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MP News: टीकमगढ़ में नवविवाहित युवक को हनीट्रैप में फंसाकर पुलिस ने लिया तीन लाख रुपए, हनीट्रैप

MP News: टीकमगढ़ में एक नवविवाहित युवक को हनीट्रैप में फंसाने का मामला सामने आया है। आरोपी महिला ने युवक से 15 लाख रुपए की मांग की, और इस मामले में पुलिस भी शामिल थी।

पीड़ित युवक के परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने तीन लाख रुपए थाने में ही लेकर इस मामले को दबाने की कोशिश की।

In Tikamgarh police took three lakh rupees from a newly married youth by honeytrap them

क्या हैं पूरा मामला

मोहनगढ़ के नंदनपुर गांव के अंशुल यादव की शादी 16 जनवरी को आराधना से हुई थी। इसके बाद 28 जनवरी को अंशुल को देहात थाना पुलिस द्वारा उठाकर ले जाया गया। अंशुल के परिजनों का आरोप है कि थाना प्रभारी रवि गुप्ता और प्रधान आरक्षक राहुल पटैरिया ने उसे रेप का केस करने की धमकी दी और 15 लाख रुपये की मांग की। बाद में यह रकम 3 लाख में तय हो गई, जो थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक को दी गई।

आरोप है कि इस दौरान आरोपी महिला भी थाने में मौजूद थी, जो पूरी घटना में शामिल थी। पीड़ित की पत्नी आराधना यादव के अनुसार, इस राशि को थाने में दिए जाने के बाद मामला सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की मदद से झूठे आरोप लगाने का यह कृत्य बहुत गंभीर है।

पीड़ित का आरोप

आराधना यादव ने बताया कि आरोपी महिला पहले भी कई लोगों को इसी तरह फंसा चुकी है। उन्होंने कहा, "पुलिस की मदद से कुछ महिलाएं आम लोगों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराती हैं और फिर राजीनामे के नाम पर पैसे वसूलने का काम करती हैं। जब से मेरी बेटी की शादी हुई है, तब से उसे फंसाने की कोशिशें की जा रही थीं।"

पुलिस की कार्रवाई

इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एसपी मनोहर मंडलोई ने देहात थाना प्रभारी रवि गुप्ता और प्रधान आरक्षक राहुल पटैरिया को लाइन अटैच कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्र में हड़कंप

इस घटना ने टीकमगढ़ जिले में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं कि पुलिसकर्मी कैसे एक महिला के झूठे आरोपों में मदद कर सकते हैं। पुलिस विभाग की ओर से जल्द ही जांच पूरी करने की बात कही गई है, जिससे यह पता चलेगा कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

इस मामले ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और पुलिस विभाग के अंदर सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है, ताकि इस तरह के झूठे आरोपों का शिकार बनने वाले निर्दोष लोगों को न्याय मिल सके।

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