मध्य प्रदेश: भाजपा की जिला पंचायत अध्यक्ष जाती है खुले में शौच, पिता रहे पांच बार सांसद

पिता रहे पांच बार रहे सांसद, भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष, जाती हैं खुले में शोच

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में भाजपा के बड़े नेता रहे दलपत सिंह परस्ते की बेटी, अनूपपुर से जिला पंचायत की अध्यक्ष रूपमती सिंह मारावी के घर में शौचालय नहीं है। रूपमती और उनका परिवार शौच के लिए खुले में जाता है। एक तरफ जहां पीएम मोदी लगातार खुले में शौच को पूरी तरह से खत्म करने और हर घर में शौचालय को लेकर अभियान चला रहे हैं। इसको लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी की बड़ी नेता के घर में शौचालय ना होना चौंकाता है।

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2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं रूपमती

2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं रूपमती

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, रूपमती का परिवार खुले में शौच के लिए जाता है। जब उनसे इस बाबत सवाल किया गया कि किन वजहों से उनके घर में शौचालय नहीं है तो रूपमति ने जवाब दिया कि शौचालय बनाने का काम चल रहा है, जो कि जल्दी ही पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि काम तो अप्रैल में ही शुरू हो गया था लेकिन बरसात के चलते रुक गया है। अब बरसात का मौसम गुजर गया है तो काम फिर से शुरु हो गया है जो कि जल्ही पूरा हो जाएगा।

जिले में खुले में शौच जाने वालों की बड़ी तादाद

जिले में खुले में शौच जाने वालों की बड़ी तादाद

जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 1.44 लाख घर है, जिनमें बड़ी तादाद में ऐसे घर हैं जिनमें शौचालय नहीं है। जिले में करीब 50 हजार लोग खुले में जाते हैं। जिले में केवल 93,134 घर ऐसे हैं जिनमें शौचालय बन गए हैं। स्वच्छ भारत अभियान के कोर्डिनेटर राम नरेश ने कहा कि सभी प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर शौचालय नहीं है तो वे तुरंत ही उसका निर्माण कराएं। ऐसे में उन घरों में जल्ही ही शौचासय बनाएं जाएंगे, जहां शौचालय नहीं हैं।

रूपमती के पिता का शहडोल में रहा है प्रभाव

रूपमती के पिता का शहडोल में रहा है प्रभाव

भाजपा के पिता दलपत सिंह परस्ते का मध्य प्रदेश की राजनीति में काफी प्रभाव रहा है। बीते साल मई में 66 साल के दलपत सिंह की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई थी। दलपत सिंह परस्ते पांच बार शहडोल से सांसद रहे थे। परस्ते 1977 में पहली बार जनता दल से शहडोल के सांसद चुने गए थे। इसके बाद वह 1989 में दोबारा सांसद बने। 1999 में भाजपा में शामिल हुए और तीसरी बार सांसद चुने गए। दलपत सिंह परस्ते लोकसभा की कई समितियों के सदस्य भी रहे और शहडोल में उनका काफी प्रभाव था।

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