Ujjain: विवाह वर्षगांठ पर गुजरात की महिला ने भगवान महाकाल को दी चमचमाती भेंट, जिसने देखा वो चौंका
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है, जहां बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान महाकाल को अलग-अलग तरह की भेंट देते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं गुजरात से आई महिला ने अपनी विवाह वर्षगांठ पर भगवान महाकाल को बेहद खास भेंट अर्पित की है।
मध्यप्रदेश के उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में दान की श्रृंखला में गुजरात के दाहोद से पायल सोनी द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान को 01 नग सुवर्ण (सोने) का मुकुट भेट किया गया। जिसका वजन 29.060 ग्राम है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान कर विधिवत रसीद प्रदान की गई। यह जानकारी कोठारी मनीष पांचाल द्वारा दी गई।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में रजत मुकुट दान में प्राप्त
उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशाल जी द्वारा पुजारी प्रदीप गुरु की प्रेरणा से श्री महाकालेश्वर भगवान को 01 नग रजत (चांदी) मुकुट मय सूर्य किरण भेट किया गया। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से जितेन्द्र पवार द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान कर विधिवत रसीद प्रदान की गई। उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में दान की श्रृंखला में श्री गौरी कैलाश जी द्वारा पं. दिनेश पुजारी की प्रेरणा से श्री महाकालेश्वर भगवान को 01 नग रजत (चांदी) मुकुट भेट किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से वीरेन्द्र शर्मा द्वारा प्राप्त कर दानदाता का सम्मान कर विधिवत रसीद प्रदान की गई।
महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के पर्व में तैयारियां प्रारम्भ हो चुकी है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर की धुलाई व मंदिर रंग-रोगन (पुताई), कोटितीर्थ कुंड की सफाई, श्री गर्भगृह व अन्य परिसर आदि की सफाई की जा रही है।महाशिवरात्रि महापर्व 2025 दृष्टिगत रखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में रुद्रयंत्र व रजत दीवारों की सफाई का कार्य प्रारम्भ किया गया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि महाशिवरात्रि पर्व 2025 दिनांक 17 फरवरी से 26 फरवरी 2025 महाशिवरात्रि महापर्व तक मनाया जाएगा। 27 फरवरी 2025 को प्रातः श्री महाकालेश्वर भगवान का सप्तधान (स्वरूप) श्रृंगार कर पुष्पमुकुट धारण कराया जाएगा, व अपराह्न 12 बजे वर्ष में एक बार होने वाली भस्म आरती होगी। साथ ही 01 मार्च 2025 को वर्ष में एक बार एक साथ होने वाले पंचमुखारविन्द (पाँच स्वरूप एक साथ) के दर्शन होंगे।
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