MP News: भोपाल से लेकर इंदौर तक दूध की थैली महंगी, अमूल ने बढ़ाए रेट, सांची भी पीछे नहीं रहेगा?
MP News: गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं को दूध की थैली ने ठंडी राहत नहीं, बल्कि गर्म झटका दे दिया है।
दूध की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है, और इस बार बारी है देश की सबसे बड़ी डेयरी ब्रांडों में शामिल अमूल की। 1 मई गुरुवार से प्रदेशभर में अमूल दूध के दाम बढ़ जाएंगे। 1 लीटर दूध पर 2 रुपए और आधा लीटर दूध पर 1 रुपए महंगा हो जाएगा।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत सभी प्रमुख जिलों में ये बढ़े हुए रेट लागू हो जाएंगे। इससे लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जो रोजाना 2 से 3 लीटर दूध की खपत करते हैं।
अमूल की कीमतें बढ़ी, अब नजरें सांची पर
राज्य में सांची के बाद सबसे अधिक खपत अमूल दूध की होती है। हर दिन प्रदेश में साढ़े तीन लाख लीटर से अधिक अमूल दूध की खपत होती है। अकेले इंदौर में ही सवा लाख लीटर अमूल दूध बिकता है, जबकि भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में यह आंकड़ा 50 से 80 हजार लीटर के बीच रहता है।
अमूल के इस निर्णय के बाद अब सबकी निगाहें सांची ब्रांड पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सांची भी अपने दूध के रेट में बदलाव कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब एक प्रमुख ब्रांड रेट बढ़ाता है तो बाकी कंपनियां भी अपनी कीमतों में बदलाव करने में देर नहीं करतीं। खासकर तब जब कच्चे दूध की कीमतें, ट्रांसपोर्टेशन और पशुपालन लागत में बढ़ोतरी हो रही हो।
भोपाल में "खुले दूध" का दबदबा कायम
दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में पैक्ड दूध की तुलना में खुले दूध की खपत ज्यादा है। प्रतिदिन यहां 6 से 8 लाख लीटर तक खुला दूध बिकता है। हालांकि, पैक्ड दूध में सबसे आगे सांची है, जिसकी औसतन 3 लाख लीटर खपत होती है।
अमूल की खपत भोपाल में लगभग 60 हजार लीटर है, जबकि सौरभ, श्री धी और मदर डेयरी जैसे ब्रांड भी बाजार में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। सौरभ और श्री धी ब्रांड की खपत भोपाल शहरी और ग्रामीण इलाकों में मिलाकर लगभग 1 लाख लीटर है।
MP News: कौन-कौन से वैरिएंट हुए महंगे?
इस बार सिर्फ एक या दो नहीं, अमूल के कई लोकप्रिय दूध वैरिएंट्स की कीमतें बढ़ी हैं। जिन वैरिएंट्स पर दाम बढ़ाए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
- अमूल गोल्ड
- अमूल स्टैंडर्ड
- अमूल बफैलो मिल्क
- अमूल स्लिम एंड ट्रिम
- अमूल चाय मजा
- अमूल ताजा
- अमूल काऊ मिल्क
भोपाल में सबसे ज्यादा मांग अमूल गोल्ड की रहती है, जो खासतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों और चाय की दुकानों की पहली पसंद है। अब यह थोड़ा महंगा पड़ेगा।
तीन महीने पहले घटे थे रेट, अब फिर बढ़ोतरी
गौरतलब है कि 24 जनवरी 2025 को अमूल ने दूध की कीमत में 1 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। उस वक्त उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली थी। लेकिन महज तीन महीने बाद फिर से दाम बढ़ा दिए गए हैं।
अगर पीछे जाएं तो पिछले साल लोकसभा चुनाव नतीजों के ठीक तीन दिन पहले भी अमूल ने दूध के रेट में बढ़ोतरी की थी। तब भी अमूल गोल्ड और शक्ति जैसे वैरिएंट महंगे हुए थे। ऐसे में उपभोक्ताओं के मन में अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या हर बड़े मौके से पहले और बाद में कीमतों में बदलाव एक रणनीति है?
MP News: जनता की प्रतिक्रिया: "दूध अब भी जरूरत है, विकल्प नहीं"
भोपाल की 42 वर्षीय गृहिणी रेखा तिवारी कहती हैं, "दूध के बिना घर का काम नहीं चलता। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए जरूरी है। अब भले 2 रुपए बढ़ गए हों, खरीदना तो पड़ेगा।"
वहीं, इंदौर के एक चाय व्यापारी अशोक ठाकुर कहते हैं, "हम रोजाना 20 लीटर दूध लेते हैं। 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी मतलब सीधा 1200 रुपए महीना अतिरिक्त खर्च। ये छोटा झटका नहीं है।"
क्या सांची भी बढ़ाएगा रेट?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है - क्या सांची भी अपने दूध के दाम बढ़ाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि अमूल की यह बढ़ोतरी एक संकेत हो सकता है। चूंकि मदर डेयरी पहले ही अपने रेट बढ़ा चुकी है और अमूल ने भी यह कदम उठा लिया है, इसलिए सांची पर दबाव है कि वह भी अपने मूल्य पुनः निर्धारित करे।
दूध की थैली में छिपी महंगाई की कहानी
दूध कभी "शुद्ध और संपूर्ण आहार" माना जाता था, लेकिन अब यह जेब पर बोझ बनने लगा है। अमूल की ताजा बढ़ोतरी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आने वाले समय में आम आदमी की थाली से दूध भी गायब हो जाएगा?
बढ़ती महंगाई, सप्लाई चेन की लागत और ब्रांड की रणनीतियों के बीच उपभोक्ता सिर्फ इतना पूछ रहा है - "क्या अब दूध भी किस्तों में खरीदना पड़ेगा?"
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