 और 2024 के लिए संयुक्त रूप से IAS संवर्ग में 16 रिक्त पद हैं। हालांकि सरकार ने UPSC को जो नाम भेजे हैं, वे सभी SAS अधिकारियों के हैं। DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठक मई-जून 2025 में प्रस्तावित है, जिसमें इन पदों पर चयन की प्रक्रिया होगी।
MP Government का पक्ष: 'योग्य अधिकारी उपलब्ध हैं'
राज्य सरकार और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का कहना है कि राज्य प्रशासनिक सेवा में पर्याप्त संख्या में योग्य और अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "जब हमारे पास SAS में ही बेहतरीन विकल्प हैं, तो गैर प्रशासनिक सेवा की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है।"
DPC के लिए नाम भेजने की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिरहित रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी कमिश्नरों से अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्टें (CR), पिछले वर्षों का मूल्यांकन और क्लीन चिट मांगी गई है। इस बार भी हर एक पद के लिए तीन-तीन अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे।
MP Government: गैर प्रशासनिक अधिकारियों की निराशा: 'हम भी करते हैं कड़ी मेहनत'
गैर प्रशासनिक सेवा अधिकारियों में इस फैसले को लेकर गहरी निराशा है। मध्य प्रदेश गैर राजपत्रित अधिकारी संघ के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, "हम प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, योजनाएं चला रहे हैं, फील्ड लेवल पर डटे रहते हैं - फिर भी हमारे लिए कोई अवसर नहीं। यह सिर्फ भेदभाव नहीं, बल्कि मनोबल तोड़ने वाला निर्णय है। इन अधिकारियों का मानना है कि नियमों के अनुसार IAS संवर्ग में 15% पद गैर प्रशासनिक सेवाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं, लेकिन सरकार उन्हें लगातार नजरअंदाज कर रही है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अजय मिश्रा का मानना है कि यह निर्णय प्रशासनिक दक्षता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। "SAS अधिकारी ज़मीनी प्रशासन से जुड़े होते हैं। वे अनुविभागीय स्तर से लेकर जिले की नब्ज़ तक समझते हैं। यही IAS पदों के लिए उन्हें उपयुक्त बनाता है। हालांकि, यह भी ज़रूरी है कि योग्य गैर प्रशासनिक अधिकारी भी मौका पाएं।"
IAS बनने का मौका या सिर्फ एक सपना?
गैर प्रशासनिक सेवाओं में काम कर रहे अधिकारी IAS बनने का सपना लेकर सेवा में प्रवेश करते हैं। लेकिन जब साल-दर-साल उनका नाम प्रस्तावों में नहीं आता, तो यह सपना धीरे-धीरे निराशा में बदल जाता है। यह सवाल अब उठने लगा है कि क्या सरकार को नियमों में बदलाव कर पूरी पारदर्शिता से हर सेवा को समान अवसर नहीं देना चाहिए?
DPC की अगली बैठक: क्या होगा फैसला?
UPSC की DPC बैठक मई-जून 2025 में संभावित है। इस बैठक में वर्ष 2023 और 2024 के लिए प्रस्तावित 16 पदों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सरकार का रुख साफ है - केवल SAS अधिकारियों को ही IAS में प्रमोट किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी में लगे अधिकारी बताते हैं कि चयनित अधिकारियों की नियुक्ति साल के अंत तक की जा सकती है।
IAS प्रमोशन को लेकर मध्य प्रदेश में जारी यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से, बल्कि भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी एक गंभीर मसला बन गई है। योग्य अधिकारियों को मौका मिलना चाहिए - यह केवल सेवा संतुलन का नहीं, बल्कि न्याय और योग्यता की भी बात है। अब देखना यह है कि क्या भविष्य में सरकार अपना रवैया बदलेगी या यह सिलसिला इसी तरह चलता रहेगा।












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