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संक्रमण से चीतों की मौत: जंगल से सारे चीते वापस ला रहे, रेडियो कॉलर ID निकालेंगे, बाड़ों में रखकर इलाज होगा

कूनो में चीतों को कॉलर आईडी से संक्रमण, कीड़े पड़ने से मौत के बाद अब सभी चीतों को जंगल से पकड़कर वापस बाड़े में रखा जाएगा। इनके गले से कॉलर आईडी उतारकर इनका इलाज किया जाएगा। बारिश के मौसम में चीते बाड़े में ही निगरानी में रहेंगे।

चीता प्रोजेक्ट: जंगल से चीते वापस बाड़े में लाए जा रहे, रेडियो कॉलर निकालेंगे

कूनो में चीता तेजस और सूरज की मौत के बाद सामने आए सैटेलाइट कॉलर आईडी के संक्रमण, उनकी गर्दन में कीड़े पड़ने, इंफेक्शन फैलने से मौत के खुलासे ने प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को सकते में डाल दिया है। कॉलर आईडी से चीता पवन और दो अन्य चीतों को भी संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। पवन का इलाज चल रहा है। वहीं बाकी 10 चीते जिन्हें कूनो के खुले जंगल में छोड़ा गया है, उन सभी को ट्रेंकुलाइज कर वापस बाड़े में लाया जाएगा। इनकी कॉलर आईडी उतार इनके घावों का इलाज किया जाएगा। वहीं बारिश के पूरे सीजन इन्हें बाड़ों में ही रखा जाएगा।

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पांच चीतों में इंफेक्शन की पुष्टि हो चुकी है
कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन के सूत्रों के मुताबिक अब तक चीता तेजस, सूरज सहित कुल पांच चीतों में सैटेलाइट कॉलर आईडी से इनके गले की त्वचा में स्किन ​इंफेक्शन की पुष्टि हो चुकी है। नामीबियाई चीता पवन और शौर्य व गौरव में भी इसी तरह का संक्रमण दिखा है। जहां चीता पवन को ट्रेंकुलाइज कर बाड़े में कॉलर आईडी निकालकर इलाज चल रहा है, वहीं गौरव व शौर्य को ट्रेंकुलाइज नहीं किया जा सका। उन्हें बुधवार को लाया जा सकता है।

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    टाइगर के लिए बनी कॉलर आईडी चीतों को पहनाई, इसलिए समस्या
    दुनियाभर में बिग कैट्स अर्थात टाइगर, लेपर्ड, चीतों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए इन्हें कॉलर आईडी पहनाना सामान्य प्रक्रिया है। सवाल यह उठता है कि फिर चीतों को कैसे सैटेलाइट कॉलर आईडी से इंफेक्शन हो रहा है। इसको लेकर कूनो नेशनल पार्क के चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिका​रियों की माने तो चीतों को जो कॉलर आईडी पहनाए गए हैं वह इनके शरीर व वजन के अनुसार डिजाइन नहीं है। वे कॉलर आईड टाइगर के लिए तैयार की गई हैं। सूत्रों की माने तो टाइगर की त्वचा काफी सख्त हो होती है, जबकि चीतों की स्किन नर्म व लचीली होती है। टाइगर की चमड़ी की अपेक्षा चीतों की चमड़ी पतली होती है। दौड़ते समय चीतों की गर्दन, सिर भी तेजी से मूवमेंट करते हैं। चीतों को कॉलर आईडी टाइगर की अपेक्षा टाइट बांधनी पड़ती है, इस कारण गर्दन पर लगातार रगड़ लगने से घाव बने और लगातार नमी, बारिश के कारण चमड़ी में इंफेक्शन होकर कीड़े पड़ गए।

    कर्नाटक से तीन सदस्यीय दल कूनो पहुंचा
    चीतों की लगातार मौतों के बाद राज्य और केंद्र सरकार तक चिंतित हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक केंद्र सरकार के निर्देश के बाद कर्नाटक से तीन सदस्यीय वन्य प्राणी विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम श्योपुर पहुंच गई है। टीम में एनटीसीए बेंगलुरु आईजी एनएस मुरली, एआईजी वेणुगोपाल हिरानी भी शामिल हैं।

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