MP News: किसानों की दुधारू गायों को मिलेंगे हजारों के पुरस्कार, कुछ ऐसी है सरकारी योजना
मध्यप्रदेश में पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने एवं अधिक दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए गोपाल पुरस्कार योजना क्रियान्वित है। योजनान्तर्गत मूल गौवंशीय नस्ल एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गायों के लिये पुरुस्कार योजना का क्रियान्वयन जिले में 02 अप्रैल से 08 अप्रैल 2025 तक किया जाएगा।
जिला स्तर पर पंजीकृत गायों के तीन समय के औसत दूध उत्पादन के आधार पर प्रथम पुरस्कार 51 हजार, द्वितीय पुरस्कार 21 हजार एवं तृतीय पुरस्कार 11 हजार रुपए प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार 02 लाख, द्वितीय पुरस्कार 01 लाख तथा तृतीय पुरस्कार 50 हजार रुपए दिया जाएगा।

उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आरसी पंवार ने बताया कि, यह योजना सभी वर्ग के पशु पालकों के लिये है, जिसके पास भारतीय नस्ल की मालवी गाय एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गाय उपलब्ध हो तथा मालवी गाय का दुग्ध उत्पादन प्रतिदिन 04 लीटर या अधिक एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गाय का उत्पादन 6 लीटर या अधिक हो पंजीयन के लिए पात्र होगें।
प्रतियोगीता में पंजीकृत गाय के तीन समय के दुग्ध उत्पादन का औसत चयन का आधार होगा एवं पंजीकृत मालवी गाय एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गाय को सर्वाधिक दुग्ध देने वाली मालवी गाय एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गाय का पुरस्कार दिया जावेगा। पशु पालक से आग्रह है कि अपनी देशी मालवी एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गायों के आवेदन नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था से प्राप्त कर 04 अप्रैल तक अनिवार्य जमा करवाएं।
दुधारू गायों हेतु पुरस्कार योजना का किया जायेगा क्रियान्वयन
जिले में प्रदेश की मूल गौवंशीय नस्ल (निमाड़ी) एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गायों (गिर. साईवाल) हेतु पुरस्कार योजना का क्रियान्वयन 02 अप्रैल से 08 अप्रैल 2025 के मध्य किया जायेगा। पशुपालन एवं डेयरी विभाग उपसंचालक डॉ. हेमन्त शाह ने बताया कि योजना में जिले के अन्तर्गत समस्त विकास खंडों से ऐसे पशु पालक जिनके पास प्रदेश की मूल गौवंशीय निमाड़ी नस्ल की गाय जिसका प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन 04 लीटर अथवा उससे अधिक है तथा भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गाय का प्रतिदिन 06 लीटर अथवा उससे अधिक है, आवेदन हेतु पात्र होंगे।
इच्छुक पात्र पशु पालकों से पृथक-पृथक आवेदन विकासखंड के पशु चिकित्सालय में प्राप्त किये जायेंगे। डॉ. शाह ने बताया कि आवेदनों का संकलन एवं परीक्षण जिला स्तर पर किया जावेगा। परीक्षण उपरांत प्रदेश की मूल गौवंशीय नस्ल (निमाड़ी) एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गायों की प्रतियोगिता हेतु 10-10 गायों का दैनिक दुग्ध उत्पादन की वरिता के आधार पर चयन कर प्रतियोगिता सम्पन्न करायी जावेगी। उन्होंने बताया कि अधिकतम दुग्ध देने वाली गायों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय पुरस्कार तथा शेष प्रतियोगी गायों हेतु प्रमाण-पत्र प्रदान किये जावेंगे।
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