MP में ऐसे ही नहीं बची BJP की डबल इंजन सरकार, सर्वे से समझिए क्यों हुआ कमाल
मध्य प्रदेश में करीब 18 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी को भी नकारते हुए, जिस तरह से दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा सीटें हासिल करके बीजेपी ने अपनी सरकार बचाई है, वह भारतीय चुनावी लोकतंत्र के लिए एक नई केस स्टडी हो सकती है।
लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे ने वह वजहें बताई हैं,जिन्होंने कांग्रेस को अबकी बार भी सत्ता में 'अनाथ' ही रखा है। पिछले कई महीनों से ज्यादातर चुनावी पंडित मानकर चल रहे थे कि शिवराज सिंह चौहान पर एंटी-इंकंबेंसी की ऐसी मार पड़ेगी कि बीजेपी की सत्ता में वापसी लगभग 'असंभव' है।

बीजेपी की डबल इंजन सरकार से गदगद वोटर
शायद इससे पार्टी भी इतनी प्रभावित हो गई कि शिवराज को सीएम का चेहरा भी नहीं बनाया। लेकिन, लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे से साफ हो गया है कि राज्य के मतदाता बीजेपी की डबल इंजन सरकार की नीतियों और कार्यों से गदगद हैं। 100 में से 70 वोटर केंद्र सरकार के और 100 में से 60 वोटर राज्य सरकार के काम से खुश नजर आए हैं।
बीजेपी को मिला हर उम्र के मतदाताओं का समर्थन- सर्वे
कमाल की बात है कि बीजेपी को वोट देने पहुंचे लोगों में से हर उम्र के मतदाताओं की संख्या ज्यादा रही है और खासकर के युवा वोटरों ने तो जैसा भगवा लहराने की ठान ही रखी थी।
युवा वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में किया कमाल- सर्वे
इस सर्वे के मुताबिक 25 साल तक की उम्र के 48% वोटरों ने बीजेपी में विश्वास जताया है तो कांग्रेस के पक्ष में 41% ने वोट डाले हैं। इसी तरह से 26 से लेकर 36 साल तक के मतदाताओं में 52% ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया तो 38% ने कांग्रेस का हाथ मजबूत करने की कोशिश की।
वहीं 36 से 45 आयु वर्ग के 49% ने बीजेपी को वोट दिया तो कांग्रेस को मतदान करने वाले 42% रहे। यह ग्राफ आगे के बुजुर्ग वोटरों तक लगातार बना रहा और इसके ऊपर के भी सभी उम्र के वोटरों में बीजेपी के पक्ष में मतदान करने वालों की तादाद 7% से लेकर 14% तक कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा रही।
केंद्रीय योजनाओं का बीजेपी को मिला बड़ा लाभ-सर्वे
जैसा कि सर्वे से पता चला है कि केंद्र सरकार से राज्य की जनता खुश है। तो यह चीज कल्याणकारी योजनाओं के आंकड़ों में भी नजर आई है। मसलन, केंद्र सरकार की जो योजनाएं राज्य में चल रही हैं, उनमें से 51% से लेकर 58% तक का वोट बीजेपी के पक्ष में गया है।
जबकि, अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं के इन लाभार्थियों में से कांग्रेस को जो वोट मिला है, उनके मतदाताओं की तादाद 30% से लेकर 41% के बीच रही है।
किसानों ने भी किया बीजेपी में पूरा भरोसा-सर्वे
राज्य में केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के लिए जो चार प्रमुख योजनाएं चल रही हैं, उनके लाभार्थियों में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट देने वालों की संख्या 55% से 63% के बीच रही है। वहीं कांग्रेस को ऐसे लाभार्थियों का 25% से 35% के बीच वोट गया है।
पुरुष-महिला दोनों में भाजपा का जलवा
मध्य प्रदेश में महिला वोटरों का भाजपा की ओर झुकाव की काफी चर्चा हो रही है। लेकिन, सर्वे से यह तथ्य भी सामने आया है कि पुरुष हों या महिला वोटर, सबकी पहली पसंद राज्य में बीजेपी ही रही है। उनमें अगर शहरी महिलाओं की बात करें तो इसमें भाजपा का पलड़ा कुछ ज्यादा ही भारी दिखा है।
एमपी में पुरुष वोटरों का 38% वोट कांग्रेस को गया है तो बीजेपी को 50% वोट मिले हैं। वहीं महिला मतदाताओं का 43% वोट कांग्रेस को मिला है तो बीजेपी को 47% महिलाओं ने वोट दिया है। यह ट्रेंड ग्रामीण और शहरी दोनों जगह की महिला वोटरों में नजर आया है।
शहरी महिला वोटरों में बीजेपी के पक्ष में जबर्दस्त झुकाव
लेकिन, जहां 43% ग्रामीण महिलाओं ने कांग्रेस को वोट दिया है तो बीजेपी के खाते में 45% ग्रामीण महिलाओं के वोट पड़े हैं। लेकिन, जब हम शहरों का रुख करते हैं तो कांग्रेस को 42% शहरी महिला वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी के खाते में 53% महिला वोट गए हैं।
आखिरी वक्त में फैसला लेने वाली 48% महिलाओं ने बीजेपी को दिए वोट
इस सर्वे का एक और दिलचस्प आंकड़ा है, जो शायद चुनावी पंडितों को नई रिसर्च के लिए प्रेरित कर सकता है। मसलन, एमपी में 29% महिलाओं ने आखिरी समय में फैसला किया कि किसे वोट देना है। वहीं 42% ने चुनाव प्रचार के दौरान और 30% ने पहले से ही तय कर लिया था किसे वोट देना है।
जिन महिलाओं ने आखिरी वक्त में फैसला लिया, उनमें से 42% ने कांग्रेस को और 48% ने बीजेपी को वोट दिए। जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान सोच लिया था, उनमें से 45% ने कांग्रेस को और 46% ने बीजेपी को मत दिए हैं। जबकि, जिन्होंने पहले से ही सोच रखा था उन महिला मतदाताओं में से 42% ने कांग्रेस को और 47% ने बीजेपी को वोट दिए हैं।
महिला लाभार्थियों ने एमपी में किया बड़ा खेल
अब बात सबसे ज्यादा चर्चित लाडली बहना और लाडली लक्ष्मी योजनाओं से भाजपा को मिले फायदे की। ये दोनों ही योजनाएं राज्य सरकार की हैं। इनमें से लाडली लक्ष्मी योजना की कुल 48% लाभार्थियों में से 42% ने कांग्रेस को और 49% ने भाजपा को वोट डाले हैं। लेकिन, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिला, उनमें से 44% ने कांग्रेस को और 43% ने बीजेपी को वोट दिया।
जबकि, बहु-चर्चित लाडली बहना योजना की कुल 81% लाभार्थियों में से 42% ने कांग्रेस को और 48% में भाजपा के लिए वोट डाले हैं। वहीं जो इस लाभ से वंचित रह गईं, उन कुल 12% महिलाओं में से 53% ने कांग्रेस को और 36% ने बीजेपी को वोट डाले हैं।












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